ममता-अभिषेक विवाद के बीच टीएमसी में बढ़ी अंदरूनी कलह

नई दिल्ली
तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता, उत्तर बंगाल विकास विभाग के पूर्व मंत्री और बागी गुट के रवींद्रनाथ घोष ने रविवार को दावा किया कि अगर ममता बनर्जी अपने भतीजे अभिषेक बनर्जी को सक्रिय राजनीति से अलग करने में सफल हो जाती हैं, तो ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले बागी गुट में शामिल अधिकांश असंतुष्ट नेता टीएमसी में लौट आएंगे। नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व वाले तृणमूल कांग्रेस के बागी गुट में शामिल होने वाले घोष नवीनतम सदस्य हैं, जिन्होंने ममता बनर्जी के गुट से अपने संबंध तोड़ लिए। इससे कूचबिहार में एक बड़ा राजनीतिक बदलाव आया है और मुश्किलों से घिरी पार्टी में मतभेद और गहरे हो गए हैं।

यह घटनाक्रम तब हुआ है जब बागी गुट ने पार्टी पर कब्जा करने की कोशिशें तेज कर दी हैं और अपनी समानांतर राज्य और जिला समितियां बनाई हैं। इस कदम से ममता बनर्जी के कई पुराने वफादार, जिनमें बीरभूम के कद्दावर नेता अनुब्रत मंडल भी शामिल हैं, उनके खेमे में आ गए हैं, जो राजनीतिक बगावत से संगठन बनाने की दिशा में एक निर्णायक बदलाव है। बागी गुट द्वारा घोष को पार्टी का कूचबिहार जिला अध्यक्ष बनाए जाने की संभावना है। उन्होंने अभिषेक बनर्जी और राजनीतिक परामर्श कंपनी आई-पैक की कड़ी आलोचना की। उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस को जो हार मिली, वह काफी हद तक इन्हीं के प्रभाव का नतीजा थी

'अभिषेक बनर्जी को दूर करने से वापस आ जाएंगे नेता'
घोष ने संवाददाताओं से कहा, "पार्टी के कई नेताओं से बात करने के बाद मुझे जो समझ आया है, वह यह है कि ममता बनर्जी को अभिषेक को सक्रिय राजनीति से दूर करना होगा, कम से कम कुछ समय के लिए। मेरा मानना ​​है कि इससे नाराज नेता और कार्यकर्ता उनके पास वापस आ जाएंगे।" उन्होंने कहा, “इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि अभिषेक की मनमानी… 80 से अधिक मौजूदा विधायकों और मंत्रियों के टिकट काट दिए गए तथा कई अन्य नेताओं को संगठनात्मक पदों से हटा दिया गया, इसका पार्टी पर गंभीर असर पड़ा।”

'ममता दीदी से ताकत कहीं और सिमट गई'
दो दशक से ज्यादा समय तक तृणमूल के जिला अध्यक्ष रहे और ममता बनर्जी के लंबे समय से सहयोगी रहे घोष ने सवाल उठाया कि क्या पार्टी प्रमुख का पार्टी पर असरदार नियंत्रण बना हुआ है। उन्होंने दावा किया, "क्या सच में अब दीदी के हाथों में कोई ताकत बची है? ताकत कहीं और सिमट गई है और अहम जिम्मेदारियां नाकाबिल लोगों को सौंप दी गई हैं। अगर ममता बनर्जी चाहें भी तो भी वे कोई काम नहीं कर पाएंगी।"

'अभिषेक बनर्जी में राजनीतिक अनुभव की कमी'
जब उनसे पूछा गया कि क्या पार्टी का बंटवारा और चुनावी हार अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व का नतीजा थी, तो घोष ने कहा, "उनमें राजनीतिक अनुभव की कमी है। वे किसी राजनीतिक आंदोलन से नहीं आए हैं। और आई-पैक क्या थी? यह युवाओं का एक समूह है जो हमें बताता है कि क्या करना है।" घोष ने कहा, "हम राजनीतिक संघर्षों और सालों की कड़ी मेहनत से आगे बढ़े हैं। 2011 या 2016 में आई-पैक नहीं थी। अचानक वह अपरिहार्य हो गयी। आखिर में, उन्होंने पार्टी को बर्बाद कर दिया और चले गए।" ममता बनर्जी से सीधे अपनी चिंताएं बताने के बजाय पाला बदलने के सवाल पर घोष ने कहा कि तृणमूल कांग्रेस एक ही है और उसमें कोई गुट नहीं हैं। उन्होंने कहा, "हमें वहां रहना होगा जहां बहुमत है। उत्तर बंगाल के सभी विधायक और नेता एक जगह इकट्ठा हो गए हैं। मैंने पार्टी कार्यकर्ताओं का साथ देने के लिए यह फैसला लिया है।"

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