स्मॉल-मिड कैप के बाद अब लार्ज कैप का दौर, इन शेयरों पर नजर

नई दिल्ली
स्मॉल-कैप और मिड-कैप शेयरों के मुकाबले लार्ज-कैप शेयरों में फिर से तेजी लौटने का समय आ गया है। ये कहना है जेफरीज के इंडिया रिसर्च हेड महेश नंदुरकर का है। जेफरीज की पिछले हफ्ते आई एक रिपोर्ट के मुताबिक नंदुरकर ने कहा है कि स्मॉल और मिड में वैल्यूएशन का अंतर अपने ऐतिहासिक एवरेज से कहीं अधिक बढ़ गया है, जबकि लार्ज-कैप कंपनियों की कमाई में तेजी आने की उम्मीद है।
कंपनी के ग्लोबल इक्विटी स्ट्रैटेजिस्ट क्रिस्टोफर वुड ने अपने हालिया 'GREED & fear' नोट में भी इस बात का समर्थन किया है।

कैसी रहेगी लार्ज कैप की ग्रोथ?
पिछले दो सालों में Nifty MidCap 150 इंडेक्स ने लगभग 18% की सालाना कंपाउंड अर्निंग्स ग्रोथ रेट दिखाई है, जो Nifty 100 की लार्ज-कैप कंपनियों की 8% ग्रोथ रेट से दोगुनी से भी अधिक है।
हालांकि, आगे देखते हुए Jefferies को उम्मीद है कि यह अंतर तेजी से कम होगा। अगले दो फाइनेंशियल सालों में लार्ज-कैप अर्निंग्स ग्रोथ लगभग दोगुनी होकर सालाना 14 से 15% तक पहुँचने का अनुमान है, जबकि मिड-कैप ग्रोथ में थोड़ी कमी आने और इसके लगभग 20% रहने की उम्मीद है।

लार्ज कैप में किन शेयरों पर रखें नजर
हाल ही में रिलायंस इंडस्ट्रीज, आईसीआईसीआई बैंक और एचडीएफसी बैंक के नतीजे आए हैं। ये तीनों ही शेयर इंडेक्स के हेवीवेट हैं। इनमें रिलायंस इंडस्ट्रीज और आईसीआईसीआई बैंक के नतीज सभी अनुमानों से बेहतर रहे, जबकि एचडीएफसी बैंक के नतीजे उम्मीदों से कमतर रहे।

हालांकि फिर भी एचडीएफसी बैंक ने 5 फीसदी ग्रोथ के साथ 19,059 करोड़ रुपये का प्रॉफिट और 6.7 फीसदी की ग्रोथ के साथ 33,534 करोड़ रुपये की नेट इंटेरेस्ट इनकम दर्ज की। अब जबकि जेफरीज के अनुसार लार्जकैप के अच्छे दिन आ सकते हैं तो इन तीनों हेवीवेट शेयरों पर नजर रखी जा सकती है।

सिर्फ वैल्यूएशन ही तर्क नहीं
जेफरीज के अनुसार लार्ज-कैप शेयरों के पक्ष में तर्क सिर्फ उनके वैल्यूएशन पर आधारित नहीं है। मैक्रो-इकोनॉमिक माहौल भी अभी सकारात्मक बना हुआ है। बैंक क्रेडिट ग्रोथ में तेजी आई है। 30 जून तक यह सालाना आधार पर 18.6% रही, जो मई 2025 में 9.0% के निचले स्तर पर थी।

जेफरीज जिन 201 भारतीय कंपनियों को कवर करती है, उन्होंने 2026 की पहली तिमाही में सालाना आधार पर 15% की अर्निंग्स ग्रोथ दर्ज की। यह पिछली तिमाही में रही 19% की ग्रोथ (जो आठ तिमाहियों में सबसे ज्यादा थी) के मुकाबले थोड़ी कम है, जबकि घरेलू कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ 16% रही, जो 12 तिमाहियों में सबसे अधिक है।

इन सेक्टर्स पर उम्मीद कम
हाल ही में खत्म हुई तिमाही (1QFY27) के लिए, जेफरीज को उम्मीद है कि ऑयल एंड गैस, मेटल्स और फाइनेंशियल्स को छोड़कर बाकी कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ और बढ़कर 16% (13 तिमाहियों में सबसे अधिक) हो जाएगी, जबकि अर्निंग्स ग्रोथ 12% के आसपास स्थिर रहेगी।

विदेशी निवेशकों का किरदार अहम
वुड के अनुसार फरवरी के बाद पहली बार जुलाई में विदेशी निवेशक भारतीय शेयरों के नेट खरीदार बन गए हैं। वे इस बदलाव को AI ट्रेड से हटकर दूसरे सेक्टर में निवेश जाने (रोटेशन) से जोड़कर देखते हैं।
वुड ने चेतावनी दी कि रुपये की कमजोरी को देखते हुए विदेशी बिकवाली में कोई भी कमी भारत के कैपिटल अकाउंट के लिए राहत की बात होगी। लेकिन होर्मुज के आसपास फिर से शुरू हुआ तनाव और ईंधन की कीमतों या सरकार के सब्सिडी और कैपेक्स बजट पर इसका असर पड़ा, तो ये भविष्य के नजरिए के लिए एक जोखिम होगा।

 

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