बेल्जियम का दमदार प्रदर्शन, अमेरिका को 4-1 से हराकर FIFA वर्ल्ड कप से किया बाहर

सिएटल

फीफा वर्ल्ड कप 2026 में बेल्जियम ने शानदार खेल दिखाते हुए मेजबान अमेरिका को 4-1 से हरा दिया है। इस जीत के साथ ही बेल्जियम की टीम क्वार्टर फाइनल में पहुंच गई है। सिएटल स्टेडियम में खेले गए इस मैच में बेल्जियम की टीम शुरू से अंत तक हावी रही और उन्होंने अमेरिका को मैच में वापस आने का कोई मौका ही नहीं दिया। अब क्वार्टर फाइनल में बेल्जियम की टक्कर स्पेन से होगी।

पहले हाफ में डी केटेलारे ने बेल्जियम के लिए दागे दो गोल
मैच शुरू होते ही बेल्जियम ने अटैक करना शुरू कर दिया और 9वें मिनट में ही चार्ल्स डी केटेलारे ने गोल करके अपनी टीम को 1-0 से आगे कर दिया। इसके बाद 31वें मिनट में अमेरिका के मलिक टिलमैन ने एक गोल करके स्कोर 1-1 की बराबरी पर ला दिया। लेकिन अमेरिका की यह खुशी सिर्फ दो मिनट ही टिक पाई, क्योंकि 33वें मिनट में डी केटेलारे ने अपना दूसरा गोल कर बेल्जियम को फिर से बढ़त दिलाई।

दूसरे हाफ में भी बेल्जियम ने दागे दो गोल
मैच के दूसरे हाफ में भी बेल्जियम का जलवा जारी रहा। 57वें मिनट में हांस वनाकेन ने टीम के लिए तीसरा गोल किया। इस गोल के बाद अमेरिका के लिए इस मैच में वापसी की उम्मीदें लगभग खत्म हो गईं। इसके बाद मैच के आखिरी समय (इंजरी टाइम 90+3 मिनट) में रोमेलु लुकाकू ने चौथा गोल करके बेल्जियम को 4-1 से एक शानदार जीत दिला दी। इस जीत के साथ ही बेल्जियम ने मेजबान यूएसए को इस वर्ल्ड कप से बाहर कर दिया।

इस मैच के लिए फोलारिन बालोगुन से हटाया गया था बैन
इस मैच में अमेरिकी टीम के लिए अच्छी बात यह थी कि उनके प्रमुख खिलाड़ी फोलारिन बालोगुन की टीम में वापसी हो गई थी। रेड कार्ड मिलने की वजह से उन पर एक मैच का बैन (प्रतिबंध) लगा था, लेकिन फीफा ने एक विवादित फैसले में उनका यह बैन हटा दिया। इसके बाद भी अमेरिकी टीम अपने ही देश में उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाई। बेल्जियम की टीम ने खासकर अमेरिका के डिफेंडर्स की गलतियों का पूरा फायदा उठाया। अब क्वार्टर फाइनल में बेल्जियम का सामना स्पेन से होगा, जिसने अपने पिछले मैच (राउंड ऑफ-16) में पुर्तगाल को 1-0 से हराया था। पुर्तगाल की टीम इस वर्ल्ड कप में राउंड ऑफ 16 से बाहर हो गई।

ट्रम्प के फोन के बाद अमेरिकी खिलाड़ी का रेड-कार्ड रद्द

फीफा वर्ल्ड कप में अमेरिकी फुटबॉलर फोलारिन बालोगुन का रेड कार्ड रद्द होने पर विवाद हो गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के फीफा अध्यक्ष जियानी इन्फेंटिनो को फोन करने के बाद रेड कार्ड रद्द किया गया। इसके बाद बालोगुन को बेल्जियम के खिलाफ प्री-क्वार्टर फाइनल मैच खेलने की परमीशन मिल गई। हालांकि, बालोगुन के खेलने के बाद भी अमेरिकी टीम बेल्जियम के खिलाफ 1-4 से हारकर टूर्नामेंट से बाहर गई।

