तबाही के बाद राहत शिविरों में बदहाल जिंदगी, नेपाल की पीड़ित महिलाओं ने बताई दर्दनाक मुश्किलें

काठमांडू 

नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने हजारों लोगों की जिंदगी तबाह कर दी है. घर उजड़ गए, सामान बह गया और बड़ी संख्या में लोग राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं. लेकिन बाढ़ से बच निकलने के बाद भी महिलाओं की मुश्किलें खत्म नहीं हुई हैं। 

AFP की ग्राउंड रिपोर्ट में नेपाल के राहत शिविरों में रह रही महिलाओं की ऐसी परेशानियां सामने आई हैं, जिन पर आमतौर पर आपदा के दौरान कम बात होती है. महिलाओं के लिए पीरियड्स, साफ पानी, टॉयलेट, कपड़े और प्राइवेसी जैसी रोजमर्रा की जरूरतें भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। 

‘पैड तो मिल रहे हैं, लेकिन अंडरवियर नहीं’

AFP की रिपोर्ट के मुताबिक, राहत शिविर में रह रही कुछ महिलाओं ने बताया कि उन्हें सैनिटरी पैड मिल रहे हैं, लेकिन पहनने के लिए अंडरगारमेंट्स जैसी जरूरी चीजें आसानी से उपलब्ध नहीं हैं। 

बाढ़ में घर और सामान खो चुकी महिलाओं के लिए यह समस्या और बड़ी हो गई है. पीरियड्स के दौरान सिर्फ पैड मिलना ही काफी नहीं होता. साफ पानी, टॉयलेट, कपड़े बदलने की जगह और निजी स्वच्छता के लिए जरूरी सुविधाएं भी चाहिए होती हैं। 

400 से ज्यादा लोगों के लिए सिर्फ तीन टॉयलेट
AFP की रिपोर्ट में राहत शिविरों में सैनिटेशन की स्थिति भी सामने आई है. एक शिविर में 400 से ज्यादा लोगों के लिए सिर्फ तीन टॉयलेट होने की बात बताई गई है। 

महिलाओं के लिए परेशानी इसलिए और बढ़ जाती है क्योंकि उन्हें टॉयलेट के साथ-साथ नहाने और कपड़े बदलने के लिए भी पर्याप्त प्राइवेसी चाहिए. लेकिन आपदा के बाद बनाए गए अस्थायी शिविरों में ये सुविधाएं अक्सर सीमित होती हैं। 

बाढ़ ने छीन ली सिर्फ छत नहीं, निजी जिंदगी भी
घर उजड़ने के बाद राहत शिविर में पहुंचना किसी परिवार के लिए राहत की शुरुआत हो सकती है, लेकिन महिलाओं की जिंदगी में कई निजी मुश्किलें वहीं से शुरू होती हैं। 

घर में जिन चीजों को लेकर कभी सोचना नहीं पड़ता था, वही चीजें अब जरूरत बन जाती हैं- साफ कपड़े, अंडरगारमेंट्स, सैनिटरी पैड, साफ पानी और ऐसी जगह जहां वे बिना किसी झिझक के अपनी निजी जरूरतें पूरी कर सकें। 

AFP की रिपोर्ट इस बात को सामने लाती है कि आपदा राहत सिर्फ खाना, पानी और टेंट उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं हो सकती. महिलाओं की गरिमा और स्वच्छता से जुड़ी जरूरतों को भी राहत व्यवस्था का अहम हिस्सा बनाना जरूरी है। 

जिंदगी बच गई, लेकिन सामान्य जिंदगी कब लौटेगी?
बाढ़ से बच जाना निश्चित तौर पर सबसे बड़ी राहत है. लेकिन जिन लोगों ने अपना घर और सामान खो दिया है, उनके लिए सामान्य जिंदगी में लौटना लंबा सफर है। 

राहत शिविरों में रह रही महिलाओं की बातें इसी संघर्ष को सामने लाती हैं. उनके लिए सवाल सिर्फ यह नहीं है कि आज खाना मिलेगा या नहीं. सवाल यह भी है कि वे कब फिर से अपने घर जैसी सुरक्षा, प्राइवेसी और सम्मान के साथ जिंदगी जी पाएंगी। 

AFP की रिपोर्ट के जरिए सामने आई ये तस्वीर बताती है कि किसी आपदा का असर पानी उतरने के बाद भी लंबे समय तक लोगों की जिंदगी में बना रहता है। 

More From Author

पीएम श्री केवी क्रमांक 5 में गुरुओं को नमन, हर्षोल्लास से मना शिक्षक दिवस

सैफई महोत्सव व बग्घी पर खर्च पैसे से संवर सकता था लाखों बच्चों का भविष्य: सीएम योगी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 13997/202

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.