8वें वेतन आयोग में पेंशन बढ़ाने की मांग, ₹45 हजार तक हो न्यूनतम पेंशन

नई दिल्‍ली
8वें वेतन आयोग के तहत तेजी से काम चल रहा है. आए दिन किसी ना किसी शहर में आयोग बैठकें कर रहा है और सैलरी-पेंशन को लेकर कर्मचारियों से बातचीत कर रहा है. इस बीच, कर्मचारियों में फिटमेंट फैक्‍टर, भत्तों और पेंशन को लेकर चर्चा तेज है। 

आयोग की बैठकों में बड़े मुद्दे फिटमेंट फैक्टर, सैलरी रिवीजन और भत्तों के अलावा, पुरानी पेंशन योजना (OPS) बनाम नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) है. साल 2004 के बाद सेवा में आए केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठन अब 'गारंटीड पेंशन' की मांग पर अड़े हुए हैं. आइए जानते हैं रिटायर्ड कर्मचारियों की क्‍या-क्‍या मांगे हैं… 

पुरानी पेंशन योजना की मांग 
साल 2004 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों के लिए शुरू की गई नई पेंशन योजना से देशभर के कर्मचारी संतुष्‍ठ नजर नहीं आ रहे हैं. 8वें वेतन आयोग को सौंपे गए नोट में कर्मचारी यूनियनों ने साफ तौर पर कहा है कि मौजूदा बाजार बेस्‍ड रिटर्न वाली योजनाएं उनके और उनके फैमिली के फ्यूचर को आर्थिक सुरक्षा देने में पूरी तरह से नाकाम है. कर्मचारियों की मांग है कि उन्‍हें फिर से पुरानी पेंशन योजना (OPS) का लाभ दिया जाए. सर्वे ऑफ इंडिया के कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) की पूरी तरह बहाली की मांग की है। 

45,000 रुपये न्‍यूनतम पेंशन 
भारत पेंशनर्स समाज (BPS) के तहत पेंशनर्स ने न्‍यूनतम पेंशन की मांग उठाई है. BPS ने न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर ₹45,000 प्रति माह करने, अंतिम वेतन का 67% पेंशन देने और फैमिली पेंशन को अंतिम वेतन का 50% करने की सिफारिश की है।  

कब लागू हो सकती है सिफारिशें? 
वेतन आयोग देशभर के अलग-अलग जोनों में जाकर सभी प्रतिनिधियों की बातें सुन रहा है. इन बैठकों में फिटमेंट फैक्‍टर बढ़ाने, न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी करने और पेंशन बराबरी जैसे गंभीर मुद्दे पर ज्ञापन पेश किया गया है. आयोग अपनी रिपोर्ट मई-जून 2027 तक केंद्र सरकार को दे सकता है। 

रिपोर्ट पेश करने के बाद सरकार द्वारा सिफारिशें मंजूर होने पर इसे लागू किया जाएगा. इसके बाद यह तय होगा कि क्‍या सरकार पेंशन में तीन गुना बढ़ोतरी करेगी और ओपीएस की मांग मानेगी. 2027 में आने वाली फाइनल रिपोर्ट यह तय करेगी कि 2004 के बाद भर्ती हुए लाखों कर्मचारियों को OPS का लाभ मिलेगा या नहीं। 

क्यों केंद्रीय कर्मचारियों के लिए सबसे बड़ा मुद्दा बना 'OPS vs NPS'?
वर्ष 2004 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों के लिए शुरू की गई अंशदायी पेंशन व्यवस्था से देश भर के कर्मचारी संगठन असंतुष्ट हैं। 8वें वेतन आयोग को सौंपे गए ज्ञापनों में कर्मचारी यूनियनों ने साफ कहा है कि मौजूदा बाजार-आधारित रिटर्न वाली योजनाएं उनके और उनके परिवार के भविष्य को आर्थिक सुरक्षा देने में पूरी तरह नाकाम साबित हो रही हैं।

कर्मचारियों की मांग है कि उन्हें अनिश्चितता के माहौल से निकालकर पुरानी 'परिभाषित लाभ' वाली व्यवस्था के तहत लाया जाए।

