अनुभव आधारित एवं विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षा से ही होगा व्यक्तित्व का समग्र विकास – “अनुभवात्मक अध्यापक विकास कार्यक्रम” का शुभारंभ

भोपाल 

उच्च शिक्षा, तकनीकी शिक्षा एवं आयुष मंत्री  इन्दर सिंह परमार ने कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान प्रदान करना नहीं, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी को समझकर उसके व्यक्तित्व का समग्र विकास करना है। जिस प्रकार परिवार में बच्चों के स्वभाव, रुचि, आदतों और व्यवहार को समझकर उनके साथ व्यवहार किया जाता है, उसी प्रकार प्राध्यापकों को भी विद्यार्थियों की रुचि, क्षमता और आवश्यकताओं को समझते हुए शिक्षण करना चाहिए। विद्यार्थी को समग्रता से समझे बिना शिक्षा अपने व्यापक उद्देश्य को प्राप्त नहीं कर सकती। मंत्री  परमार रविवार को भोपाल स्थित राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (NITTTR) के सभागृह में विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान द्वारा आयोजित “अनुभवात्मक अध्यापक विकास कार्यक्रम (पश्चिम क्षेत्र, भोपाल केंद्र)” के क्षेत्रीय प्रशिक्षण-सह-अभिमुखीकरण कार्यक्रम के शुभारंभ अवसर पर संबोधित कर रहे थे।

मंत्री  परमार ने कहा कि राष्ट्रीय पुनर्निर्माण के लिए सामूहिक शक्ति और संकल्प के साथ आगे बढ़ना होगा। शिक्षा के क्षेत्र में अनुभव के आधार पर शिक्षण-पद्धतियों का निरंतर विकास समय की आवश्यकता है। प्राध्यापक केवल विषय का ज्ञान प्रदान करने तक सीमित न रहें, बल्कि विद्यार्थियों के ज्ञान, व्यवहार, संवेदना, कौशल और जीवन-मूल्यों के विकास में सहभागी बनें। अनुभवात्मक शिक्षण विद्यार्थियों को ज्ञान को जीवन से जोड़ने और उसे व्यवहार में उतारने की क्षमता प्रदान करता है।

मंत्री  परमार ने कहा कि “अनुभव से सीखना, विद्यार्थी को समझना और शिक्षा को जीवन से जोड़ना – यही ऐसी शिक्षा का आधार है, जो विद्यार्थी के ज्ञान के साथ उसके व्यवहार, संवेदना, कौशल और व्यक्तित्व का भी विकास करती है।” शिक्षक का दायित्व केवल पाठ्यक्रम पूरा करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में सीखने की जिज्ञासा, जीवन-मूल्यों और समाज के प्रति उत्तरदायित्व की भावना विकसित करना भी है।

भारतीय भाषाओं का ज्ञान बढ़ाएगा भाषाई अपनत्व और राष्ट्रीय एकात्मता

मंत्री  परमार ने कहा कि मध्यप्रदेश में अहिंदी भारतीय भाषाओं को क्रेडिट के साथ विद्यार्थियों को पढ़ाने की कार्ययोजना पर कार्य किया जा रहा है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय भाषाओं की विविधता से परिचित कराने के साथ भाषाई एकात्मता को सुदृढ़ करना है। उन्होंने कहा कि भाषाएँ केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि एक-दूसरे की संस्कृति, भावनाओं और समाज को समझने का सेतु भी हैं।

मंत्री  परमार ने कहा कि जब मध्यप्रदेश का विद्यार्थी देश की अन्य भारतीय भाषाओं को सीखेगा और आगे शिक्षा, रोजगार या अन्य अवसरों के लिए किसी दूसरे प्रदेश में जाएगा, तो वहां की भाषा के कुछ शब्दों और अभिव्यक्तियों के माध्यम से संवाद में सहजता और अपनत्व का अनुभव होगा। यह अपनत्व केवल व्यक्तिगत संबंधों को मजबूत नहीं करेगा, बल्कि विभिन्न राज्यों के विद्यार्थियों और समाजों के बीच परस्पर समझ, आत्मीयता और राष्ट्रीय एकात्मता को भी सशक्त करेगा।

मंत्री  परमार ने कहा कि मध्यप्रदेश की धरती से देशभर में भाषाई एकात्मता का संदेश गुंजायमान होना चाहिए। भारतीय भाषाएँ समाज और राष्ट्र को जोड़ने का कार्य करती हैं, तोड़ने का नहीं। अलग-अलग भाषाओं को जानना भारत की विविधता को समझने और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को और मजबूत करने का माध्यम है।

पंचकोशात्मक विकास और पंचपदी शिक्षण पद्धति पर प्रशिक्षण

कार्यक्रम में राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE), नई दिल्ली, अंतर-विश्वविद्यालय शिक्षक शिक्षा केंद्र (IUCTE), बीएचयू, वाराणसी तथा राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षक प्रशिक्षण एवं अनुसंधान संस्थान (NITTTR), भोपाल सह-संयोजक हैं। कार्यक्रम का उद्देश्य पंचकोशात्मक विकास एवं पंचपदी शिक्षण पद्धति के माध्यम से प्राध्यापकों को अनुभव-आधारित एवं विद्यार्थी-केंद्रित शिक्षण के लिए उन्मुख करना है।

कार्यक्रम के प्रथम चरण में 20 सितंबर को चार सत्रों के माध्यम से प्रतिभागियों का अभिमुखीकरण किया जा रहा है। इसके पश्चात 21 से 24 सितंबर तक देशभर से आए प्रतिभागी मध्यप्रदेश में विद्या भारती द्वारा संचालित 31 विद्यालयों में रहकर पंचकोशात्मक शिक्षा एवं पंचपदी शिक्षण पद्धति का प्रत्यक्ष प्रशिक्षण और अनुभव प्राप्त करेंगे।

देशभर से आए शिक्षक-शिक्षाविद हुए शामिल

कार्यक्रम में विद्या भारती उच्च शिक्षा संस्थान के राष्ट्रीय संगठन मंत्री के.एन. रघुनंदन, राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. कैलाश चंद्र शर्मा एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष तथा कार्यक्रम समन्वयक डॉ. शशिरंजन अकेला, विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के राष्ट्रीय संगठन मंत्री गोविंद महंत, राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. रविंद्र कान्हेरे एवं राष्ट्रीय महामंत्री देशराज शर्मा, NITTTR भोपाल के निदेशक प्रो. चंद्र चारु त्रिपाठी, राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद (NCTE) की दक्षिण क्षेत्रीय समिति की अध्यक्ष प्रो. मीना राजीव चंदावरकर एवं अंतर-विश्वविद्यालय शिक्षक शिक्षा केंद्र (IUCTE), वाराणसी से डॉ. राजा पाठक सहित देश के विभिन्न राज्यों से आए शिक्षक-शिक्षाविद एवं उच्च शिक्षा संस्थानों के शिक्षक-प्रशिक्षक उपस्थित थे।

 

More From Author

झूठ की गूंज में कांग्रेस के युवराज का आचरण नारी शक्ति का अपमान: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

निवेशकों के लिए बड़ी खबर, Maharashtra Scooters देगी ₹160 डिविडेंड; जानें रिकॉर्ड डेट

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 13997/202

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.