SC आदेश के बाद धार प्रशासन ने नमाज के लिए चालीसा पीर परिसर चुना

नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट से मिले निर्देश के बाद भी मध्यप्रदेश सरकार धार में स्थित भोजशाला के करीब खुले स्थान पर जुमे की नमाज नहीं करवा सकी। हालांकि प्रशासन ने भोजशाला परिसर के पास नमाज नहीं करवा पाने से जुड़ी किसी विशेष वजह का खुलासा तो नहीं किया, लेकिन प्रशासनिक सूत्रों ने बताया कि इसके पीछे सर्वोच्च न्यायालय का विस्तृत आदेश देर से उपलब्ध होना तथा आदेश के अनुरूप नमाज के लिए उपयुक्त वैकल्पिक स्थान तत्काल निर्धारित नहीं हो पाना प्रमुख कारण रहे। इसके चलते मुस्लिम समाज के लोगों ने अपने-अपने क्षेत्र की मस्जिदों में जुम्मे की नमाज अदा की। हालांकि मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों ने इस पर आपत्ति जताई है और निर्णय के खिलाफ एकबार फिर सर्वोच्च न्यायालय जाने की बात कही है।

उधर मुस्लिम समाज के प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठक के बाद प्रशासन ने शहर में एक स्थान को हर शुक्रवार जुमे की नमाज के लिए निर्धारित कर दिया। इस दौरान प्रशासन ने मालीवाड़ा स्थित 'चालीसा पीर परिसर' को प्रत्येक शुक्रवार जुमे की नमाज के लिए चिह्नित किए जाने की जानकारी दी।

SC के आदेश के बाद प्रशासन ने की थी अहम बैठक
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद कलेक्टर राजीव रंजन मीणा और पुलिस अधीक्षक सचिन शर्मा की मौजूदगी में पुलिस एवं राजस्व विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की गई, जिसमें शहर काजी वकार सादिक सहित मुस्लिम समाज के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।

'चालीसा पीर दरगाह' के पास की जगह नमाज के लिए दी
प्रशासन ने बैठक में प्रतिनिधियों को बताया कि सुरक्षा, सुगम आवागमन और यातायात व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए ग्राम मालीवाड़ा के सर्वे क्रमांक 664 स्थित 'चालीसा पीर दरगाह' के निकट खाली भूमि को जुमे की नमाज के लिए चिह्नित किया गया है। प्रशासन के अनुसार अब प्रत्येक शुक्रवार दोपहर एक बजे से तीन बजे के बीच इस स्थान पर जुम्मे की नमाज अदा की जा सकेगी।

प्रशासन के फैसले से भड़का मुस्लिम पक्ष
उधर मौलाना कमालुद्दीन वेलफेयर सोसाइटी के प्रतिनिधि अब्दुल समद ने आरोप लगाया है कि भोजशाला परिसर के करीब नमाज की व्यवस्था के संबंध में सुप्रीम कोर्ट के अंतरिम आदेश का स्थानीय प्रशासन ने पालन नहीं किया। उन्होंने कहा कि प्रशासन के निर्णय के खिलाफ वे एकबार फिर सर्वोच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।

'सुप्रीम कोर्ट ने भोजशाला परिसर से सटी जगह कहा था'
अब्दुल समद ने पत्रकारों से चर्चा में कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने अपने अंतरिम आदेश में भोजशाला परिसर से सटी हुई जगह पर नमाज की व्यवस्था करने का उल्लेख किया है। साथ ही यह भी स्पष्ट किया है कि अंतरिम राहत का मुख्य वाद पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। इसी आधार पर मुस्लिम पक्ष प्रशासन की तरफ से आयोजित बैठक में शामिल हुआ था, ताकि नमाज की व्यवस्था पुनः शुरू हो सके।

'नमाज के लिए भोजशाला से 2 किमी दूर जगह दी'
अब्दुल समद का आरोप है कि प्रशासन ने करीब तीन घंटे तक चर्चा के बाद लिखित आदेश सौंपते हुए नमाज के लिए भोजशाला परिसर से लगभग दो किलोमीटर दूर स्थान चिन्हित कर दिया, जो सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुरूप नहीं है। उन्होंने कहा कि मुस्लिम पक्ष ने इस निर्णय पर आपत्ति दर्ज करा दी है और उनका मानना है कि इससे उनकी धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं तथा उनके अधिकारों का हनन हुआ है।

हिंदू पक्ष ने की थी भोजशाला से 300 मीटर बाहर की जगह देने की मांग
इससे पहले भोजशाला परिसर के समीप नमाज की व्यवस्था को लेकर हिंदू पक्ष ने शुक्रवार को कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर मांग की थी कि उच्चतम न्यायालय के अंतरिम आदेश का पालन करते हुए नमाज की व्यवस्था भोजशाला के 300 मीटर के दायरे से बाहर की जाए। हिंदू पक्ष के प्रतिनिधि गोपाल शर्मा ने इस बारे में मीडिया से चर्चा करते हुए बताया था कि 'उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के आदेशों में भोजशाला को मां सरस्वती का मंदिर बताया गया है तथा परिसर में नमाज की अनुमति नहीं है।'

शर्मा का कहना था कि 'सर्वोच्च न्यायालय ने भोजशाला परिसर के निकट खुले स्थान पर नमाज की व्यवस्था करने की बात कही है, लेकिन भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) के नियमों के अनुसार भोजशाला के 100 मीटर क्षेत्र को संरक्षित तथा 200 मीटर अतिरिक्त क्षेत्र को विनियमित माना गया है। ऐसे में नमाज़ की व्यवस्था इस पूरे 300 मीटर के दायरे से बाहर की जानी चाहिए।'

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