ललिता हत्याकांड बना राजनीतिक मुद्दा, विपक्ष पर आंदोलन भड़काने के आरोप

लखनऊ
यूपी में चुनाव पास हैं और विपक्ष इस कोशिश में जुटा है कि कुछ ऐसा खास कर दिया जाए कि सूबे में बलवा हो जाए और सीएम या तो कानून व्यवस्था संभालने में फेल दिखाई देने लगें, या फिर जाति-धर्म को लेकर कुछ बवाल हो जाए। मेरठ का ताज़ा केस देख कर तो ऐसा ही लगता है। मेरठ की लड़की ललिता की मई के महीने में हत्या हो जाती है, आरोपी पकड़े जाते हैं और पता चलता है कि ललिता और आरोपी दोनों एक दूसरे को जानते थे। लड़की दलित और आरोपी लड़का पिछड़े समाज का था। यानी राजनैतिक समीकरण में इससे फायदा नहीं उठाया जा सकता था।

लड़के को लड़की पर शक था कि वो किसी और के साथ संबंध में है, इसलिए वह उसे बुलाता है और मार डालता है, शव पर तेज़ाब भी डालता है। आरोपी सवर्ण नहीं था तो मामला दलितों के खिलाफ शोषण का बना नहीं। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई कर आरोपियों को पकड़ भी लिया। लेकिन जुलाई के महीने में ललिता की मौत पर बवाल क्यों हुआ, ये एक बड़ा सवाल है।

सूत्रों के मुताबिक, जुलाई के महीने में मेरठ कलेक्ट्रेट के सामने ललिता को न्याय दिलाने के लिए भीड़ जुटी। भीड़ क्यों लगी, जब ललिता के आरोपी पकड़े जा चुके थे, यह बात समझ में नहीं आई। पुलिस को इस बात पर शक हुआ कि इतने दिन बाद इस मसले को किसकी शह पर उठाया जा रहा है। आखिर किस घटना को अंजाम देने की तैयारी हो रही थी। पुलिस सूत्रों के मुताबिक करीब दो हज़ार के आसपास लोग दिल्ली से इस प्रदर्शन में हिस्सा लेने आए थे और इस भीड़ में कुछ चेहरे ऐसे थे जिन्हें शाहीन बाग प्रदर्शन में अक्सर देखा गया था। सूत्र बताते हैं कि लड़की की मौत के बहाने मेरठ कलेक्ट्रेट में दूसरा शाहीन बाग बनाने की पूरी तैयारी थी।
 
लेकिन इस विरोध में बड़ा मोड़ तब आया जब ज़िले के एसएसपी ने रवि गौतम नाम के प्रदर्शनकारी को पुलिस वैन में घुसकर थप्पड़ मार दिए। प्रत्यक्षदर्शियों ने देखा भी कि रवि गौतम पुलिस वालों को बार बार उकसा रहा था कि वो उसे पीटें, जिससे खबर बन जाए। उसकी किस्मत थी कि एसएसपी ने उसकी पिटाई कर दी। अब एसएसपी हैं ब्राह्मण, रवि गौतम हैं दलित, तो विपक्षी राजनीतिक दलों के लिए परफेक्ट कॉम्बिनेशन बन गया। जाहिर है कि जो भीड़ प्रायोजित होकर दिल्ली से आई थी, वह अपने उद्देश्य में सफल हो गई। हंगामा हुआ, दलित उत्पीड़न का मामला बना और पहले चंद्रशेखर और फिर अखिलेश यादव ने इस घटना का इस्तेमाल किया।

इसमें ध्यान देने वाली बात यह है कि जो चंद्रशेखर दलित लड़की की हत्या पर नहीं जागे थे, क्योंकि आरोपी भी पिछड़े समुदाय का निकला था, वो चंद्रशेखर ब्राह्मण एसएसपी के थप्पड़ मारते ही सड़क पर आ गए। मुद्दा बना लिया कि दलितों को अपनी बात नहीं रखने दी जा रही है। जबकि ज़िले के अफसर इस लड़की के माता-पिता से कई बार मिले और पीड़ित परिवार पुलिस की कार्रवाई से आश्वस्त भी था। तो फिर ये मामला सड़क पर दो महीने बाद क्यों आ गया, ये गौर करने वाली बात है।

किसी भी समुदाय की बेटी का बलात्कार हो, वह शर्मनाक है। ऐसी घटनाओं का राजनैतिक इस्तेमाल पार्टियां अपने फायदे के लिए करती हैं। मेरठ में भी राजनीतिक फायदा उठाने में भी ज़बरदस्त होड़ लगी। चंद्रशेखर अपने समर्थकों को लेकर सड़क पर उतर आए। सपा सांसद इकरा हसन ने पीड़ित परिवार को अपनी कार में बिठाया और उसे लेकर सीधे दिल्ली आ गईं, अखिलेश से मुलाकात करवाने। अखिलेश नें पीड़ित परिवार को दो लाख रुपए का लिफाफा पकड़ाया और फोटो खिंचवाई। अब वही फोटो सोशल मीडिया पर वायरल की जा रही है कि पीडीए की असली शुभचिंतक अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी ही है।

मेरठ का ललिता कांड व्यक्तिगत कारणों से उपजे अपराध का था। लड़की दलित और आरोपी लड़का पिछड़े समुदाय का था। शायद इसीलिए दिल्ली से नेता मेरठ की ओर नहीं दौड़े। लेकिन, चुनाव सर पर है इसलिए राजनैतिक स्वार्थ के चलते हड़तालें भी करवाई जा सकती हैं। किसी ऐसे गैरज़रूरी आंदोलन को हवा दी जा सकती है, जिससे माहौल खराब हो, लोगों को परेशानी हो और फिर राजनेता अपनी-अपनी फसल काटने सड़क पर उतर सकें। ज़रूरत है ऐसे आंदोलनजीवियों पर सतर्क नज़र रखने की।

More From Author

30 से ज्यादा ब्रांडों के साथ लखनऊ में बिजनेस एक्सपो, युवाओं को मिलेगा मार्गदर्शन

जम्मू-कश्मीर के पुंछ में तबाही, एक परिवार के 6 सदस्यों समेत 10 की मौत

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 13910/15

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.