परिसीमन पर बुलाई बैठक में नहीं पहुंचे 37 सांसद, विजय थलपति की पार्टी को लगा बड़ा झटका

चेन्नई

तमिलनाडु की राजनीति में शनिवार को एक अहम घटनाक्रम देखने को मिला। राज्य के मुख्यमंत्री विजय थलपति द्वारा परिसीमन के मुद्दे पर बुलाई गई सर्वदलीय सांसदों की बैठक से विपक्षी दल DMK और AIADMK समेत कई पार्टियों ने दूरी बना ली है। राज्य के कुल 57 सांसदों में से 37 ने इस बैठक का बहिष्कार करने का फैसला किया है, जिसे सीएम विजय की इस पहल के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है। यह बैठक आज दिन में 3 बजे बुलाई गई है।

सिर्फ 20 सांसद ही बैठक में शामिल होंगे?
बैठक में सांसदों की संभावित उपस्थिति के आंकड़े बताते हैं कि सीएम विजय की इस मुहिम को सभी दलों का साथ नहीं मिल सका है:

    कुल सांसद: 57
    बैठक का बायकॉट करने वाले: 37 सांसद
    बैठक में शामिल होने वाले: मात्र 20 सांसद (मुख्य रूप से कांग्रेस और उसके छोटे सहयोगी दल)

बैठक में शामिल होने वाले इन 20 सांसदों में कांग्रेस के 12, VCK के 2, CPI के 2, CPI(M) के 2, MDMK का 1 और IUML का 1 सांसद शामिल है।

दूसरी तरफ, बायकॉट करने वालों की कमान DMK के पास है, जिसके सभी 30 सांसदों ने बैठक से किनारा कर लिया है। इसके अलावा विपक्षी पार्टी AIADMK के 4 और PMK, MNM और DMDK के 1-1 सांसद ने भी इसमें हिस्सा नहीं लेने का फैसला किया है।

DMK ने बताया 'अनावश्यक', लगाया ध्यान भटकाने का आरोप
बैठक के बहिष्कार को लेकर DMK सांसद कनिमोझी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सीएम विजय द्वारा बुलाई गई इस बैठक को पूरी तरह 'अनावश्यक' करार दिया। कनिमोझी ने आरोप लगाया कि इसका मुख्य मकसद कावेरी नदी के अहम मुद्दे से लोगों का ध्यान भटकाना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब केंद्र सरकार की तरफ से संसद के मौजूदा सत्र में परिसीमन बिल पेश करने की कोई आधिकारिक घोषणा ही नहीं हुई है और संशोधित ड्राफ्ट बिल भी उपलब्ध नहीं है, तो ऐसे में चर्चा करने के लिए कुछ नया है ही नहीं।

सरकारी सूत्रों ने बताया कि तमिलनाडु के मुख्य सचिव एम. साई कुमार ने छह और सात अगस्त को सांसदों को अलग से आमंत्रण भेजे थे। DMK सूत्रों ने कहा कि उनकी पार्टी के सांसद मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली इस बैठक में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी अपने इस रुख पर कायम है कि जब सरकार मेकेदातू मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाएगी तभी वह चर्चा में शामिल होगी।

कांग्रेस ने साधा निशाना
इस बीच कांग्रेस सांसद मणिकम टैगोर ने एक बयान में कहा, ''जो लोग अपनी राजनीति को तमिलनाडु के हितों से ऊपर रखते हैं, वे बैठक में शामिल नहीं होने का फैसला कर सकते हैं। लेकिन जो लोग तमिलनाडु को पहले और राजनीति को बाद में रखते हैं, वे मुख्यमंत्री द्वारा बुलाई गई सर्वदलीय बैठक में शामिल होंगे।''

टैगोर ने कहा, ''यह पार्टी की राजनीति का मुद्दा नहीं है। यह तमिलनाडु के अधिकारों, हितों और भविष्य का सवाल है। तमिलनाडु की जनता देख रही है और वह याद रखेगी कि जरूरत के समय राज्य के साथ कौन खड़ा था।'' कांग्रेस तमिलनाडु में सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) की सहयोगी है।

आखिर क्यों बुलाई गई यह बैठक?
सीएम विजय ने यह बैठक परिसीमन की प्रक्रिया को लेकर राज्य का एक साझा और एकजुट रुख तय करने के लिए बुलाई। दरअसल, इस बात को लेकर चिंताएं जताई जा रही हैं कि नए परिसीमन से दक्षिण भारतीय राज्यों के संसदीय सीटों की संख्या कम हो सकती है। लोकसभा और राज्यसभा सांसदों की यह अहम बैठक शनिवार दोपहर 3 बजे चेन्नई के कलैवानर अरंगम में निर्धारित की गई है।

क्या है परिसीमन बिल 2026?
परिसीमन बिल 2026 को 16 अप्रैल 2026 को लोकसभा में पेश किया गया था। इस बिल का मुख्य मकसद संसदीय और विधानसभा क्षेत्रों का दोबारा सीमांकन करना, लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाकर 850 करना और महिला आरक्षण लागू करना था। हालांकि, यह बिल संसद में पास नहीं हो सका था क्योंकि इसे पास कराने के लिए उपस्थित और वोट करने वाले सदस्यों का जरूरी दो-तिहाई विशेष बहुमत नहीं मिल पाया था।

More From Author

सोना हुआ महंगा, 7 हफ्ते के उच्चतम स्तर पर पहुंचा भाव; चांदी भी चमकी

छत्तीसगढ़ में DFO ट्रांसफर की बड़ी सूची जारी, वन विभाग में व्यापक फेरबदल

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 13944/210

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.