4000 करोड़ की ‘रामायण’ का पहला गाना ‘जय जय राम’ रिलीज, भक्ति के बीच उठे ये बड़े सवाल

नितेश तिवारी की 4000 करोड़ वाली 'रामायण' से उम्मीदें सिर्फ एक फिल्म जितनी नहीं हैं. ये वो कहानी है जिसे भारत का बच्चा-बच्चा जानता है, जिसके किरदारों से करोड़ों लोगों की आस्था जुड़ी है और जिसके हर नए रूप से लोगों की उम्मीदें भी जुड़ जाती हैं. ऐसे में गणेश चतुर्थी के शुभ मौके पर जब फिल्म का पहला गाना 'जय जय राम' रिलीज हुआ, तो जाहिर है उत्सुकता भी जबरदस्त थी.

एआर रहमान का संगीत, अरिजीत सिंह और श्रेया घोषाल की आवाज और डॉ. कुमार विश्वास के बोल… कागज पर ये कॉम्बिनेशन किसी म्यूजिकल धमाके से कम नहीं लगता. गाना शुरू होता है और पहली ही सुनवाई में मन को सुकून देता है. राम-सिया की प्रेम कहानी, शादी, अयोध्या की गलियां, फूल बरसाती प्रजा, राम का योद्धा रूप… विजुअल्स भी भव्य हैं. रणबीर कपूर और साई पल्लवी की जोड़ी स्क्रीन पर खूबसूरत लगती है.

लेकिन यहीं से मेरे मन में एक सवाल उठता है- इसमें नया क्या है?
क्योंकि गाने की सबसे बड़ी ताकत ही इसकी सबसे बड़ी कमजोरी बन जाती है. 'राम सिया राम… सिया राम जय जय राम' की वही जानी-पहचानी धुन कानों में पड़ते ही बचपन की यादें ताजा हो जाती हैं. ये वही भाव है जिससे हम सालों से जुड़े हुए हैं. 1975 में जसपाल सिंह की आवाज और रवींद्र जैन के लिखे-संगीतबद्ध भजन की लोकप्रियता ऐसी है कि इसे सुनते ही भावुक होना लगभग तय है.

रामायण के गाने जय जय राम का एक सीन
तो फिर सवाल ये है कि हमें गाना पसंद आया या उस पुरानी धुन से जुड़ी हमारी भावनाओं ने इसे पसंद करवा दिया?

मेरी नजर में 'जय जय राम' यहीं थोड़ा फिसल जाता है. मैं ये नहीं कहती कि ये पूरा गाना ही नाउम्मीदी वाला है या कॉपी किया है लेकिन जैसे ही वो पार्ट आता है जिसे हमने बचपन से सुना है, मन में अलग ही भावनाएं उमड़ने लगती हैं. फिर मैं इस गाने को रणबीर की रामायण के रूप में नहीं देख पाती.

क्योंकि जिस 4000 करोड़ के बजट, इतनी बड़ी स्टारकास्ट और एआर रहमान जैसे ऑस्कर विजेता संगीतकार के साथ इतना बड़ा संसार रचा है, वहां संगीत में भी अपनी एक अलग पहचान की उम्मीद थी. लेकिन पुरानी धुन का सहारा लेते ही गाना कहीं न कहीं री-क्रिएशन जैसा महसूस होने लगता है.

ऊपर से टीजर और ट्रेलर की तरह गाने में भी कहानी के लगभग हर बड़े पड़ाव को ठूंस दिया गया है. सीता स्वयंवर से राम-सिया विवाह, राज्याभिषेक की तैयारी से वनवास और फिर लक्ष्मण-भरत के त्याग तक… सब कुछ दिखाने की कोशिश है. यानी गाना कम और पूरी रामायण की झलक ज्यादा लगती है. ये वही दिक्कत है जो फिल्म के टीजर और ट्रेलर में भी नजर आई थी- हर चीज दिखा देने की बेचैनी. 'रामायण' जैसी कहानी में तो शायद ठहराव ज्यादा खूबसूरत होता.

रामायण के गाने जय जय राम का एक सीन
गणेश चतुर्थी पर दर्शकों को गाने के रूप में 'भेंट' देने की भावना अच्छी है. लेकिन इस भेंट में मेकर्स की अपनी मौलिक छाप उतनी साफ नहीं दिखती, जितनी इस फिल्म से उम्मीद है. रणबीर का राम, साई पल्लवी की सीता और पूरी दुनिया भले ही नई हो, लेकिन संगीत सुनते ही हम पुराने राम के पास लौट जाते हैं.

और शायद यही 'जय जय राम' की सबसे बड़ी विडंबना है- गाना सुनकर रोंगटे तो खड़े होते हैं, लेकिन फिल्म की अपनी आवाज सुनाई नहीं देती. अगर यही भक्ति, वही भाव और वही जुड़ाव किसी बिल्कुल नई धुन के साथ पैदा होता, तो शायद इस 4000 करोड़ की 'रामायण' के पहले गाने की बात ही कुछ और होती.

More From Author

राम मंदिर दर्शन के बाद कबीर दुहन सिंह का बड़ा संकेत, अयोध्या पर बन सकती है नई फिल्म

लैंडिंग से पहले विमान में आई तकनीकी खराबी, मिसराता एयरपोर्ट पर हादसे से मची हलचल

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 13997/202

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.