भोपाल
मध्यप्रदेश में तकनीकी शिक्षा का विस्तार बीते दो दशकों में हुए व्यापक बदलावों की कहानी कहता है। वर्ष 2002 में प्रदेश में जहां शासकीय एवं निजी तकनीकी शिक्षण संस्थानों की संख्या 266 थी, वहीं वर्ष 2024 में यह संख्या बढ़कर 1,211 हो गई। इस प्रकार दो दशकों में तकनीकी शिक्षण संस्थानों के नेटवर्क में लगभग 355 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
इसी अवधि में पॉलिटेक्निक महाविद्यालयों की संख्या भी वर्ष 2002 के 42 से बढ़कर वर्ष 2024 में 129 हो गई, अर्थात लगभग 212 प्रतिशत की वृद्धि। यह विस्तार प्रदेश में तकनीकी एवं कौशल आधारित शिक्षा के बढ़ते आधार और युवाओं के लिए उपलब्ध शैक्षणिक अवसरों के व्यापक विस्तार को दर्शाता है।
यह यात्रा केवल संस्थानों की संख्या बढ़ने तक सीमित नहीं है। तकनीकी शिक्षा के विस्तारित आधार ने विद्यार्थियों के लिए अध्ययन, कौशल-विकास, रोजगार, अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता के नए अवसरों की नींव तैयार की है। अब इसी आधार को गुणवत्ता, आधुनिक तकनीक, उद्योगोन्मुख शिक्षा और आत्मनिर्भरता से जोड़ने की दिशा में कार्य किया जा रहा है।
इसी विकसित आधार को नई दिशा और गति देने का कार्य मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मार्गदर्शन और उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री इन्दर सिंह परमार के नेतृत्व में किया जा रहा है। वर्तमान सरकार के विगत ढाई वर्षों में तकनीकी शिक्षा को केवल संस्थानों और प्रवेश संख्या के विस्तार तक सीमित न रखते हुए उसे भविष्य की तकनीकी अर्थव्यवस्था, रोजगार, उद्यमिता, अनुसंधान और आत्मनिर्भरता से जोड़ने पर विशेष जोर दिया गया है।
विस्तार से गुणवत्ता और उपयोगिता की ओर
वर्ष 2002 से 2024 तक तकनीकी शिक्षा के संस्थागत विस्तार ने प्रदेश में एक मजबूत आधार तैयार किया। अब इसी आधार पर तकनीकी शिक्षा को अधिक आधुनिक, रोजगारोन्मुख और कौशल-आधारित बनाने की दिशा में कार्य हो रहा है।
वर्तमान में प्रदेश में 138 इंजीनियरिंग महाविद्यालय संचालित हैं, जिनकी कुल प्रवेश क्षमता 74,722 है। वहीं 128 पॉलिटेक्निक महाविद्यालयों में 36,491 सीटों के माध्यम से विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा उपलब्ध कराई जा रही है।
इस परिवर्तन का अगला महत्वपूर्ण पक्ष है—तकनीकी शिक्षा को विद्यार्थियों की वास्तविक आवश्यकताओं और रोजगार बाजार से जोड़ना। शासकीय संस्थानों में सक्रिय ट्रेनिंग एवं प्लेसमेंट सेल के माध्यम से 40 से 50 प्रतिशत विद्यार्थियों को रोजगार एवं प्लेसमेंट प्राप्त हो रहा है।
इस प्रकार तकनीकी शिक्षा का विकास अब केवल ‘कितने संस्थान’ के प्रश्न से आगे बढ़कर ‘इन संस्थानों से विद्यार्थियों को क्या अवसर मिल रहे हैं’ के प्रश्न का उत्तर देने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। प्रदेश में बढ़ता विश्वास तकनीकी शिक्षा के प्रति विद्यार्थियों की बढ़ती रुचि का प्रभाव प्रवेश संख्या में भी दिखाई देता है।
सत्र 2024-25 में 1 लाख 50 हजार 178 विद्यार्थियों ने प्रवेश लिया था, जो सत्र 2025-26 में बढ़कर 1 लाख 89 हजार 210 हो गया। इस प्रकार कुल प्रवेश में 25.99 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