प्रमुख कर्मचारी संगठनों की क्या हैं 4 बड़ी मांगें?
अलग-अलग केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी यूनियनों ने 8वें वेतन आयोग के समक्ष अपनी विस्तृत मांगें रखी हैं:

A. मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन (सर्वे ऑफ इंडिया): सर्वे ऑफ इंडिया के कर्मचारियों ने पुरानी पेंशन योजना (OPS) की पूरी तरह बहाली की मांग की है। उनकी मांग है कि सेवानिवृत्ति के समय कर्मचारी के अंतिम प्राप्त मूल वेतन का कम से कम 50% हिस्सा गारंटीड पेंशन के रूप में तय किया जाए।

B. फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशन्स (FNPO): डाक विभाग के इस प्रमुख संगठन ने तर्क दिया है कि NPS और हाल ही में घोषित यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) जैसी योजनाएं कर्मचारियों की आशंकाओं को दूर नहीं कर पा रही हैं। इसलिए NPS और UPS के दायरे में आने वाले सभी कर्मचारियों को वापस पुरानी परिभाषित-लाभ पेंशन व्यवस्था (OPS) में शामिल किया जाए।

C. रेलवे सीनियर सिटीजन्स वेलफेयर सोसाइटी (RSCWS): रेलवे पेंशनभोगियों के इस संगठन ने पूर्व कर्मचारियों के वित्तीय और स्वास्थ्य सुरक्षा से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया है। संघ ने सरकार से एक गारंटीड न्यूनतम पेंशन का प्रावधान करने और पेंशन सुरक्षा को और मजबूत करने का आग्रह किया है।

D. भारत पेंशनर्स समाज (BPS): पेंशनभोगियों के इस सबसे बड़े मंच ने आयोग के सामने आंकड़ों के साथ बड़ी मांग रखी है। BPS ने न्यूनतम पेंशन को बढ़ाकर ₹45,000 प्रति माह करने, अंतिम वेतन का 67% पेंशन देने और फैमिली पेंशन को अंतिम वेतन का 50% करने की सिफारिश की है।

आगे क्या होगा? जानिए कब लागू हो सकती हैं सिफारिशें
वेतन आयोग देश भर के अलग-अलग जोनों में जाकर सभी हितधारकों की बातें सुन रहा है। इन बैठकों में फिटमेंट फैक्टर को बढ़ाने, न्यूनतम वेतन में बढ़ोतरी करने और पेंशन बराबरी जैसे गंभीर मुद्दों पर भी ज्ञापन प्राप्त हुए हैं।

आयोग अपनी रिपोर्ट मई-जून 2027 तक केंद्र सरकार को सौंपेगा। इसके बाद सरकार द्वारा सिफारिशें मंजूर होने पर इसे लागू किया जाएगा। अब सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि क्या केंद्र सरकार मौजूदा NPS/UPS जैसे अंशदायी ढांचे को ही मजबूत करेगी या फिर कर्मचारी संगठनों के भारी दबाव में पेंशन संरचना में कोई क्रांतिकारी बदलाव लेकर आएगी।

8वें वेतन आयोग के तहत पेंशन सुधारों को लेकर जिस तरह से केंद्रीय कर्मचारी एकजुट होकर 'गारंटीड पेंशन' और अंतिम वेतन के 50% के फिक्स फॉर्मूले की मांग कर रहे हैं, उससे सरकार पर नैतिक दबाव बढ़ गया है। 2027 में आने वाली फाइनल रिपोर्ट यह तय करेगी कि 2004 के बाद भर्ती हुए लाखों कर्मचारियों का रिटायरमेंट सुरक्षित हो पाएगा या नहीं।

More From Author

धान खरीदी की तैयारियां तेज, खाद्य मंत्री बघेल ने दिए समय पर व्यवस्था पूरी करने के निर्देश

शहपुरा रेलवे ब्रिज बनने तक टोल फ्री, वाहनों से नहीं होगी वसूली

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 13997/202

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.