भोपाल
देश का पहला पायलट प्रोजेक्ट
आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास संकेत भोंडवे ने कहा है कि “मध्यप्रदेश सदैव नवाचार आधारित जनहितकारी पहलों में अग्रणी रहा है। अमृत मित्र परियोजना से स्व-सहायता समूहों की महिलाएं अब गैर-तकनीकी कार्यों से आगे बढ़कर तकनीकी कौशल अर्जित कर रही हैं, जो शहरी जल प्रबंधन को सक्षम, आधुनिक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में देश का पहला पायलट प्रोजेक्ट है,"। उन्होंने बताया कि इस पहल से महिलाओं को तकनीकी कौशल के साथ-साथ रोजगार एवं आर्थिक सशक्तिकरण का नया अवसर प्राप्त होगा, जिससे उनकी आय में वृद्धि होगी और वे आत्मनिर्भर बनेंगी। इस अभिनव प्रशिक्षण कार्यक्रम की व्यवस्थाओं का अवलोकन करने भारत सरकार के आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (अमृत 2.0 मिशन) से संबद्ध सलाहकार सु उषा गर्ग एवं सलाहकार अरुण शर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे। केंद्रीय सलाहकारों ने प्रशिक्षण स्थल का निरीक्षण कर प्रतिभागियों से संवाद किया तथा इस पहल को शहरी जल प्रबंधन, जल संरक्षण एवं महिला कौशल विकास के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण कदम बताया।
केन्द्र सरकार के आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय द्वारा संचालित अमृत 2.0 मिशन के अंतर्गत प्रदेश में संचालित अमृत मित्र परियोजना महिलाओं के कौशल विकास का नया आयाम स्थापित कर रही है। प्रदेश में संचालित 482 परियोजनाओं में स्व-सहायता समूह की महिलाएं अब तक जल गुणवत्ता परीक्षण (वॉटर क्वालिटी टेस्टिंग), पार्क मेंटेनेंस एवं पौध-रोपण जैसे कार्यों में उत्कृष्ट योगदान दे रही थीं। इस परियोजना को विस्तार देते हुए महिलाओं को जल वितरण प्रणाली में लीकेज डिटेक्शन एवं पाइपलाइन मरम्मत जैसे तकनीकी कार्यों से जोड़ा जा रहा है। इस देशव्यापी पायलट प्रोजेक्ट की शुरुआत इंदौर में 29 जुलाई, 2026 से तथा भोपाल में 6 अगस्त, 2026 से प्रारंभ की गई है।
प्रशिक्षण के प्रथम चरण में इंदौर से 30 तथा भोपाल से 36 स्व-सहायता समूह की महिलाओं का चयन किया गया है। यह व्यावहारिक प्रशिक्षण शासकीय संभागीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान भोपाल एवं इंदौर में प्लंबर ट्रेड अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है। प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को जल वितरण प्रणाली की संरचना, विभिन्न प्रकार के लीकेज की पहचान, आधुनिक लीकेज डिटेक्शन तकनीकों, आवश्यक उपकरणों के संचालन, पाइपलाइन रिपेयरिंग, सुरक्षा मानकों, गुणवत्ता नियंत्रण एवं फील्ड डॉक्यूमेंटेशन की बारीकियां सिखाई जा रही हैं। इस तकनीकी दक्षता से महिलाएं भविष्य में नगरीय जलापूर्ति व्यवस्था को अधिक दुरुस्त करने और जल हानि को न्यूनतम करने में निर्णायक भूमिका निभाएंगी।
