कैलाश मानसरोवर रूट तबाह, 105 भारतीयों सहित 400 विदेशी पर्यटकों का सुराग नहीं; बढ़ रहा मौत का आंकड़ा

काठमांडू 

नेपाल-चीन सीमा पर रसुवा जिले में बुधवार को आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने भारी तबाही मचाई है। इस आपदा के कारण सड़कों को गंभीर नुकसान पहुंचा है, जिससे कैलाश मानसरोवर यात्रा पर निकले करीब 400 तीर्थयात्री रसुवागढ़ी इलाके में फंस गए हैं और उनका संपर्क पूरी तरह टूट गया है। काठमांडू स्थित टच कैलाश ट्रेवल्स एंड टूर्स के एमडी बासु कुमार अधिकारी ने बताया कि बुधवार को 93 नेपाली नागरिकों सहित कुल 390 श्रद्धालुओं को चीन की सीमा पार करनी थी। हालांकि दोपहर 3 बजे तक इनमें से कुछ ही लोगों से संपर्क हो पाया है, जबकि अधिकांश यात्रियों के बारे में कोई सटीक जानकारी नहीं मिल सकी है।

ये तीर्थयात्री विभिन्न ट्रेवल एजेंसियों के माध्यम से यात्रा पर निकले थे, जिनमें सम्राट टूर्स एंड ट्रेवल्स के 71 यात्री, ट्रेकर्स सोसाइटी के 92, हिमालयन ग्लेशियर के 62, लीफ हॉलीडेज के 55, कैलाश जर्नी के 31, फिशटेल टूर एंड ट्रेवल्स के 27, काठमांडू हॉलीडेज के 17, अल्पाइन इको ट्रेक के 16, रिचा टूर्स के 12 और एक्सप्लोर वेकेशन के सात यात्री शामिल हैं।

ट्रेकिंग एजेंसीज एसोसिएशन ऑफ नेपाल के अध्यक्ष सागर पांडे ने बताया कि प्रभावित क्षेत्र में फंसे तीर्थयात्रियों से संपर्क स्थापित करने और उनकी स्थिति का सही आकलन करने के लिए युद्ध स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।

तिब्बत सीमा से करीब 125 किलोमीटर दूर आई बाढ़
नेपाल की सेना ने एक बयान में बताया कि पानी के अचानक बढ़ने से रसुवा जिले के तिमुरे और समीपवर्ती स्याफ्रुबेसी इलाके में भारी नुकसान हुआ तथा वाहन, सामान और अन्य संपत्ति बह गई। रसुवा जिला काठमांडू के उत्तर-पूर्व में स्थित है और तिब्बत सीमा से करीब 125 किलोमीटर दूर है। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीआरआरएमए) ने रसुवा, नुवाकोट, धादिंग, चितवन और गोरखा के नदी किनारे रहने वाले लोगों से अगले आदेश तक अत्यधिक सर्तक रहने और सुरक्षा उपाय करने की अपील की है।

कितने तीर्थयात्री संपर्क से बाहर हैं?
काठमांडो पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक वहां स्थित टच कैलाश ट्रैवल्स एंड टूर्स के प्रबंध निदेशक बाशु कुमार अधिकारी के अनुसार, 390 तीर्थयात्रियों को बुधवार को सीमा पार करनी थी। दोपहर तीन बजे तक कुछ यात्रियों को छोड़कर बाकी से संपर्क स्थापित नहीं हो सका था। अलग-अलग यात्रा एजेंसियों के ये यात्री रसुवागढ़ी इलाके में मौजूद थे। ट्रेकिंग एजेंसियों एसोसिएशन ऑफ नेपाल के अध्यक्ष सागर पांडे ने कहा कि यात्रियों से संपर्क करने और उनकी स्थिति का पता लगाने के प्रयास किए जा रहे हैं।

देश/राष्ट्रीयता लापता यात्रियों की संख्या
भारत 105
नेपाल 93
मलेशिया 17
ब्रिटेन 12
दक्षिण अफ्रीका 4
अमेरिका 3
ऑस्ट्रेलिया 1
नीदरलैंड 1
एनआरआई 37
राष्ट्रीयता की पुष्टि बाकी 111
कुल 384

कौन-कौन सी एजेंसियों के यात्री शामिल हैं?
इन तीर्थयात्रियों में अलग-अलग ट्रैवल एजेंसियों के ग्राहक शामिल हैं। इनमें सम्राट टूर्स एंड ट्रैवल्स के 71, लीफ हॉलीडेज के 55, काठमांडू हॉलीडेज के 17, कैलाश जर्नी के 31, एक्सप्लोर वेकेशन के सात, ट्रेकर्स सोसाइटी के 92, रिचा टूर्स के 12, फिशटेल टूर्स एंड ट्रैवल्स के 27, हिमालयन ग्लेशियर के 62 और एल्पाइन इको ट्रेक के 16 यात्री शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इन सभी यात्रियों की स्थिति जानने के लिए संपर्क की कोशिश जारी है।

