MP Governor News: मंगुभाई पटेल का कार्यकाल समाप्त! अब दोबारा नियुक्ति होगी या बदले जाएंगे? जल्द होगा फैसला

भोपाल 

मध्य प्रदेश के राज्यपाल मंगुभाई पटेल का पांच साल का कार्यकाल 6 जुलाई को पूरा होने जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि उन्हें दूसरा कार्यकाल मिलेगा या राज्य को नया राज्यपाल मिलेगा। इस पर अंतिम फैसला राष्ट्रपति की ओर से लिया जाएगा। इसे लेकर राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं।

राज्यपाल मंगू भाई पटेल को  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का विश्वसनीय माना जाता है। राज्यपाल के रूप में उनका पूरा कार्यकाल बिना किसी विवाद का रहा है और उनकी ट्यूनिंग राज्य सरकार से काफी अच्छी है। इन सब स्थितियों को देखते हुए मंगू भाई पटेल का कार्यकाल बढ़ने की पूरी संभावना है।

15 साल बाद कोई राज्यपाल पूरा करेगा पांच साल का कार्यकाल
मंगुभाई पटेल पिछले डेढ़ दशक में दूसरे ऐसे राज्यपाल होंगे, जो मध्य प्रदेश में अपना पांच साल का कार्यकाल पूरा करेंगे। इससे पहले रामनरेश यादव ने 8 सितंबर 2011 से 7 सितंबर 2016 तक राज्यपाल के रूप में पूरा कार्यकाल पूरा किया था।

2016 से 2021 के बीच तीन बार बदले राज्यपाल
रामनरेश यादव के कार्यकाल के बाद मध्य प्रदेश में लगातार राज्यपाल बदले गए। इस दौरान लालजी टंडन, आनंदीबेन पटेल और ओपी कोहली ने अलग-अलग समय पर राज्यपाल की जिम्मेदारी संभाली। आनंदीबेन पटेल दो बार मध्य प्रदेश की राज्यपाल भी रहीं। 7 जुलाई 2021 को मंगुभाई पटेल ने राज्यपाल पद की जिम्मेदारी संभाली थी।

आदिवासी क्षेत्रों में सिकल सेल अभियान पर रहा फोकस
राज्यपाल रहते हुए मंगुभाई पटेल ने आदिवासी परिवारों में सिकल सेल बीमारी को लेकर विशेष अभियान चलाने पर जोर दिया। इस दिशा में हुए प्रयासों के कारण मध्य प्रदेश देश में सिकल सेल बीमारी की पहचान और रोकथाम के अभियान में अग्रणी राज्यों में शामिल रहा।

अब राष्ट्रपति लेंगी अंतिम फैसला
मंगुभाई पटेल का कार्यकाल पूरा होने के साथ ही अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि उन्हें राज्यपाल के रूप में दूसरा कार्यकाल दिया जाएगा या मध्य प्रदेश को नया राज्यपाल मिलेगा। इस पर अंतिम निर्णय राष्ट्रपति की ओर से किया जाएगा, जिसका इंतजार राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों ही हलकों में किया जा रहा है।

आईएएस विवेक अग्रवाल ने बढ़ाया प्रदेश का मान
विवेक अग्रवाल को वैश्विक संस्था फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स का उपाध्यक्ष बनाया गया है। मध्य प्रदेश कैडर के 1994 बैच के आईएएस अधिकारी विवेक अग्रवाल भारत सरकार में संस्कृति सचिव हैं। अग्रवाल देश के पहले ब्यूरोक्रेट हैं जिन्हें वैश्विक संस्था का उपाध्यक्ष बनाया गया है। यह संस्था मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद से जुड़ी फंडिंग को रोकने के लिए नियम और कानून बनाती है। भारत 2010 से इस प्रभावशाली अंतरराष्ट्रीय संस्था का सदस्य है, लेकिन भारत को पहली बार उपाध्यक्ष पद की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है। विवेक अग्रवाल मध्य प्रदेश में इंदौर और उज्जैन के कलेक्टर रहे हैं। वे मध्य प्रदेश शासन में तत्कालीन मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव रहने के साथ ही कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके हैं।

मनोज अग्रवाल हो सकते हैं वन विकास निगम के एमडी
वन विकास निगम के प्रबंध संचालक एचयू खान जुलाई में सेवानिवृत होने जा रहे हैं। उनकी जगह वरिष्ठता और मेरिट के आधार पर 1993 बैच के आईएफएस अधिकारी मनोज अग्रवाल को प्रबंध संचालक बनाने की चर्चा है। वर्तमान में मनोज अग्रवाल पीसीसीएफ कैंपा के पद पर हैं और उन्हें पीसीसीएफ वर्किंग प्लान का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है। पूरे महकमे में अग्रवाल की छवि वित्तीय प्रबंध के मामले में एक्सपर्ट के रूप में देखी जाती है। जानकारों का मानना है कि अग्रवाल के अनुभव और वित्तीय प्रबंधन से निगम की वित्तीय स्थिति को सुधारने में मदद मिल सकती है।

जल्द घोषित हो सकते हैं इंदौर और भोपाल विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष
इंदौर-भोपाल विकास प्राधिकरण के अध्यक्षों के नाम जल्द सामने आ सकते हैं। पता तो यहां तक चला है कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के बीच इस पर चर्चा हुई। इस चर्चा में वही दोनों नाम फिर फाइनल किए गए हैं, जिन्हें पूर्व में तय किया गया था। उस वक्त तात्कालिक विरोध को देखते हुए आदेश जारी नहीं किए गए थे। 

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