मां नर्मदा के जल को निर्मल और अविरल बनाये रखने के लिए नमन मिशन तैयार, 2026 का क्रियान्वयन रोड मैप भी तैयार

भोपाल

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मां नर्मदा प्रदेश की 33 प्रतिशत से अधिक आबादी की जीवन रेखा है। यह आबादी नर्मदा नदी और उसके जलग्रहण क्षेत्र पर ही निर्भर है। नर्मदा हमारी धार्मिक आस्था, जैव विविधता और सांस्कृतिक विरासत की आधारशिला है। इसे हर तरह से निर्मल और अविरल बनाए रख कर नर्मदा परिक्रमा पथ को अतिक्रमण मुक्त बनाया जाए। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में नर्मदा जयंती पर विभिन्न आयोजन किए जायें। नर्मदा और इसकी सहायक नदियों सहित पूरे प्रदेश में नदियों के संरक्षण के लिए समाज को विशेषकर युवाओं को जोड़ा जाये। उन्होंने कहा कि अब हर महीने नर्मदा समग्र की बैठक में इस नदी क्षेत्र के विकास के निर्णय लिए जाएंगे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने गुरुवार को मंत्रालय में नर्मदा समग्र की बैठक को संबोधित कर रहे थे।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि माँ नर्मदा के विकास से जुड़ना एक पवित्र काम है। सभी विभाग के अधिकारी पूरे समर्पण से यह काम करें। उन्होंने कहा कि नर्मदा परिक्रमा पथ को पूर्णत: अतिक्रमण मुक्त कर पथिकों के लिए सभी व्यवस्थाएं की जाये और परिक्रमा मार्ग पर संकेतक (सूचना पट्टिकाएं) भी लगाए जाए। नर्मदा के तट पर स्थित सभी धार्मिक और पवित्र स्थलों को प्रदूषण मुक्त बनाया जाए। उन्होंने कहा कि परिक्रमा मार्ग पर जहां मंदिर हैं वहां श्रद्धालुओं के लिए अन्न क्षेत्र भी स्थापित किए जाएं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ऐसे स्थानों पर दीनदयाल रसोई प्रारंभ कराने की व्यवस्था भी कराएगी। बैठक में उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा, मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव डॉ. राजेश राजौरा, अपर मुख्य सचिव श्री नीरज मंडलोई, अपर मुख्य सचिव श्री मनीष रस्तोगी, अपर मुख्य सचिव श्री शिवशेखर शुक्ला, अपर मुख्य सचिव श्री संजय दुबे सहित अन्य प्रमुख सचिव एवं सचिव स्तर के अधिकारी उपस्थित थे। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि नर्मदा समग्र से समन्वय कर नर्मदा परिक्रमा क्षेत्र में स्थित सभी आश्रमों की सूचियां तैयार कर लें। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कृषि एवं उद्यानिकी विभाग को निर्देशित किया कि वे सामूहिक प्रयास कर किसानों को घाटी क्षेत्र में नकद फसलों की पैदावार लेने के लिए प्रेरित करें।

बैठक में अपर मुख्य सचिव श्री शिवशेखर शुक्ला ने बताया कि नर्मदा नदी के सीमावर्ती प्रदेश के 18 जिलों में नर्मदा जयंती पर आयोजन किए जाएंगे। माँ नर्मदा की भव्य आरती, नृत्य, गायन, प्रदर्शनी, प्रतियोगिता और जागरूकता कार्यक्रम भी किए जाएंगे।

बैठक में अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास श्रीमती दीपाली रस्तोगी ने बताया कि माँ नर्मदा के जल को सदैव निर्मल और अविरल बनाये रखने के लिए विभाग द्वारा 'नमन मिशन' तैयार किया गया है। यह मिशन मां नर्मदा घाटी क्षेत्र के समग्र विकास के लिए प्राधिकृत होगा। मुख्यमंत्री इस नमन मिशन की साधारण सभा के अध्यक्ष होंगे। पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री मिशन की साधारण सभा के उपाध्यक्ष होंगे। मुख्य सचिव इस मिशन के सचिव और अपर मुख्य सचिव पंचायत एवं ग्रामीण विकास मिशन के सह-सचिव होंगे। मिशन को क्रियान्वित करने के लिए इस साल 2026-27 का रोडमैप भी तैयार कर लिया गया है।

एसीएस श्रीमती रस्तोगी ने बताया कि इस मिशन के क्रियान्वयन के लिए पहले से विद्यमान 3 समितियों (मंत्रिमण्डल समिति, अन्तर्विभागीय कार्यकारिणी समिति, राज्य स्तरीय अनुश्रवण समिति) का भी सहयोग लिया जाएगा। मिशन के संचालन में जल संसाधन, नर्मदा घाटी विकास, नगरीय विकास, वन, पर्यावरण, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, कृषि, वित्त, पर्यटन, विधि, उद्यानिकी, मत्स्य, राजस्व, जनजातीय कार्य, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, संस्कृति, धर्मस्व, योजना एवं आर्थिकी सांख्यिकी एवं खनिज संसाधन विभाग सदस्य के रूप में तथा 10 प्रतिष्ठित विशेषज्ञ भी इसमें शामिल होंगे। इस फंड के लिए 100 करोड़ रुपये प्रतिवर्ष राज्य अनुदान की व्यवस्था का प्रस्ताव है।

अपर मुख्य सचिव वन श्री अशोक बर्णवाल ने बताया कि मां नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक में जैव विविधता प्रबंधन संस्थान बनाया जाएगा। इसके लिए 32 लाख रुपये का योजना प्रस्ताव तैयार कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि नर्मदा घाटी क्षेत्र में करीब 415 हैक्टेयर क्षेत्र में वन विभाग 2.70 लाख पौधे लगायेगा।

अपर मुख्य सचिव नगरीय विकास एवं आवास श्री संजय दुबे ने बताया कि शहरी क्षेत्रों में नर्मदा घाटों को निर्मल बनाये रखने की व्यवस्था की जा रही है। नर्मदा कोष पोर्टल भी बनाया जा रहा है। नगरीय निकायों के सीएमओ को नर्मदा क्षेत्र के विकास के लिए नोडल बनाया गया है। उन्होंने बताया कि प्रदेश के नर्मदा क्षेत्र के 21 नगरों में 35 एसटीपी तैयार किए जा रहे है। यह काम दिसम्बर 2027 तक पूरे कर लिए जाएंगे। उन्होंने बताया कि ओंकारेश्वर के विकास के लिए यहां स्पेशल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (साडा) तैयार की जाएगी। पर्यटन विभाग ने जानकारी दी कि महेश्वर में 18 होमस्टे तैयार किए है और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान में 13 गावों में 79 होमस्टे तैयार किए गये हैं।

बैठक में पर्यावरण, धर्मस्व, राजस्व, खनिज साधन, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, योजना आर्थिकी सांख्यिकी, एवं अन्य विभागों ने भी नर्मदा घाटी क्षेत्र में किए जा रहे काम की जानकारी दी।

 

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