शासकीय पॉलिटेक्निक महाविद्यालयों में जागरूकता अभियानों के परिणामस्वरूप प्रवेश संख्या में 21.38 प्रतिशत की वृद्धि हुई। यह संकेत देता है कि तकनीकी एवं कौशल आधारित शिक्षा अब युवाओं के लिए उच्च शिक्षा और रोजगार की महत्वपूर्ण राह बन रही है।
डिप्लोमा को 12वीं के समतुल्य मान्यता : तकनीकी शिक्षा को मुख्यधारा से जोड़ने का कदम
तकनीकी शिक्षा को सामाजिक एवं शैक्षणिक रूप से अधिक व्यापक अवसरों से जोड़ने के लिए पॉलिटेक्निक डिप्लोमा को कक्षा 12वीं के समतुल्य घोषित किया गया है।
इस निर्णय से डिप्लोमा विद्यार्थियों के लिए उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं और विभिन्न रोजगार अवसरों का दायरा विस्तृत हुआ है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 की भावना के अनुरूप पॉलिटेक्निक डिप्लोमा उत्तीर्ण विद्यार्थी तकनीकी के साथ-साथ गैर-तकनीकी विषयों में भी उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकता है।
अर्थात तकनीकी शिक्षा को अब एक अलग धारा के रूप में नहीं, बल्कि शिक्षा की मुख्यधारा से जुड़े एक महत्वपूर्ण विकल्प के रूप में सशक्त किया जा रहा है।
प्रतिभा के साथ सरकार का आर्थिक संबल
तकनीकी शिक्षा के विस्तार को तभी सार्थक बनाया जा सकता है, जब आर्थिक कारणों से कोई प्रतिभाशाली विद्यार्थी अवसर से वंचित न हो। इसी दृष्टि से मुख्यमंत्री मेधावी विद्यार्थी योजना के माध्यम से विद्यार्थियों को आर्थिक सहयोग दिया जा रहा है।
सत्र 2024-25 में 78 हजार 218 से अधिक विद्यार्थियों को लगभग 750 करोड़ रूपये की सहायता प्रदान की गई। वित्तीय वर्ष 2025-26 में 74 हजार 349 मेधावी विद्यार्थियों को लगभग 1,100 करोड़ रूपये की वित्तीय सहायता दी गई।
इसी प्रकार मुख्यमंत्री जनकल्याण (शिक्षा प्रोत्साहन) योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2024-25 में 14 हजार 447 विद्यार्थियों को 14.55 करोड़ रूपये तथा वित्तीय वर्ष 2025-26 में 35 हजार से अधिक विद्यार्थियों को 127.50 करोड़ रूपये की सहायता प्रदान की गई।
SGSITS इंदौर में ‘अटल वित्तीय सहायता योजना’ की शुरुआत भी इसी छात्र-केंद्रित दृष्टिकोण का उदाहरण है। योजना के अंतर्गत आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को तकनीकी शिक्षा जारी रखने के लिए प्रतिवर्ष 1 करोड़ रूपये की आनुपातिक आर्थिक सहायता का प्रावधान किया गया है। डिप्लोमा से द्वितीय वर्ष में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों को भी इसका लाभ दिया जा रहा है।
मातृभाषा में तकनीकी शिक्षा : ज्ञान के साथ आत्मविश्वास
राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप तकनीकी शिक्षा में भारतीय भाषाओं, विशेषकर हिंदी माध्यम को प्रोत्साहित किया जा रहा है। बी.टेक. सिविल के हिंदी माध्यम विद्यार्थियों को विशेष प्रोत्साहन तथा अंतिम वर्ष में अधिकतम 2 लाख रूपये तक की वित्तीय सहायता का प्रावधान किया गया है।
इस पहल का उद्देश्य केवल भाषा का विकल्प देना नहीं, बल्कि हिंदी माध्यम से आने वाले विद्यार्थियों के लिए तकनीकी विषयों की समझ, आत्मविश्वास और अवसरों को मजबूत करना है।
स्थानीय आवश्यकता से जुड़ी तकनीकी शिक्षा
तकनीकी शिक्षा को स्थानीय अर्थव्यवस्था और उद्योग की आवश्यकताओं से जोड़ने की दिशा में सिंगरौली में 76.56 करोड़ रूपये की लागत से अत्याधुनिक खनन प्रौद्योगिकी महाविद्यालय का निर्माण प्रगति पर है।
