एक जिला एक क्यूज़ीन से महिलाओं, किसानों और युवाओं को मिलेगा नया रोजगार

लखनऊ
किसी भी शहर की असली रौनक उसके बाजार, गलियों और खाने की खुशबू में दिखती है। सुबह चाय की दुकान पर भीड़ लगती है, दोपहर में कचौड़ी, पूड़ी, सब्जी या चाट की दुकान चलती है और शाम को मिठाई, नमकीन, स्नैक्स और लोकल ड्रिंक की डिमांड बढ़ती है। इन छोटी-छोटी दुकानों के पीछे सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि रोजगार की पूरी चेन चलती है।

यूपी में ODOC यानी वन डिस्ट्रिक्ट वन क्यूज़ीन इसी फूड चेन को नई दिशा दे सकता है। इसका मतलब सिर्फ किसी जिले की एक डिश को नाम देना नहीं है, बल्कि जिले के फूड सेक्टर को एक एक सही तरह का सिस्टम देना है, जहां लोकल रेसिपी, किचन ट्रेनिंग, साफ-सफाई, सर्विस, पैकिंग, सप्लाई, डिलीवरी और छोटे बिजनेस को साथ जोड़ा जा सके।

अगर हर जिले में उसकी खास क्यूज़ीन के आसपास फूड सेंटर, ट्रेनिंग और बिजनेस सपोर्ट बने, तो यूथ को अपने ही शहर में काम के नए मौके मिल सकते हैं।

रसोई से रोजगार, फूड चेन का विस्तार
फूड सेक्टर में रोजगार केवल खाना बनाने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं होता। एक छोटी दुकान भी कई लोगों को काम देती है। कोई सब्जी लाता है, कोई दूध देता है, कोई मसाला सप्लाई करता है, कोई किचन में मदद करता है, कोई पैकिंग करता है, कोई पेमेंट संभालता है और कोई डिलीवरी करता है।

ODOC इसी पूरी चेन को मजबूत कर सकता है। अगर किसी जिले की खास डिश पर काम बढ़ता है, तो उससे जुड़े छोटे-छोटे काम भी बढ़ते हैं। हलवाई को हेल्पर चाहिए, स्नैक यूनिट को पैकिंग स्टाफ चाहिए, लोकल कैफे को सर्विस स्टाफ चाहिए, डिलीवरी के लिए यूथ चाहिए और ऑनलाइन ऑर्डर संभालने के लिए डिजिटल स्किल वाले लोग चाहिए।
इस तरह एक डिश केवल प्लेट में नहीं रहती, बल्कि रोजगार का पूरा नेटवर्क बन सकती है।

जिला फूड सेंटर, स्किल का नया ठिकाना
ODOC को रोजगार से जोड़ने का सबसे अच्छा तरीका जिला फूड सेंटर है। ऐसा सेंटर जहां लोकल यूथ को कुकिंग, किचन मैनेजमेंट, फूड सेफ्टी, सर्विस, पैकिंग, प्राइसिंग और ऑनलाइन ऑर्डर की ट्रेनिंग मिले।

हर युवा अपना रेस्टोरेंट नहीं खोल सकता, लेकिन हर युवा फूड सेक्टर में कोई न कोई काम सीख सकता है। कोई असिस्टेंट कुक बन सकता है, कोई बेकरी या मिठाई यूनिट में काम कर सकता है और कोई क्लाउड किचन में काम सीख सकता है।

जिला फूड सेंटर यूथ को यह समझा सकता है कि फूड बिजनेस केवल स्वाद नहीं, बल्कि टाइमिंग, साफ-सफाई, लागत, सर्विस और ग्राहक भरोसे का भी काम है।

महिलाओं के हाथ का स्वाद, कमाई का नया रास्ता
यूपी के घरों में कई रेसिपी ऐसी हैं, जिन्हें महिलाएं सालों से संभालती आ रही हैं। अचार, पापड़, मसाले, मिठाई, नमकीन, लड्डू, मठरी, सेव, ठेकुआ, चिप्स, चटनी और कई लोकल स्नैक्स घरों में बनते हैं। इनमें स्वाद भी होता है और भरोसा भी।

ODOC महिलाओं को इस घरेलू हुनर से कमाई का रास्ता दे सकता है। अगर महिलाओं को साफ पैकिंग, सही वजन, रेट तय करने, डिजिटल पेमेंट और ऑर्डर संभालने की ट्रेनिंग मिले, तो उनका काम घर से बाहर बाजार तक जा सकता है।

सेल्फ हेल्प ग्रुप भी इस मॉडल में बड़ी भूमिका निभा सकते हैं। एक समूह मिलकर लोकल डिश या स्नैक बना सकता है, दूसरा समूह पैकिंग कर सकता है और तीसरा समूह सप्लाई व ऑर्डर संभाल सकता है। इससे महिलाओं को घर के पास काम मिलता है और परिवार की इनकम को सपोर्ट मिलता है।
घर का स्वाद, बाजार का साथ, महिलाओं को मिला कमाई का नया हाथ।

किसान और फूड बिजनेस का सीधा लिंक
फूड सेक्टर बढ़ेगा, तो उसका फायदा केवल दुकानदार को नहीं होगा, बल्कि किसान को भी इसका फायदा मिल सकता है। हर लोकल डिश के पीछे कोई न कोई कच्चा माल होता है। दूध, गन्ना, गेहूं, चावल, आलू, सब्जी, मसाले, दाल, तेल, फल और मेवा जैसे सामान सीधे खेती से आते हैं।

