एनसीएफ, एनसीईआरटी और परख के अनुरूप विकसित होगी दक्षता आधारित शिक्षण व्यवस्था

लखनऊ

 मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश सरकार ने बुनियादी शिक्षा को अधिक गुणवत्तापूर्ण, परिणामोन्मुख और दक्षता आधारित बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया है। निपुण भारत मिशन का विस्तार करते हुए बालवाटिका से कक्षा-5 तक के लिए व्यापक कार्ययोजना लागू की गई है। इसके अन्तर्गत कक्षा-3 से 5 तक के विद्यार्थियों के लिए विषयवार और कक्षावार सीखने के लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। साथ ही बच्चों के सीखने के स्तर का नियमित आकलन, लर्निंग गैप की पहचान, सुधारात्मक शिक्षण तथा शिक्षक क्षमता संवर्धन को मिशन का अभिन्न हिस्सा बनाया गया है। इस संबंध में अपर मुख्य सचिव (बेसिक शिक्षा) पार्थ सारथी सेन शर्मा ने सभी मंडलायुक्तों और जिलाधिकारियों को मिशन के प्रभावी क्रियान्वयन के निर्देश जारी किए हैं। 

नई कार्ययोजना के माध्यम से योगी सरकार ने बुनियादी शिक्षा को केवल पाठ्यक्रम पूरा कराने तक सीमित न रखकर प्रत्येक बच्चे के वास्तविक सीखने के स्तर पर केंद्रित करने की रणनीति अपनाई है। बालवाटिका से कक्षा-5 तक सीखने की सतत श्रृंखला विकसित कर प्रत्येक विद्यार्थी को उसकी आयु और कक्षा के अनुरूप आवश्यक ज्ञान, कौशल और दक्षताओं से सशक्त बनाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इससे राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप आधारभूत शिक्षा की गुणवत्ता मजबूत होगी और आगे की कक्षाओं के लिए विद्यार्थियों की शैक्षणिक नींव और सुदृढ़ बनेगी। 

हर कक्षा के लिए तय हुए सीखने के लक्ष्य

कार्ययोजना के अन्तर्गत कक्षा-3 से 5 तक हिंदी, अंग्रेजी, गणित और पर्यावरण अध्ययन के लिए विषयवार एवं कक्षावार सीखने के लक्ष्य निर्धारित किए गए हैं। इनका निर्धारण राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (एनसीएफ), एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकों तथा परख के मानकों के अनुरूप किया जाएगा। एससीईआरटी, डायट, विशेषज्ञों और शिक्षकों की सहभागिता से इन लक्ष्यों को अंतिम रूप देकर पूरे प्रदेश में समान गुणवत्ता वाली शिक्षण व्यवस्था विकसित की जाएगी। 

अब हर बच्चे की सीखने की प्रगति पर रहेगी नजर

योगी सरकार की नई कार्ययोजना में प्रत्येक विद्यार्थी की सीखने की प्रगति का नियमित आकलन करने पर विशेष जोर दिया गया है। विद्यालयों में फॉर्मेटिव असेसमेंट और अन्य शैक्षणिक मूल्यांकन के माध्यम से बच्चों की प्रगति का निरंतर परीक्षण किया जाएगा। जिन विद्यार्थियों में लर्निंग गैप की पहचान होगी, उनके लिए कैच-अप शिक्षण और अतिरिक्त शैक्षणिक सहयोग की व्यवस्था की गई है, ताकि कोई भी बच्चा सीखने के निर्धारित लक्ष्यों से पीछे न रह जाए। 

शिक्षकों की क्षमता वृद्धि बनेगी बदलाव का आधार

कार्ययोजना में शिक्षकों के क्षमता संवर्धन को विशेष महत्व दिया गया है। गतिविधि आधारित शिक्षण, दक्षता आधारित शिक्षा, शिक्षण-अधिगम सामग्री (टीएलएम), डिजिटल संसाधनों तथा दीक्षा प्लेटफॉर्म के माध्यम से चरणबद्ध प्रशिक्षण दिया जाएगा। निपुण संकल्प कार्यशालाओं के जरिए शिक्षकों को नई व्यवस्था के अनुरूप तैयार किया जाएगा, जिससे कक्षा कक्ष में सीखने की गुणवत्ता और प्रभावशीलता बढ़ सके। 

स्कूल रेडीनेस से मॉनिटरिंग तक समग्र व्यवस्था

कार्ययोजना में बालवाटिका स्तर पर स्कूल रेडीनेस कार्यक्रम को मजबूत बनाने, विद्यालय पुस्तकालयों के प्रभावी उपयोग, पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा देने तथा अभिभावकों की सक्रिय सहभागिता सुनिश्चित करने पर भी बल दिया गया है। इसके साथ ही राज्य, जिला, विकासखंड और विद्यालय स्तर पर नियमित मॉनिटरिंग एवं समीक्षा की व्यवस्था की गई है, ताकि मिशन का प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित हो और प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ पहुंचे।

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