मुख्यमंत्री ने सहारनपुर से किया राज्यव्यापी स्कूल चलो अभियान के द्वितीय चरण का शुभारंभ

सहारनपुर

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को उच्च प्राथमिक विद्यालय इस्माइलपुर (कंपोजिट) से राज्यव्यापी स्कूल चलो अभियान के द्वितीय चरण (1 से 15 जुलाई) का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से अपील की कि बच्चों को स्कूल अवश्य भेजें। शिक्षा व्यक्ति, समाज व राष्ट्र की सुदृढ़ आधारशिला है। अच्छी शिक्षा ही सभ्य, संस्कारित नागरिक बनाती है और सही मार्ग दिखाती है। अच्छी शिक्षा से ही अच्छे समाजसेवी, शिक्षक, प्रधानाचार्य, जनप्रतिनिधि, अधिकारी, उद्यमी, इंजीनियर, चिकित्सक, न्यायिक अधिकारी आदि निकलेंगे। देश के भविष्य को बनाने वाली भावी पीढ़ी जिस भी क्षेत्र में आगे बढ़े, शिक्षा के कारण वह आत्मविश्वास से भरपूर होकर समाज व राष्ट्र के निर्माण में अपनी भूमिका का प्रभावी निर्वहन कर सकेगी।

नीयत साफ थी तो परिणाम भी अच्छे आए

सीएम ने कहा कि 2017 में पीएम मोदी जी के मार्गदर्शन व प्रेरणा से प्रदेश सरकार ने स्कूल चलो अभियान प्रारंभ किया। सरकार की नीयत साफ थी तो परिणाम भी अच्छे आए। शिक्षा के उन्नयन के लिए सरकार की नीति स्पष्ट थी। सरकार बिना भेदभाव हर बच्चे तक योजनाओं का लाभ उपलब्ध कराने के संकल्प के साथ बढ़ी थी। 2017 में बेसिक शिक्षा परिषद में केवल 36 फीसदी विद्यालय ही पूरी तरह संतृप्त माने जा रहे थे। उस समय टॉयलेट, पेयजल, फर्नीचर, लाइब्रेरी, लाइट, मिड डे मील आदि की समुचित व्यवस्था नहीं थी। तब ऑपरेशन कायाकल्प चलाकर मैंने जनप्रतिनिधियों, उद्यमियों, अधिकारियों से अपील की कि बेसिक शिक्षा परिषद के स्कूलों में व्यापक रूप से सुविधाएं उपलब्ध कराकर संतृप्तिकरण के लक्ष्य को पूरा किया जाए और उसके पैरामीटर तय किए जाएं। 

5 वर्ष में 96 फीसदी से अधिक विद्यालयों का संतृप्तिकरण

सीएम ने कहा कि हमने तय किया कि हर स्कूल में बालक/बालिकाओं के लिए अलग टॉयलेट, पेयजल और मिड डे मील में प्रतिदिन का भोजन तय हो। स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, सरकार की ओऱ से हर बच्चे को यूनिफॉर्म, बैग, किताबें आदि देकर सभी सुविधाओं से आच्छादित किया जाए। विद्यार्थियों व शिक्षकों के अनुपात को ठीक किया जाए। इसके लिए अभियान प्रारंभ किया गया। इसका असर हुआ कि बेसिक शिक्षा विद्यालयों का 36 फीसदी का संतृप्तिकरण बढ़कर अगले पांच वर्ष में 96 फीसदी से अधिक हो गया। हर बच्चे को बैग, बुक, जूते-मोजे, स्वेटर, यूनिफॉर्म आदि मिलना प्रारंभ हुआ, परिणामस्वरूप नामांकन बढ़ा। 9 वर्ष में 60 लाख से अधिक बच्चे बेसिक शिक्षा परिषद में बढ़े और ड्राप आउट रेट 19-20 फीसदी से घटकर 3-4 फीसदी तक रह गया।

बच्चा स्कूल नहीं गया तो समाज व राष्ट्र की क्षति

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वस्थ समाज के लिए आवश्यक है कि कोई भी बच्चा स्कूल से जाने से वंचित न रहे। कोई भी बच्चा यदि शिक्षा से वंचित है तो यह केवल परिवार की ही नहीं, बल्कि समाज व राष्ट्र की भी क्षति है। इन्हीं बच्चों को समाज के अलग-अलग क्षेत्रों में नेतृत्व देना है। यहां बैठे जनप्रतिनिधि, अधिकारी, शिक्षक आदि भी कभी छात्र थे। सभी ने पढ़ाई की तो इस स्तर तक पहुंचे। यदि बच्चा पढ़ा-लिखा नहीं है तो समाज व राष्ट्र की अपूर्णीय क्षति करेगा और दिग्भ्रमित हो जाएगा। हमें ऐसी पीढ़ी खड़ी करनी है, जो राष्ट्र के कर्तव्यशील नागरिक के रूप में दायित्वों का निर्वहन कर सके।

