ट्विशा केस: CBI ने कोर्ट को बताया- गिरिबाला और समर्थ ने दोबारा वॉयस सैंपल देने से मना किया, AIIMS रिपोर्ट भी लंबित

भोपाल
 ट्विशा शर्मा की मौत मामले में पूर्व जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ सिंह भोपाल जेल में बंद हैं। भोपाल कोर्ट में मंगलवार को केस की सुनवाई हुई। लेकिन दोनों को राहत नहीं मिली है। अभी सीबीआई की जांच पूरी नहीं हुई है। ऐसे में मां-बेटे की न्यायिक हिरासत 28 जुलाई तक बढ़ गई है।

जस्टिस अनुदिता गुप्ता के कोर्ट में हुई सुनवाई
दरअसल, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जस्टिस अनुदिता गुप्ता की कोर्ट में पूर्व जज गिरिबाला सिंह और उनके बेटे समर्थ की पेशी हुई। सुनवाई के दौरान सीबीआई ने कहा कि जांच अभी लंबित है। दोनों आरोपी वॉयस सैंपल देने से इनकार कर रहे हैं। इसके बाद कोर्ट ने फिर से वॉयस सैंपल देने का आदेश जारी किया है।

28 जुलाई तक जेल में रहेंगे दोनों
वहीं, कोर्ट ने 28 जुलाई तक दोनों की न्यायिक हिरासत बढ़ा दी है। ट्विशा के वकील शुभांग दीक्षित ने मीडिया से बातचीत में कहा है कि समर्थ सिंह ने एक बार भी वॉयस सैंपल नहीं दिया है। पूर्व में गिरिबाला सिंह एक बार सैंपल दे चुकी हैं।

पीएम रिपोर्ट भी नहीं मिली
इसके साथ ही सुनवाई के दौरान भोपाल एम्स ने कोर्ट को बताया कि हम पीएम रिपोर्ट और उससे जुड़े सभी दस्तावेज सीबीआई को दे चुके हैं। अलग से कोई रिपोर्ट नहीं दी जाएगी। सीबीआई ने यह भी कहा है कि दिल्ली एम्स की तरफ से पोस्टमार्टम रिपोर्ट को लेकर कोई अपडेट नहीं है।

भोपाल AIIMS ने कहा- पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट CBI को दे दी, अलग से नहीं देंगे
सुनवाई के दौरान ट्विशा पक्ष के वकील शुभांग दीक्षित ने बताया कि 6 जुलाई को CBI आरोपियों के सैंपल लेने पहुंची थी। समर्थ सिंह ने वॉयस सैंपल देने से साफ इनकार कर दिया जबकि गिरिबाला सिंह ने एक बार सैंपल दिया लेकिन दोबारा सैंपल नहीं दिया।

कोर्ट में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट पर भी चर्चा हुई। वकील शुभांग दीक्षित के मुताबिक, भोपाल AIIMS ने अदालत को बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और उससे जुड़े सभी दस्तावेज पहले ही CBI को सौंपे जा चुके हैं। इसलिए अलग से रिपोर्ट नहीं दी जाएगी। वहीं, दिल्ली AIIMS की ओर से अभी तक कोई जवाब नहीं मिला है।

दोनों आरोपियों की पेशी इस बार भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए कराई गई। अदालत परिसर में भीड़, मीडिया की मौजूदगी और सुरक्षा कारणों को देखते हुए आरोपियों के वकीलों ने वीसी के माध्यम से पेशी कराने का अनुरोध किया था, जिसे अदालत ने स्वीकार कर लिया।

चार्जशीट के लिए सीबीआई के पास 60 दिन का वक्त
वहीं, सीबीआई के पास चार्जशीट पेश करने के लिए 60 दिन का वक्त है। सीबीआई ने इस केस को 25 मई 2026 को अपने हाथ में लिया था। अगर इस अवधि के दौरान सीबीआई चालान नहीं पेश करती है तो आरोपी पक्ष कोर्ट में जमानत के लिए दावा कर सकता है।

गौरतलब है कि पूर्व जज गिरिबाला सिंह की बहू ट्विशा शर्मा की मौत भोपाल में 12 मई को हुई थी। ट्विशा के ससुराल वालों ने कहा था कि उसने खुदकुशी की है। वहीं, मायके पक्ष ने आरोप लगाया था कि उसकी हत्या हुई है।

त्विषा शर्मा के परिजनों की ओर से पैरवी कर रहे अधिवक्ता शुभांग दीक्षित ने बताया कि भोपाल एम्स ने अदालत को सूचित किया है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट और उससे संबंधित सभी दस्तावेज पहले ही CBI को सौंपे जा चुके हैं, इसलिए अलग से रिपोर्ट उपलब्ध नहीं कराई जाएगी। वहीं, दिल्ली एम्स की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ है। दरअसल, परिजनों ने भोपाल एम्स की पोस्टमार्टम रिपोर्ट की प्रति उपलब्ध कराने के लिए अदालत में आवेदन दायर किया था।

उधर, CBI सूत्रों के अनुसार, मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के आदेश के बाद 25 मई को एजेंसी ने इस मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। जांच एजेंसी वर्तमान में उपलब्ध साक्ष्यों, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और फॉरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर वैधानिक 60 दिन की अवधि के भीतर आरोप-पत्र (चार्जशीट) दाखिल करने की तैयारी कर रही है, ताकि आरोपियों को डिफॉल्ट जमानत का लाभ न मिल सके। यदि निर्धारित अवधि में चार्जशीट दाखिल नहीं होती है, तो आरोपी उच्च अदालतों से जमानत का लाभ लेने के पात्र हो सकते हैं।

दूसरी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट बनी अहम साक्ष्य
सूत्रों के अनुसार, दिल्ली AIIMS के पांच सदस्यीय मेडिकल बोर्ड ने 10 जुलाई को अपनी अंतिम फॉरेंसिक रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में CBI को सौंप दी है। रिपोर्ट की आधिकारिक जानकारी अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। हालांकि, जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक रिपोर्ट में कुछ वैज्ञानिक निष्कर्ष दर्ज हैं, जिन्हें CBI अपनी जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में देख रही है। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है।

CBI को 60 दिन में चालान पेश करना है
CBI ने 25 मई 2026 को हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस मामले की जांच अपने हाथ में ली थी। जांच की 60 दिन की वैधानिक अवधि पूरी होने से पहले एजेंसी चालान पेश कर सकती है। यदि तय समय-सीमा के भीतर चालान दाखिल नहीं होता है, तो आरोपी पक्ष कानून के तहत डिफॉल्ट जमानत का दावा कर सकता है।

12 मई को हुई थी ट्विशा की मौत
ट्विशा शर्मा 12 मई 2026 की रात भोपाल के कटारा हिल्स स्थित अपने ससुराल में मृत मिली थीं। ससुराल पक्ष ने इसे आत्महत्या बताया था, जबकि मायके पक्ष ने हत्या का आरोप लगाया। पहले पोस्टमॉर्टम पर सवाल उठने के बाद हाईकोर्ट ने दिल्ली AIIMS से दोबारा पोस्टमॉर्टम कराने के निर्देश दिए थे। अब इसी रिपोर्ट के आधार पर CBI अपनी जांच आगे बढ़ा रही है।

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