CSR सहयोग से विकसित हो रहा यह संस्थान स्थानीय खनन एवं ऊर्जा क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप विशेषज्ञ मानव संसाधन तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।
इस प्रकार तकनीकी शिक्षा को स्थानीय संसाधनों, उद्योगों और रोजगार की संभावनाओं से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों से शैक्षणिक जुड़ाव
IIT इंदौर एवं MANIT भोपाल के साथ शैक्षणिक सहयोग के माध्यम से प्रदेश के विद्यार्थियों को राष्ट्रीय स्तर के संस्थानों में अध्ययन, अनुसंधान एवं प्रोजेक्ट कार्य का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है।
आधुनिक प्रयोगशालाओं और विशेषज्ञ फैकल्टी के मार्गदर्शन से विद्यार्थियों को उच्च स्तरीय तकनीकी वातावरण का अनुभव प्राप्त हो रहा है। इससे प्रदेश के तकनीकी संस्थानों और राष्ट्रीय स्तर की अकादमिक एवं अनुसंधान क्षमताओं के बीच जुड़ाव मजबूत हो रहा है।
रक्षा तकनीक और साइबर सुरक्षा के नए अवसर
राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, भोपाल में राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय की शुरुआत के माध्यम से साइबर सुरक्षा, डिजिटल फोरेंसिक, सिक्योरिटी मैनेजमेंट, पुलिस साइंस एवं मैनेजमेंट तथा राष्ट्रीय सुरक्षा आधारित अनुसंधान के क्षेत्रों में नए अवसर विकसित किए जा रहे हैं।
यह पहल तकनीकी शिक्षा को देश की उभरती सुरक्षा एवं डिजिटल आवश्यकताओं से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
क्षेत्रीय संतुलन के लिए विश्वविद्यालयों का विकेंद्रीकरण
राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के विकेंद्रीकरण की दिशा में *मालवा प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय उज्जैन, महाकौशल प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय जबलपुर और मध्यभारत प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय भोपाल की स्थापना को स्वीकृति प्रदान की गई है। इससे क्षेत्रीय स्तर पर तकनीकी शिक्षा की प्रशासनिक एवं शैक्षणिक पहुंच मजबूत होने, स्थानीय उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप पाठ्यक्रम विकसित होने तथा अनुसंधान एवं नवाचार को गति मिलने की संभावनाएं हैं।
रोजगार लेने वाले नहीं, रोजगार देने वाले युवा
तकनीकी शिक्षा के अगले चरण का केंद्र केवल रोजगार नहीं, बल्कि उद्यमिता और रोजगार सृजन है। प्रदेश के 10 शासकीय इंजीनियरिंग एवं पॉलिटेक्निक संस्थानों में अत्याधुनिक इन्क्यूबेशन सेंटर स्थापित किए गए हैं। जबलपुर, उज्जैन, रीवा, इंदिरा गांधी इंजीनियरिंग महाविद्यालय और नौगांव इंजीनियरिंग महाविद्यालय सहित विभिन्न संस्थानों में विद्यार्थियों के लिए नवाचार एवं उद्यमिता का वातावरण विकसित किया गया है।
भोपाल, इंदौर और शिवपुरी के विभिन्न पॉलिटेक्निक संस्थानों में भी इन्क्यूबेशन सेंटर युवाओं को स्टार्टअप, तकनीकी नवाचार, प्रशिक्षण एवं स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध करा रहे हैं।
MSME-RAMP योजना के अंतर्गत 9 अतिरिक्त इन्क्यूबेशन सेंटर चिन्हित किए गए हैं। इनके माध्यम से विभिन्न जिलों की स्थानीय प्रतिभाओं को नवाचार और उद्यमिता से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।
अत्याधुनिक तकनीक से भविष्य की तैयारी
