वेनेजुएला आपदा: ला गुआइरा में भारी तबाही, राहत कार्यों में लापरवाही के आरोप

कराकास
 वेनेजुएला में बीते दिनों आए 7.2 और 7.5 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप ने भयंकर तबाही मचाई है। यहां मरने वालों और घायलों का आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। इस हादसे में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,430 हो गई है, जबकि 3,200 से अधिक लोग घायल हैं और करीब 50,000 लोग अभी भी लापता हैं।

इस विनाशकारी भूकंप में सबसे अधिक ला गुआइरा राज्य प्रभावित हुआ है। यहां हर तरफ मलबे और सड़ते शवों की दुर्गंध फैली हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि प्राकृतिक आपदाओं के बाद पहले 72 घंटे जीवित लोगों को खोजने के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। वह समय अब समाप्त हो चुका है। जीवित लोगों की खोज अब शवों की खोज में बदल गई है।

सेल्फी लेते नजर आएं अधिकारी
भूकंप के बीच सरकारी संवेदनहीनता की एक बेहद शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। एक तरफ जहां हजारों लोग मलबे के नीचे दबे हैं, लाशें सड़ रही हैं। वहीं दूसरी तरफ आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने आए सरकारी कर्मचारी और अधिकारी ध्वस्त इमारतों के सामने खड़े होकर 'सेल्फी' खींचते नजर आए।

राहत कार्यों में सरकार द्वारा ढिलाई के बीच हद तो तब हो गई जब सरकार ने सबसे ज्यादा प्रभावित ला गुआइरा क्षेत्र में आम लोगों का प्रवेश प्रतिबंधित कर दिया और मलबे से अपनों की जान बचाने के लिए जुटे स्थानीय स्वयंसेवकों के लिए भी 'सुरक्षित प्रवेश पास (परमिट)' लेना अनिवार्य कर दिया। जिसको लेकर स्थानीय लोगों का गुस्सा भड़क उठा और कहा कि यहां अधिकारी मदद के लिए सेल्फी लेने के लिए आए थे।

सड़ते शवों क दुर्गंध
भीषण गर्मी में सड़ते शवों की दुर्गंध फैलने के कारण अधिकाधिक लोग मास्क पहने हुए हैं। जो लोग बच गए उनकी कहानियां एक मां को अपनी बेटी का शव कराकस के मुर्दाघर तक ले जाने के लिए मजबूर होना पड़ा।

बुधवार को ला गुआइरा में उनके घर के मलबे के गिरने से उनकी बेटी और दामाद की मौत हो गई। उन्होंने एएफपी को बताया, "हमने उन्हें खुद बाहर निकाला। कोई मदद नहीं आई। शवों के तेजी से सड़ने के कारण दंपति का अंतिम संस्कार बिना किसी शोक सभा के किया जाएगा।

आखिर वे किस बात का इंतजार कर रहे हैं?
वेनेजुएला में आए विनाशकारी भूकंप के बाद जहां एक तरफ लोग अपनों को खोने के गम में डूबे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार और प्रशासन की सुस्ती ने इस दर्द को गुस्से में बदल दिया है।

कैराबलेडा के समुद्रतटीय कस्बे में मलबे के बीच अपनों को तलाश रही माइलेडी रोमेरो ने कहा, "वहाँ कल रात से लाशों का ढेर लगा हुआ है। उन शवों में मासूम नवजात शिशु भी हैं।

कल रात 8 बजे तक वहां मलबे के नीचे लोग ज़िंदा थे, चिल्ला रहे थे, लेकिन प्रशासन ने उन्हें बचाने की कोई जरूरत ही नहीं समझी। हमने अपने स्तर पर कई लाशें बाहर निकाली हैं, लेकिन उन्हें निकालने में भी अधिकारियों ने हमारी कोई मदद नहीं की। आखिर वे किस बात का इंतजार कर रहे हैं।"

हालांकि, अमेरिकासहित 21 देश राहत दल खोज अभियान में जुटे हैं। संयुक्त राष्ट्र (UN) के अनुसार इस आपदा से करीब 67 लाख लोग प्रभावित हुए हैं।

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