हर बात सबको बताना पड़ सकता है नुकसानदेह, चाणक्य ने ईमानदारी को लेकर दी थी ये खास सलाह

 प्राचीन भारत के महान दार्शनिक, अर्थशास्त्री और राज सलाहकार चाणक्य को जीवन, शासन और व्यवहार पर उनकी तीखी टिप्पणी करने के लिए आज भी याद किया जाता है

चाणक्य नीति में कहा गया है कि, 'किसी व्यक्ति को जरूरत से ज्यादा ईमानदार नहीं होना चाहिए। सीधे पेड़ सबसे पहले काटे जाते हैं और ईमानदार लोगों को सबसे पहले धोखा दिया जाता है।'

ईमानदारी पर चाणक्य के कथन
अपने भी यह कथन कई बार सुना होगा। हो सकता है कि सुनकर नजरअंदाज भी कर दिया हो, लेकिन इस कथन के माध्यम से चाणक्य जीवन का सबसे की सबसे जरूरी चीज समझाने की कोशिश करते हैं।

सीधे पेड़ सबसे पहले काटे जाने का अर्थ है कि वे इस्तेमाल करने लायक होते हैं, ठीक उसी तरह ईमानदार लोग शोषण का आसानी से शिकार बन सकते हैं। हालांकि इस कथन के जरिए चाणक्य ईमानदारी के खिलाफ नहीं है, बल्कि ऐसी दुनिया में अज्ञानता या लापरवाही के खिलाफ है, जहां हर कोई निष्पक्ष, स्वार्थी और लोभी है।

चाणक्य नीति में चाणक्य कहते हैं कि, व्यक्ति को ईमानदारी और बुद्धिमत्ता के बीच संतुलन स्थापित करना चाहिए। सच बोलना जरूरी है, लेकिन नुकसान से बचने के लिए परिस्थितियों और लोगों को भी समझना उतना ही जरूरी है।

जरूरत से ज्यादा ईमानदार क्यों हैं खतरनाक?
चाणक्य कहते हैं कि, जो व्यक्ति अपने सभी विचार, भावनाएं और योजनाएं जाहिर कर देता है, वह अनजाने में ही दूसरों को ऐसी जानकारी दे सकता है, जिसका इस्तेमाल आगे चलकर उसी के खिलाफ किया जा सकता है। ऐसा इंसान आसानी से छल-कपट का शिकार हो सकता है।चाणक्य के ऐसा कहने के पीछे ईमानदारी को गलत ठहराना नहीं है, बल्कि पूरी तरह से बेपरवाह होने से बचने के लिए है।

चाणक्य कहते हैं कि, ईमानदार होने का मतलब यह बिल्कुल नहीं है कि सबको सब कुछ बता दिया जाए। एक बुद्धिमान व्यक्ति सच बोलते हुए भी यह समझ सकता है कि कब बोलना है, क्या जाहिर करना है और किस पर भरोसा करना है।

क्या चाणक्य झूठ बोलने की प्रेरणा देता हैं?
ऐसा बिल्कुल भी नहीं है। चाणक्य कहते हैं कि आप अपने हर निजी विचार बताए बिना भी सोच कह सकते हैं। आप हर किसी पर फौरन भरोसा किए बिना भी ईमानदार हो सकते हैं। आप अपनी कुछ योजनाओं और निजी मामलों को अपने तक सीमित रखते हुए भी सच्चे बने रह सकते हैं।

छल और विवेक में भी अंतर होता है। छल में जानबूझकर किसी को गलत ज्ञान या मार्गदर्शन प्रदान करना शामिल है। जबकि विवेक का सीधा मतलब है हर बात को कहना जरूरी नहीं है। इसलिए चाणक्य की चेतावनी को बेईमानी के बजाय विचारशील ईमानदारी के रूप में लेना चाहिए।

More From Author

26वीं राज्य स्तरीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगिता का रंगारंग समापन, रायपुर संभाग बना ओवरऑल चैंपियन

योगी सरकार का बड़ा फैसला, शिक्षामित्रों का मानदेय ₹10 हजार से बढ़कर ₹18 हजार; 2 महीने की राशि जारी

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 13997/202

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.