IIT दिल्ली के सहयोग से तकनीकी संस्थानों में अत्याधुनिक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस विकसित किए गए हैं। इंजीनियरिंग महाविद्यालय जबलपुर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एवं 5G-IoT, इंजीनियरिंग महाविद्यालय उज्जैन में ब्लॉकचेन टेक्नोलॉजी तथा शासकीय पॉलिटेक्निक महाविद्यालय भोपाल में AR/VR आधारित सेंटर संचालित हैं।
शासकीय पॉलिटेक्निक महाविद्यालय शाजापुर में 1.25 करोड़ रूपये की लागत से रिन्यूएबल एनर्जी लैब विकसित की जा रही है। इससे ग्रीन एनर्जी, सोलर टेक्नोलॉजी और उभरती तकनीकों में विद्यार्थियों को व्यावहारिक प्रशिक्षण मिलेगा।
कोडिंग से AI तक : नई तकनीकी अर्थव्यवस्था के लिए तैयारी
भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए प्रदेश में कोडिंग लैब्स का विस्तार किया जा रहा है। रीवा में कोडिंग लैब संचालित है, जबकि सागर, जबलपुर एवं उज्जैन के इंजीनियरिंग महाविद्यालयों तथा नर्मदापुरम, मुरैना, शहडोल, इंदौर, ग्वालियर एवं भोपाल के पॉलिटेक्निक संस्थानों में अत्याधुनिक कोडिंग लैब्स विकसित की जा रही हैं।
AI, डेटा साइंस, साइबर सिक्योरिटी, रोबोटिक्स, ड्रोन टेक्नोलॉजी और डेटा एनालिटिक्स जैसे उभरते क्षेत्रों से जुड़े पाठ्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को भविष्य की तकनीकी अर्थव्यवस्था के अनुरूप तैयार किया जा रहा है।
सार्थक ऐप आधारित रियल-टाइम उपस्थिति प्रणाली, स्मार्ट क्लासरूम, आधुनिक प्रयोगशालाएं, AICTE मानकों के अनुरूप अधोसंरचना तथा सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तकनीकी शिक्षा को अधिक आधुनिक और प्रभावी बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को दर्शाते हैं।
विस्तार से परिवर्तन तक : तकनीकी शिक्षा की नई यात्रा
वर्ष 2002 से 2024 के आंकड़े मध्यप्रदेश में तकनीकी शिक्षा के व्यापक संस्थागत विस्तार की तस्वीर प्रस्तुत करते हैं। शासकीय एवं निजी तकनीकी शिक्षण संस्थानों की संख्या 266 से बढ़कर 1,211 होना तथा पॉलिटेक्निक महाविद्यालयों की संख्या 42 से बढ़कर 129 होना इस यात्रा के महत्वपूर्ण पड़ाव हैं।
वहीं वर्तमान सरकार के विगत ढाई वर्षों की पहल इस विस्तारित आधार को गुणवत्ता, कौशल, रोजगार, नवाचार, अनुसंधान और आत्मनिर्भरता से जोड़ने की दिशा को सामने रखती हैं।
अर्थात तकनीकी शिक्षा की यात्रा अब केवल संस्थानों की संख्या बढ़ाने से संस्थानों की उपयोगिता बढ़ाने, केवल डिग्री से कौशल, केवल रोजगार से रोजगार सृजन और केवल परंपरागत पाठ्यक्रमों से भविष्य की उभरती तकनीकों की ओर बढ़ रही है।
विजन : तकनीक, कौशल और नवाचार से विकसित मध्यप्रदेश
मध्यप्रदेश में तकनीकी शिक्षा का लक्ष्य केवल डिग्रीधारी इंजीनियर तैयार करना नहीं, बल्कि ऐसे युवा तैयार करना है जो तकनीकी रूप से दक्ष, कौशल-संपन्न, नवाचारी, आत्मनिर्भर और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप हों।
वर्षों में विकसित हुए संस्थागत आधार को आधुनिक तकनीक, उद्योगोन्मुख शिक्षा, अनुसंधान, स्टार्टअप, मातृभाषा और कौशल से जोड़कर तकनीकी शिक्षा को प्रदेश के आर्थिक एवं सामाजिक विकास का महत्वपूर्ण माध्यम बनाया जा रहा है।
2002 से शुरू हुई संस्थागत विस्तार की यात्रा आज आधुनिक तकनीक, कौशल, नवाचार और आत्मनिर्भरता के नए चरण में प्रवेश कर रही है। तकनीक से कौशल, कौशल से रोजगार, नवाचार से उद्यमिता और उद्यमिता से आत्मनिर्भरता—यही विकसित मध्यप्रदेश के तकनीकी भविष्य की आधारशिला है।


