अल्पज्ञात जलप्रपातों को संवारने की तैयारी, परना बनेगा नया पर्यटन केंद्र

लखनऊ
प्राकृतिक पर्यटन स्थलों में प्रदेश के जलप्रपातों को भी शामिल करने में जुटा पर्यटन विभाग अब उन प्राकृतिक धरोहरों को भी नई पहचान दिलाने की तैयारी में है, जो अब तक पर्यटन की मुख्यधारा से दूर रहे हैं। प्रदेश भर में ऐसे जलप्रपातों को चिह्नित किया जा रहा है, जो अल्पज्ञात (कम लोकप्रिय) हैं। इन स्थलों पर पर्यटन सुविधाएं विकसित कर नजदीकी स्थलों संग जोड़कर प्रचारित किया जाएगा। पहले चरण में चंदौली के परना जलप्रताप को विकसित करने की योजना तैयार की जा रही है।

प्रदेश के प्राकृतिक पर्यटन में वर्तमान में कई जलप्रपात शामिल हैं। इनमें चित्रकूट का तुलसी जलप्रपात, ललितपुर का चुवन व ककरावल, सोनभद्र का मुक्खा व धंधरौल, मीरजापुर का लखनिया दरी, विंढम, सिद्धनाथ दरी व चूनादरी और चंदौली के राजदरी-देवदरी, औरवाटांड व छानपाथर दरी जलप्रपात शामिल हैं।

उत्तर प्रदेश ईको पर्यटन विकास बोर्ड ने हाल ही में चंदौली के औरवाटांड जलप्रपात पर 1.70 करोड़ रुपये और छानपाथर दरी पर 1.67 करोड़ रुपये की लागत से पार्किंग, पाथवे, प्रशासनिक भवन, कैंटीन, साइनेज, लैंडस्केपिंग और एडवेंचर गतिविधियों जैसी सुविधाएं विकसित की हैं। वहीं ललितपुर के ककरावल जलप्रपात पर 2.87 करोड़ रुपये की लागत से पार्किंग, वाच टावर, सोलर लाइट, कैंटीन, गजेबो और अन्य पर्यटक सुविधाओं का निर्माण कराया जा रहा है।

अब बोर्ड की ओर से परना जलप्रपात को इसी तरह विकसित करने जा रहा है। चंद्रप्रभा वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र में स्थित यह जलप्रपात जलेबिया मोड़ से करीब 800 मीटर और राजदारी जलप्रपात से लगभग 10 किलोमीटर दूर है। घने जंगलों और चट्टानों के बीच स्थित यह स्थल अब तक सीमित पर्यटकों की जानकारी में रहा है।

विभागीय प्रस्ताव के अनुसार यहां प्रवेश द्वार, सुरक्षा रेलिंग, पाथवे, साइकिल ट्रैक, कैंटीन, चिल्ड्रेन प्ले एरिया, बेंच और साइन बोर्ड जैसी पर्यटन सुविधाएं विकसित की जाएंगी। बाद में विभागीय वेबसाइट, इंटरनेट मीडिया इन्फ्लुएंसर्स, ट्रैवल ब्लागर और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से ब्रांडिंग की भी योजना है। इससे राजदारी-देवदारी आने वाले पर्यटक एक ही यात्रा में परना जलप्रपात भी देख सकेंगे।

पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा कि परना जलप्रपात की तरह प्रदेश में कई ऐसे प्राकृतिक स्थल हैं, जिनमें अपार पर्यटन संभावनाएं हैं, लेकिन उन्हें अभी तक अपेक्षित पहचान नहीं मिल सकी है।

सरकार का प्रयास इन स्थलों को विकसित कर प्राकृतिक पर्यटन के नए केंद्र के रूप में स्थापित करना है, जिससे स्थानीय लोगों को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर मिलेंगे तथा क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

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