रक्षा बंधन का पर्व अटूट प्रेम, विश्वास और आस्था का प्रतीक है। इस दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर रक्षासूत्र बांधती हैं। रक्षा सूत्र को राखी भी कहा जाता है। यह पर्व सावन माह के आखिरी दिन सावन पूर्णिमा को मनाने की परंपरा है। इस साल सावन पूर्णिमा पर चंद्र ग्रहण और पंचक का साया रहने के कारण लोगों के मन में सवाल है कि राखी बांधना किस समय शुभ रहेगा। सबसे पहले आप जान लें कि भारत में चंद्र ग्रहण की दृश्यता नहीं रहेगी, जिसके कारण सूतक काल मान्य नहीं होगा। ज्योतिषाचार्यों का मत है कि ग्रहण देश में नजर नहीं आने के कारण इसका राखी या रक्षा बंधन पर कोई प्रभाव नहीं होगा। हालांकि राखी पर पूरे दिन पंचक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में पंचक के समय राखी बांधने पर रोक नहीं है। राखी बांधने के लिए राहुकाल का भी विचार किया जाता है। आइए जानते हैं कि राहुकाल रहित 28 अगस्त को राखी बांधने का शुभ मुहूर्त।
पंचक कब से कब तक रहेगा:
पंचांग के अनुसार, पंचक 27 अगस्त को दोपहर 01 बजकर 35 मिनट पर प्रारंभ हो चुका है और 01 सितंबर की सुबह 03 बजकर 24 मिनट तक रहेगा। यह पंचक गुरुवार से शुरू हुआ है, इसलिए इसे अग्नि पंचक कहा जाता है। शास्त्रों में अग्नि पंचक को भाई-बहन के त्योहार का बाधक नहीं माना गया है।
राखी बांधने का सबसे उत्तम मुहूर्त:
28 अगस्त 2026, शुक्रवार को रक्षा बंधन के दिन सुबह 05 बजकर 57 मिनट से सुबह 09 बजकर 48 मिनट तक राखी बांधने का सबसे उत्तम और शुभ मुहूर्त रहने वाला है।
28 अगस्त को राहुकाल कब से कब तक रहेगा:
रक्षा बंधन के दिन राहुकाल सुबह 10 बजकर 54 मिनट से दोपहर 12 बजकर 28 मिनट तक रहेगा। ज्योतिषाचार्यों का मत है कि इस समय राखी बांधने से बचना चाहिए।
राहुकाल रहित राखी बांधने के शुभ मुहूर्त:
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 05:39 बजे से सुबह 06:20 बजे तक।
प्रातः सन्ध्या- सुबह 06:00 बजे से सुबह 07:02 बजे तक।
अभिजित मुहूर्त- दोपहर 01:24 बजे से दोपहर 02:19 बजे तक।
विजय मुहूर्त- शाम 04:08 बजे से शाम 05:03 बजे तक।
गोधूलि मुहूर्त- रात 08:41 बजे से रात 09:02 बजे तक।
सायाह्न सन्ध्या- रात 08:41 बजे से रात 09:43 बजे तक।
अमृत काल- शाम 04:14 बजे से शाम 05:53 बजे तक।
रक्षाबंधन पर राखी बांधने के चौघड़िया मुहूर्त
लाभ चौघड़िया – सुबह 07:33 बजे से सुबह 09:10 बजे तक।
अमृत चौघड़िया – सुबह 09:10 बजे से सुबह 10:46 बजे तक।
शुभ चौघड़िया – दोपहर 12:22 बजे से दोपहर 01:58 बजे तक।
चर चौघड़िया – शाम 05:11 बजे से शाम 06:47 बजे तक।
राखी बांधते समय किस मंत्र का जाप करना चाहिए:
राखी बांधते समय इस प्रसिद्ध पौराणिक मंत्र का जाप करना बेहद शुभ माना जाता है:
येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥
अर्थ:
इस श्लोक का अर्थ है- जिस रक्षासूत्र से सबसे शक्तिशाली और बलशाली दानवराज बलि को बांधा गया था, उसी रक्षासूत्र से मैं तुम्हें बांधती हूं। हे रक्षासूत्र! तुम स्थिर रहना, कभी अपने कर्तव्य से विचलित मत होना और सदैव रक्षा करना।
तिलक और आरती:
राखी बांधने से पहले भाई के माथे पर रोली और अक्षत (चावल) का तिलक लगाएं और आरती उतारें। अब भाई के दाहिने हाथ की कलाई पर राखी बांधे।
राखी बांधते समय भाई का मुख किस दिशा में होना चाहिए:
शास्त्रों में राखी बांधते समय भाई का मुख पूर्व या उत्तर दिशा की ओर होना शुभ माना जाता है।

