Sonam Surrender Case: सुप्रीम कोर्ट के आदेश से शुरू होगी समय-सीमा, राजा मर्डर केस में जनवरी तक आ सकता है फैसला

इंदौर 

इंदौर के ट्रांसपोर्ट कारोबारी राजा रघुवंशी हत्याकांड में मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी को फिर जेल भेज दिया गया है। उसने सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर 29 जुलाई, बुधवार को मेघालय के शिलॉन्ग ट्रायल कोर्ट में सरेंडर कर दिया।

सोनम के सरेंडर के बाद अब दो बड़े कानूनी सवाल सामने हैं। पहला- सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल छह माह में पूरा करने का जो निर्देश दिया है, उसकी समय-सीमा सरेंडर की तारीख से मानी जाएगी या 23 जुलाई को पारित आदेश की तारीख से। दूसरा- क्या ट्रायल के दौरान सोनम दोबारा जमानत याचिका दाखिल कर सकती है? यदि हां, तो किन हालात और किस कानूनी आधार पर?

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ट्रायल तय समय-सीमा में पूरा होता है तो मामले में अगले साल जनवरी तक फैसला आ सकता है। 

23 जुलाई के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने रखी थीं दो शर्तें
आशीष शर्मा के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने 23 जुलाई को पारित आदेश में सोनम को अंतरिम राहत देते हुए दो प्रमुख शर्तें तय की थीं।

    पहली शर्त: आदेश की तारीख से तीन सप्ताह के भीतर सोनम को ट्रायल कोर्ट में सरेंडर करना होगा।

    दूसरी शर्त: यदि छह माह के भीतर ट्रायल अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ता, गवाहों की नियमित सुनवाई नहीं होती या ट्रायल पूरा नहीं हो पाता तो सोनम को दोबारा जमानत याचिका दाखिल करने की स्वतंत्रता होगी।

छह माह की अवधि सरेंडर नहीं, आदेश की तारीख से जुड़ेगी
आशीष शर्मा का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहीं भी यह नहीं लिखा कि छह माह की अवधि सरेंडर की तारीख से गिनी जाएगी। आदेश के कानूनी विश्लेषण से स्पष्ट है कि यह अवधि 23 जुलाई को पारित आदेश से प्रभावी मानी जाएगी।

क्या छह माह से पहले भी जमानत मिल सकती है?
विशेषज्ञों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट की छह माह वाली शर्त केवल ट्रायल में देरी के आधार पर दोबारा जमानत मांगने की छूट से जुड़ी है। यदि इस बीच कोई नया कानूनी आधार सामने आता है तो छह माह पूरे होने का इंतजार किए बिना भी नई जमानत याचिका दायर की जा सकती है।

इन परिस्थितियों में पहले भी दायर हो सकती है जमानत याचिका
एडवोकेट शर्मा के मुताबिक, यदि ट्रायल के दौरान आरोपी की गंभीर बीमारी या स्वास्थ्य से जुड़ी नई परिस्थितियां सामने आती हैं। गवाहों की जिरह के दौरान ऐसा नया तथ्य सामने आता है, जिससे मामले की कानूनी स्थिति प्रभावित होती हो। कोई अन्य नया और वैध कानूनी आधार बनता है तो ऐसी स्थिति में छह माह पूरे होने से पहले भी जमानत याचिका दाखिल की जा सकती है।

CCTV से फॉरेंसिक तक, साक्ष्यों की मजबूत कड़ी तय करेगी मुकदमे की दिशा
अभियोजन से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जांच में जुटाए गए साक्ष्य अदालत में विधिवत साबित हो जाते हैं तो मुख्य आरोपी सोनम रघुवंशी समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ दोष सिद्ध करने में परिस्थितिजन्य और वैज्ञानिक साक्ष्य सबसे अहम भूमिका निभाएंगे।

कोर्ट में अभियोजन को सबूतों की पूरी चेन साबित करनी होगी
एक्सपर्ट्स का कहना है कि अभियोजन को अदालत में यह साबित करना होगा कि सभी परिस्थितियां एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं। उनकी पूरी शृंखला केवल आरोपियों की ओर ही इशारा करती है। यदि परिस्थितिजन्य, इलेक्ट्रॉनिक और वैज्ञानिक साक्ष्यों की यह चेन संदेह से परे सिद्ध हो जाती है तो यही साक्ष्य सोनम रघुवंशी और अन्य आरोपियों के खिलाफ दोष सिद्ध कर कठोर सजा का आधार बन सकते हैं।

सोनम के सरेंडर करने के संभावित कारण

    कानूनविदों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट ने सोनम को 23 जुलाई को तीन सप्ताह में सरेंडर करने का निर्देश दिया था। सोनम को 29 जुलाई को ही सरेंडर कर देने से यह संदेश जाता है कि वह कोर्ट के आदेश का सम्मान कर रही है। इससे भविष्य में कोर्ट के समक्ष यह तर्क मजबूत हो सकता है कि उसने न्यायिक प्रक्रिया में पूरा सहयोग किया।

    सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा है कि यदि छह माह में ट्रायल अपेक्षित गति से आगे नहीं बढ़ता या पूरा नहीं होता तो सोनम दोबारा जमानत का आवेदन कर सकती है।

    जल्दी सरेंडर करने से ट्रायल कोर्ट की प्रक्रिया भी जल्दी शुरू हो जाती है, जैसे पेशी, दस्तावेजों की आपूर्ति, आरोप तय होना और गवाहों की सुनवाई।

    किसी भी आपराधिक केस में आरोपी का आचरण भी कोर्ट के समक्ष अहम माना जाता है। समय से पहले सरेंडर करना यह दर्शा सकता है कि आरोपी फरार रहने या आदेश टालने की मंशा नहीं रखती।

    यदि भविष्य में सोनम दोबारा जमानत मांगती है तो उसका पक्ष यह कह सकता है कि उसने सुप्रीम कोर्ट के हर निर्देश का समय पर पालन किया। ट्रायल में सहयोग किया। हालांकि, सिर्फ जल्दी सरेंडर करना जमानत का स्वतः आधार नहीं बनता।

    यह भी एक संभावित कारण हो सकता है कि जल्दी सरेंडर कर कोर्ट और समाज के सामने यह संदेश दिया जाए कि वह न्यायिक प्रक्रिया से भाग नहीं रही।

More From Author

Shivpuri Ring Road: शहर की बदलेगी तस्वीर, ट्रैफिक प्रेशर होगा कम; सफर होगा तेज और सुगम

MPPSC Assistant Professor Result: इंटरव्यू खत्म होते ही 24 घंटे में परिणाम घोषित, चयनित अभ्यर्थियों को बड़ी राहत

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 13910/15

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.