सावन का पवित्र महीना चल रहा है और ऐसे में सावन के आखिरी सोमवार का व्रत धार्मिक दृष्टि से बेहद खास माना जाता है. व्रत के दौरान दिनभर फलाहार करने के बाद शाम को या पारण के वक्त कुछ तीखा, चटपटा और झटपट बनने वाला खाने का मन करता है. अगर आप भी उपवास में कुट्टू की पूरी, पराठे या रोटी बना रहे हैं, तो उसके साथ हरी मिर्च के तड़के वाले चटपटे रसेदार आलू सबसे बेहतरीन कॉम्बिनेशन हैं.
बिना लहसुन और प्याज के देसी घी में बने ये रसेदार आलू स्वाद में इतने लाजवाब होते हैं कि व्रत न रखने वाले भी इसे मांगकर खाएंगे. आइए जानते हैं सावन के आखिरी सोमवार पर फलाहारी रसेदार आलू बनाने की सबसे आसान और अचूक विधि.
व्रत वाले रसेदार आलू की सामग्री
उबले आलू: 4 मध्यम आकार के (हल्के हाथों से फोड़े हुए)
टमाटर: 2 बड़े (बारीक कटे हुए या प्यूरी) (अगर आप व्रत में टमाटर नहीं खाते हैं तो इसे स्किप कर दें)
साबुत ताजी हरी मिर्च या लाल मिर्च: 3-4 (बारीक कटी या बीच से चीरा लगी)
हरी या लाल मिर्च को ग्राइंड करते अलग से पेस्ट भी तैयार कर लें
अदरक: 1 इंच (कद्दूकस किया हुआ)
देसी घी: 2 बड़े चम्मच
जीरा: 1 छोटा चम्मच
सेंधा नमक: स्वादानुसार
काली मिर्च पाउडर: 1/2 छोटा चम्मच
हरा धनिया: 2 बड़े चम्मच (बारीक कटा हुआ)
पानी: 2 कप (तरी के हिसाब से)
बनाने की विधि
उबले हुए आलू का छिलका उतार लें. इन्हें चाकू से काटने के बजाय हाथों से थोड़ा मोटा-मोटा फोड़ लें. ऐसा करने से सब्जी की तरी गाढ़ी और टेस्टी बनती है.
कड़ाही में 2 बड़े चम्मच देसी घी गरम करें. घी गरम होने पर जीरा डालें और चटकने दें. अब इसमें कटी हरी मिर्च और कद्दूकस किया अदरक डालकर 30 सेकंड भूनें.
अब कड़ाही में कटे हुए टमाटर और स्वादानुसार सेंधा नमक डालें. ढककर 2-3 मिनट तक पकाएं जब तक कि टमाटर पूरी तरह से गल न जाएं और घी न छोड़ दें.
टमाटर पकने के बाद इसमें काली मिर्च पाउडर डालें. फिर इसमें फोड़े हुए आलू डालकर अच्छे से मिलाएं और 2 मिनट तक भूनें ताकि मसालों का स्वाद आलू में आ जाए.
अब कड़ाही में लगभग 2 कप पानी मिलाएं. तेज आंच पर उबाल आने दें, फिर आंच मध्यम करके 5-7 मिनट तक पकने दें ताकि आलू और रसा एकसार हो जाएं.
जब रसा हल्का गाढ़ा हो जाए तो गैस बंद कर दें और ऊपर से ताजा बारीक कटा हरा धनिया डालें. आपके गरमा-गरम व्रत वाले रसेदार आलू तैयार हैं. इसे कुट्टू की पूरी, पराठे या सिंघाड़े की रोटी के साथ परोसें.