लापता लोगों पर नेपाल पर्यटन ने क्या बताया?
नेपाल पर्यटन बोर्ड की 26 अगस्त 2026 की प्रारंभिक सूची के अनुसार, भोटे कोशी नदी में अचानक आई बाढ़ के बाद कुल 384 पर्यटकों और यात्रियों के लापता होने की सूचना है। इनमें 291 विदेशी नागरिक और 93 नेपाली नागरिक शामिल हैं। जानकारी के आधार पर 59 और 46 भारतीय नागरिकों के साथ 37 एनआरआई भी सूची में हैं। इसके अलावा कुछ यात्रियों की राष्ट्रीयता अभी स्पष्ट नहीं हुई है। इन आंकड़ों में कैलाश मानसरोवर वाले तीर्थ यात्रियों का आंकड़ा नहीं शामिल है। 

असमान्य रूप से अधिक था बाढ़ का स्तर
रसुवा के सहायक मुख्य जिला अधिकारी ध्रुव प्रसाद अधिकारी ने कहा कि बाढ़ का स्तर असामान्य रूप से अधिक था और दोनों बस्तियों को काफी नुकसान हुआ है। रसुवा के मुख्य सीमा शुल्क अधिकारी राजेंद्र ढुंगाना ने बताया कि सीमा शुल्क परिसर में रखे कई वाहन और सामान पानी में बह गए। हाल में बनाया गया एक पुल भी बह गया।

प्रधानमंत्री कार्यालय ने बताया कि भीषण बाढ़ को देखते हुए बचाव और राहत अभियान तेज करने के लिए रसुवा और आसपास के इलाकों में नेपाल सेना, सशस्त्र पुलिस बल और नेपाल पुलिस के जवानों को तैनात किया गया है। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, बाढ़ के बाद की स्थिति पर चर्चा करने और उससे निपटने के लिए जरूरी कदम उठाने को लेकर एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई जा रही है।

नेपाल सेना ने त्रिशूली नदी के आसपास के इलाकों में खोज एवं बचाव अभियान चलाने के लिए दो हेलीकॉप्टर भेजे हैं। सेना ने एक बयान में बताया कि आपातकालीन चिकित्सा बचाव दल से लैस एक एमआई-17 हेलीकॉप्टर को त्रिशूली स्थित जिला अस्पताल की ओर रवाना किया गया है। हालांकि, नेपाल सेना ने कहा कि भीषण बाढ़ से हुए नुकसान का पूरा ब्योरा अभी उपलब्ध नहीं हुआ है और नुकसान से संबंधित आंकड़े जुटाने का काम जारी है।

सबसे ज्यादा कौन सा क्षेत्र प्रभावित हुआ? 
अधिकारियों का कहना है कि बाढ़ का पानी तिब्बत की ओर से आया प्रतीत होता है। सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में तिमुरे और स्याब्रुबेसी की सीमावर्ती बस्तियां शामिल हैं। अधिकारियों ने अभी तक विनाश की पूरी सीमा का पता नहीं लगाया है और न ही हताहतों की पुष्टि की है।  क्योंकि आकलन दल अभी भी प्रभावित क्षेत्रों से जानकारी एकत्र कर रहे हैं। रसुवा जिले के प्रशासन नरेंद्र परियार ने रॉयटर्स को बताया कि हमें गांवों और बुनियादी ढांचा परियोजना स्थलों के बह जाने की खबरें मिली हैं। उन्होंने आगे कहा कि भारी जानमाल का नुकसान हो सकता है। लेकिन मैं अभी निश्चित रूप से कुछ नहीं कह सकता। हालांकि नेपाल के साथ-साथ चीन में हालात ठीक नहीं है।

शी जिनपिंग का 'ऑल-आउट' रेस्क्यू ऑपरेशन 
चीन में अचानक बाढ़ आने के बाद राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने लापता लोगों की तलाश के लिए हरसंभव प्रयास करने के निर्देश दिए। उन्होंने 'ऑल-आउट' रेस्क्यू ऑपरेशन के जरिए खतरे में पड़े लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और घायलों का तुरंत इलाज कराने को कहा। साथ ही निगरानी और चेतावनी व्यवस्था मजबूत करने तथा दूसरे हादसों को रोकने पर जोर दिया। चीन के प्रधानमंत्री ली कियांग ने भी प्रभावित और लापता लोगों की संख्या का जल्द पता लगाने और राहत कार्य तेज करने के निर्देश दिए। 

 

More From Author

मुख्यमंत्री से संवाद में बोलीं- अब यात्रा के लिए किसी पर नहीं रहना पड़ेगा निर्भर

8वें वेतन आयोग का नया गणित: 7% इंक्रीमेंट और 2.0 फिटमेंट फैक्टर से कितनी बढ़ेगी सैलरी?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 13967/1

RO No. 13944/210

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.