हर तबके का दायित्व- कोई भी बच्चा स्कूल जाने से न छूटे

सीएम ने विकसित भारत की संकल्पना को पूरा कर समृद्ध समाज बनाने वाले जागरूक नागरिकों से अपील भी की। उन्होंने कहा कि यह दायित्व केवल उन्हीं परिवारों का नहीं है, जिन परिवारों में बच्चे हैं। राजनेता, सांसद, विधायक, पार्षद, ब्लाक प्रमुख, प्रधान, जिला पंचायत अध्य़क्ष, अधिकारी, शिक्षक, अधिवक्ता, व्यापारी, चिकित्सक समेत हर तबके का दायित्व है कि आसपास अवलोकन करें कि कोई भी बच्चा स्कूल जाने से वंचित न रहने पाए। हर बच्चे को स्कूल पहुंचाना है, क्योंकि यह हमारा सामाजिक दायित्व व राष्ट्रीय कर्तव्य भी है। राष्ट्रीय कर्तव्य जब सामूहिकता के साथ निर्वहन होता है तो राष्ट्र प्रगति के पथ पर अग्रसर होता है। 

स्कूल चलो अभियान को जनांदोलन का हिस्सा बनाएं

सीएम ने स्कूल चलो अभियान को अच्छी शुरुआत बताया। सीएम ने समाज के हर वर्ग से भी अपील की कि स्कूल चलो अभियान को जनांदोलन का हिस्सा बनाएं और हर बच्चे को स्कूल पहुंचाएं। बेसिक शिक्षा परिषद के प्रधानाचार्यों व शिक्षकों का दायित्व है कि जिन बच्चों का एडमिशन हुआ है, उन्हें समय पर यूनिफॉर्म का पैसा, बैग, बुक्स, जूता-मोजा समेत आवश्यक सुविधाएं प्राप्त हों और पठन-पाठन का बेहतरीन माहौल हो। 

हर विद्यालय में सुविधाएं उपलब्ध करा रही सरकार

सीएम योगी ने सरकार द्वारा बच्चों के लिए प्रारंभ किए गए विशेष अभियान का भी जिक्र किया। कहा कि सरकार हर विद्यालय में स्मार्ट क्लास, डिजिटल लाइब्रेरी, शिक्षकों को टैबलेट आदि तमाम सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। बेसिक शिक्षा परिषद में डेढ़ लाख से अधिक दिव्यांग बच्चों को सहायक उपकरण भी दिए गए। गत वर्ष 13 हजार से अधिक गंभीर व बहुदिव्यांग बच्चों को छह हजार रुपये प्रतिवर्ष एस्कॉर्ट अलाउंस, 23 हजार से अधिक दिव्यांग बालिकाओं को प्रतिवर्ष दो हजार रुपये स्टाइपेंड भी उपलब्ध कराया गया है। 
 
शिक्षा क्षेत्र में यूपी सरकार सतत कार्यरत

मुख्यमंत्री ने बताया कि पीएम मोदी जी ने 2020 में राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू की है। 26 वर्ष के पश्चात भारत ने यह नीति घोषित की। लर्निंग बाई डूइंग कार्यक्रम के माध्यम से प्रारंभिक स्तर पर ही बच्चों को कौशल आधारित शिक्षा देना प्रारंभ किया गया है। प्रदेश सरकार ने शिक्षामित्रों के मानदेय को 10 हजार से बढ़ाकर 18 हजार तथा अनुदेशकों के मानदेय को 9 हजार प्रतिमाह से बढ़ाकर 17 हजार किया है। हर शिक्षामित्र, शिक्षक, प्रधानाचार्य, रसोइया, अनुदेशक को पांच लाख रुपये वार्षिक कैशलेस इलाज की सुविधा घोषित की है। 

शिक्षकों से बोले सीएम- अगले 15 दिन खूब मेहनत कीजिए

सीएम ने शिक्षकों से अपील की कि अगले 15 दिन जमकर मेहनत कीजिए। ग्राम पंचायत, वार्ड में जाकर हर परिवार से मिलिए, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा कीजिए कि किस स्कूल में अधिक से अधिक बच्चे आ सकते हैं। स्कूल में बेहतरीन माहौल दीजिए। बच्चों को प्यार से कविताओं, गानों, मुहावरों, लोकोक्तियों के माध्यम से सिखाने की नई पद्धति को जन्म देना होगा। यह शिक्षा बच्चों को जीवन भर याद रहेगी। 

मां शाकंभरी की बरस रही विशेष कृपा 

सीएम ने कहा कि स्कूल चलो अभियान के द्वितीय चरण का शुभारंभ मां शाकंभरी की पावन धरा पर हो रहा है। यह ईश्वरीय कृपा ही है कि देर रात्रि से यहां खूब बारिश हो रही है। किसानों के लिए अन्न भंडारण करने और भीषण गर्मी से राहत दिलाने के लिए मां शाकंभरी की विशेष कृपा बरस रही है। 

इस अवसर पर बेसिक शिक्षा मंत्री संदीप सिंह, राज्यमंत्री जसवंत सिंह सैनी, कुंवर बृजेश सिंह, विधायक मुकेश चौधरी, राजीव गुंबर, देवेंद्र कुमार निम, पूर्व सांसद राघव लखनपाल, प्रदीप चौधरी, सिडको के अध्य़क्ष वाईपी सिंह, भाजपा जिलाध्य़क्ष अजीत राणा आदि मौजूद रहे।

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