फुटबॉल वर्ल्ड कप के इतिहास में यह पहला मामला है, जब किसी राष्ट्राध्यक्ष ने रेड कार्ड रद्द करने की पैरवी की हो और फीफा ने इसे मान भी लिया हो। फीफा के इस फैसले का बेल्जियम फुटबॉल संघ और यूरोपियन फुटबॉल यूनियन ने विरोध किया है।

2018 वर्ल्ड कप के दौरान भी कुछ देशों के नेताओं ने रेफरी के फैसलों पर सार्वजनिक टिप्पणी की थी, लेकिन उन मामलों में फीफा ने अपने निर्णयों में कोई बदलाव नहीं किया था। 2002 वर्ल्ड कप में साउथ कोरिया के पक्ष में कुछ विवादित फैसलों पर राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चा हुई थी, लेकिन तब भी किसी सजा या निर्णय को बदला नहीं गया था।

बालोगुन को बोस्निया के खिलाफ रेड कार्ड दिखाया गया था
25 साल के बालोगुन को पिछले नॉकआउट मुकाबले में रेड कार्ड मिला था। नियमों के अनुसार उन्हें एक मैच का बैन झेलना चाहिए था। इसके बावजूद फीफा ने उन्हें बेल्जियम के खिलाफ राउंड ऑफ-16 मुकाबले में खेलने की मंजूरी दे दी। बेल्जियम फुटबॉल महासंघ ने फीफा के इस फैसले के खिलाफ अपील दायर की, जो खारिज हो गई। बालोगुन ने टूर्नामेंट में तीन गोल किए।

ट्रम्प ने दखल देने की बात मानी
प्री क्वार्टर फाइनल से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बालोगुन रेड कार्ड मामले में दखल देने की बात स्वीकार की। उन्होंने सोमवार को व्हाइट हाउस में कहा, 'मैंने ही फीफा से कहा था कि वे अमेरिका के स्ट्राइकर फोलारिन बालोगुन पर लगाए गए एक मैच के बैन का रीव्यू करे।

ट्रम्प ने कहा- ‘मैंने फीफा अध्यक्ष इन्फेंटिनो से बात की। उन्होंने कहा, मुझे नहीं लगता कि यह फाउल था।’ इसके बाद फीफा ने बालोगुन को बेल्जियम से मैच खेलने की अनुमति दे दी। इस पर ट्रम्प ने कहा- फीफा ने सही निर्णय लिया। अगर प्रतिबंध लागू किया जाता तो टूर्नामेंट पर बड़ा धब्बा लग जाता।

फीफा बोला- नियमों के आधार पर फैसला लिया
फीफा प्रेसिडेंट इन्फेंटिनो ने सोशल मीडिया पर कहा कि अनुशासन समिति ने पूरी स्वतंत्रता के साथ निर्णय लिया। हर मामले का मूल्यांकन संबंधित नियमों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर किया जाता है। हालांकि, इस फैसले ने विश्व कप के दौरान फीफा की पारदर्शिता और निर्णय प्रक्रिया को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

फीफा हमेशा यह दावा करता रहा है कि उसके फैसले राजनीतिक प्रभाव से पूरी तरह स्वतंत्र होते हैं। ऐसे में विश्व कप के दौरान किसी देश के राष्ट्रपति की सार्वजनिक दखलअंदाजी और उसके बाद खिलाड़ी को मिली राहत ने खेल प्रशासन की निष्पक्षता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

1962 में गरिंचा का रेड कार्ड रद्द हुआ था
यह वर्ल्ड कप के इतिहास में रेड कार्ड रद्द होने का दूसरा मामला है। पहला मामला 1962 में सामने आया था। तब ब्राजील के गरिंचा को सेमीफाइनल में चिली के खिलाफ रेड कार्ड दिखाया गया था। हालांकि, गरिंचा ने फाइनल में हिस्सा लिया और चेकोस्लोवाकिया पर जीत हासिल की।

उस समय रेड कार्ड के बाद खिलाड़ी पर प्रतिबंध नहीं लगता था, बल्कि अधिकारी सबूतों के आधार पर सजा तय करते थे। 1962 में फीफा की अनुशासनात्मक समिति का निर्णय राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों से घिरा हुआ था।

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