अगर जिले की खास क्यूज़ीन पर डिमांड बढ़े, तो लोकल सोर्सिंग का रास्ता मजबूत हो सकता है। मिठाई यूनिट को दूध चाहिए, नमकीन यूनिट को बेसन और तेल चाहिए, अचार यूनिट को आम, मिर्च, नींबू या सब्जी चाहिए और पेठा जैसे प्रोडक्ट को कच्चे माल की लगातार जरूरत होती है।

इससे किसान, डेयरी, छोटे सप्लायर, ट्रांसपोर्ट और फूड मेकर के बीच नई चेन बन सकती है। यानी ODOC खेत से किचन और किचन से बाजार तक रोजगार का रास्ता बना सकता है।

सर्विस सेक्टर को नई स्पीड
आज खाने का बिजनेस केवल दुकान पर बैठकर ग्राहक का इंतजार करने तक सीमित नहीं है। अब डिलीवरी, ऑनलाइन ऑर्डर, डिजिटल पेमेंट, सोशल मीडिया, रिव्यू, कस्टमर सपोर्ट और फोटो-वीडियो भी इस सेक्टर का हिस्सा हैं।

ODOC के साथ अगर जिले की डिश की डिमांड बढ़ती है, तो सर्विस सेक्टर में भी काम बढ़ेगा। डिलीवरी बॉय, पैकिंग असिस्टेंट, ऑर्डर मैनेजर, सोशल मीडिया हैंडलर, फूड फोटोग्राफर, मेन्यू डिजाइनर, अकाउंट हेल्पर और कस्टमर सपोर्ट जैसे कई रोल बन सकते हैं।

यूथ इन रोल्स में जल्दी ट्रेनिंग लेकर काम शुरू कर सकता है। खास बात यह है कि यह काम बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि छोटे शहरों और कस्बों में भी फूड सर्विस से जुड़े मौके बन सकते हैं।

स्कूल, कॉलेज और ट्रेनिंग, सीखो स्किल और बनाओ अर्निंग
ODOC को लंबे समय तक मजबूत बनाना है, तो इसे स्किल एजुकेशन से जोड़ना जरूरी है। स्कूल, कॉलेज, आईटीआई, पॉलिटेक्निक और स्किल सेंटर यूथ को फूड सेक्टर की बुनियादी ट्रेनिंग दे सकते हैं।

इसमें किचन हाइजीन, बेसिक कुकिंग, फूड कॉस्टिंग, मेन्यू प्लानिंग, पैकेजिंग, ग्राहक से बात, डिजिटल पेमेंट और बिजनेस की बेसिक समझ शामिल हो सकती है। इससे यूथ पढ़ाई के साथ काम की तैयारी भी कर सकता है।

कई युवा पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी खोजते हैं। अगर उन्हें अपने जिले की फूड इकॉनमी की समझ पहले से मिले, तो वे लोकल स्तर पर भी काम ढूंढ सकते हैं या छोटा बिजनेस शुरू कर सकते हैं।

फूड इवेंट से लोकल कमाई
जिले की क्यूज़ीन को आगे बढ़ाने के लिए छोटे-छोटे फूड इवेंट भी बड़ा रोल निभा सकते हैं। जिला स्तर पर फूड डे, कॉलेज फूड फेस्ट, लोकल मेले, रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड पर टेस्ट काउंटर और बाजारों में फूड स्टॉल लगाए जा सकते हैं।

ऐसे इवेंट से दो फायदे होते हैं। पहला, लोगों को अपने जिले के स्वाद की नई पहचान मिलती है और दूसरा, यूथ व छोटे फूड बिजनेस को ग्राहक के सामने आने का मौका मिलता है।

कई युवा ऐसे इवेंट में स्टॉल लगाकर बिजनेस समझ सकते हैं। उन्हें पता चलता है कि ग्राहक क्या पसंद करता है, किस पैकिंग में सामान बिकता है, किस दाम पर मांग बनती है और किस तरह की सर्विस से ग्राहक वापस आता है।

ODOC से रोजगार का नया भरोसा
ODOC को केवल खाने की पहचान तक सीमित नहीं देखना चाहिए। यह फूड सेक्टर को रोजगार, स्किल, महिला कमाई, किसान लिंक और छोटे बिजनेस से जोड़ने का मौका है।

अगर जिले की खास क्यूज़ीन के आसपास ट्रेनिंग सेंटर, फूड हब, लोकल सोर्सिंग, डिजिटल ऑर्डर और छोटे स्टॉल मॉडल बनते हैं, तो यूथ को अपने शहर में काम मिल सकता है। महिलाएं घर के स्वाद को कमाई में बदल सकती हैं, किसान की उपज को लोकल खरीदार मिल सकता है और छोटे दुकानदार ज्यादा संगठित तरीके से आगे बढ़ सकते हैं।

यही एक जिला-एक क्यूज़ीन की सोच का रोजगार वाला असर है। स्वाद से पहचान, पहचान से मांग, मांग से काम और काम से जिले की ग्रोथ बनती है।

 

More From Author

जिला प्रशासन की बैठक में रियल एस्टेट पर बड़ा फैसला, नई दरें जल्द लागू होंगी

इस्लामी दुनिया में बढ़ी खाई? खामेनेई के अंतिम संस्कार में नहीं पहुंचे 3 प्रमुख मुस्लिम देश, चर्चा तेज

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 13843/161

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.