सर्वाइवर सेन्ट्रिक स्ट्रेटजी पर राज्य स्तरीय मंथन

भोपाल 

महिला सुरक्षा और न्याय की व्यवस्था को अधिक संवेदनशील, प्रभावी और पीड़ित-केंद्रित बनाने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश राज्य महिला आयोग एवं जनसाहस फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में मंगलवार को "सर्वाइवर सेन्ट्रिक स्ट्रेटजी एवं जस्टिस" विषय पर राज्य स्तरीय एक दिवसीय रणनीतिक संवाद कार्यशाला हुई। कार्यशाला में पुलिस, विधिक सेवा, चिकित्सा, बाल संरक्षण एवं महिला सुरक्षा से जुड़े विभागों के अधिकारियों और विशेषज्ञों ने पीड़ित महिला को शिकायत से लेकर न्याय, उपचार, कानूनी सहायता, मनोसामाजिक सहयोग और सम्मानजनक पुनर्वास तक समग्र सहायता उपलब्ध कराने की रणनीति पर विचार-विमर्श किया।

पीड़िता की गरिमा और संवेदनशीलता को प्राथमिकता

कार्यशाला में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि महिला हिंसा से जुड़े किसी भी प्रकरण में पीड़िता को केवल एक ‘केस’ या प्रकरण के रूप में नहीं, बल्कि एक व्यक्ति के रूप में देखा जाए। उसकी सुरक्षा, गरिमा, गोपनीयता, मानसिक स्वास्थ्य, न्याय और आर्थिक आत्मनिर्भरता को समान प्राथमिकता देते हुए ऐसी व्यवस्था विकसित की जाए, जिसमें विभिन्न विभागों और संस्थाओं के बीच बेहतर समन्वय हो और पीड़िता को सहायता प्राप्त करने के लिए बार-बार अपनी पीड़ा दोहराने के लिए मजबूर न होना पड़े।

स्वावलंबन और साइबर सुरक्षा पर बल

आयोग की सदस्य मती साधना स्थापक ने कहा कि हिंसा के अनेक रूप हैं और समाज को हर प्रकार की हिंसा के विरुद्ध मजबूती से खड़ा होना होगा। महिलाओं का स्वावलंबी और सशक्त होना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि महिला आयोग महिलाओं को त्वरित न्याय दिलाने के लिए निरंतर प्रयास कर रहा है। तकनीक के बढ़ते उपयोग के साथ साइबर अपराधों की चुनौती भी बढ़ रही है, इसलिए महिलाओं को साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूक करने के साथ प्रभावी कार्रवाई की आवश्यकता है। उन्होंने पाठ्यक्रम में महिला क्रांतिकारियों और उनके संघर्षों को शामिल करने का सुझाव देते हुए कहा कि इससे नई पीढ़ी महिलाओं के योगदान और संघर्ष से प्रेरणा ले सकेगी।

संवेदनशील सुनवाई और पुनर्वास की आवश्यकता

मध्यप्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष मती निवेदिता शर्मा ने कहा कि महिलाओं और बच्चों से जुड़े किसी भी प्रकरण में सबसे पहले संवेदनशीलता के साथ पीड़ित की बात सुनी जानी चाहिए। प्रकरण की वास्तविक परिस्थितियों को समझने के लिए उसके सामाजिक और पारिवारिक परिवेश को जानना भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि कानूनी प्रक्रिया का पालन करने के साथ पीड़ित के पुनर्वास को भी समान प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उन्होंने मामलों में आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया की कमियों को दूर करने तथा महिला एवं बाल सुरक्षा से जुड़े विभागों के संयुक्त प्रशिक्षण और बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने काउंसलिंग को भी पीड़ित सहायता व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया।

जरूरतों के अनुरूप सहायता और संवेदनशील काउंसलिंग

मध्यप्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण की सदस्य सचिव सु सुमन वास्तव ने कहा कि पीड़ित की वास्तविक जरूरतों को समझकर उसी के अनुरूप सहायता उपलब्ध कराई जानी चाहिए। अनावश्यक हस्तक्षेप या ओवरस्टेपिंग से बचना जरूरी है। विशेष रूप से दिव्यांग पीड़ितों के मामलों में उनकी परिस्थितियों को समझते हुए संवेदनशील काउंसलिंग और सहायता व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।

संयुक्त प्रशिक्षण और ई-फाइलिंग पर जोर

डीआईजी कम्युनिटी पुलिसिंग  विनीत कपूर ने महिला और बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों में पुलिस व्यवस्था के स्तर पर आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों और अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने पुलिस, महिला एवं बाल सुरक्षा से जुड़े विभागों तथा विभिन्न पुलिस विंग के अधिकारियों-कर्मचारियों के लिए संयुक्त प्रशिक्षण की आवश्यकता बताई। उन्होंने मेडिकल रिपोर्ट एवं अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों की प्रभावी ई-फाइलिंग तथा पुलिस, चिकित्सा, विधिक सहायता और समुदाय के साथ काम करने वाली संस्थाओं के बीच निरंतर संवाद की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि पीड़ित को मुख्यधारा में लौटने तक सहायता मिलती रहे।

अस्पताल स्तर से ही सम्मानजनक व्यवहार की शुरुआत

डीसीपी, पुलिस कमिश्नरेट भोपाल मती मंजू लता खत्री ने महिला हिंसा के मामलों में संवेदनशील पुलिस रिस्पोंस को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि जब कोई पीड़ित महिला अस्पताल पहुंचती है, तब उसके सम्मान और गरिमा की रक्षा की प्रक्रिया अस्पताल के गेट पर मौजूद सुरक्षा गार्ड से ही शुरू हो जानी चाहिए। पीड़िता के साथ व्यवहार के प्रत्येक स्तर पर संवेदनशीलता और सम्मान सुनिश्चित किया जाना आवश्यक है।

समयबद्ध न्याय और विभागों के बीच समन्वय

कार्यशाला के प्रथम सत्र में मध्यप्रदेश राज्य महिला आयोग के सदस्य सचिव  सुरेश तोमर ने स्वागत उद्बोधन दिया। उन्होंने कहा कि महिलाओं और बच्चों के साथ होने वाले अन्याय एवं विभिन्न प्रकार की समस्याओं के समाधान के लिए समय पर सहायता और न्याय उपलब्ध कराना आवश्यक है। इसके लिए सभी संबंधित विभागों और संस्थाओं के बीच प्रभावी समन्वय महत्वपूर्ण है।

आर्थिक आत्मनिर्भरता से ही संभव है सम्मानजनक पुनर्वास

कार्यशाला में महिला-केंद्रित मेडिको-लीगल सहायता, पुलिस रिस्पांस, कानूनी सहायता, मनोसामाजिक परामर्श और आर्थिक पुनर्वास जैसे विषयों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने कहा कि चिकित्सा परीक्षण, पुलिस कार्रवाई और न्यायिक प्रक्रिया के दौरान महिला की गरिमा, गोपनीयता और मानसिक स्थिति का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। साथ ही विभिन्न एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर सहायता की प्रक्रिया को सहज और निरंतर बनाया जाना चाहिए।

 

More From Author

प्रोजेक्ट अलंकार के तहत 23 जिलों के 51 विद्यालयों को 6.71 करोड़, पुराने भवनों का होगा कायाकल्प

रक्षाबंधन से पहले महतारी वंदन की राशि बनी बहनों के लिए शगुन, बलरामपुर की रानी, प्रमिला और करिश्मा के चेहरे पर आई मुस्कान

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 13967/1

RO No. 13944/210

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.