इंदौर के MY अस्पताल में फ्री बोटोक्स ट्रीटमेंट, लकवे से जकड़े अंगों को मिल रही नई जिंदगी

 इंदौर 
इंटरनेट मीडिया पर बोटोक्स को लेकर तरह-तरह के दावे वायरल हो रहे हैं। कहीं इसे लकवे का इलाज बताया जा रहा है तो कहीं कुछ घंटे या दो दिन में हाथ-पैरों की हरकत पूरी तरह लौट आने का दावा किया जा रहा है। लेकिन, इंदौर में स्ट्रोक या लकवे के बाद हाथ-पैरों में होने वाली स्पास्टिसिटी यानी मांसपेशियों के असामान्य कड़ापन से परेशान पात्र मरीजों को एमवाय अस्पताल में बोटुलिनम टॉक्सिन (बोटोक्स) का उपचार नि:शुल्क दिया जा रहा है।

निजी अस्पतालों में महंगा पड़ने वाला यह उपचार आयुष्मान योजना के अंतर्गत किया जा रहा है। अस्पताल में अब तक 1000 से अधिक मरीज इसका लाभ ले चुके हैं।विशेषज्ञों के अनुसार बोटोक्स लकवे का इलाज नहीं है। इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से लकवे के बाद विकसित होने वाली स्पास्टिसिटी को कम करने के लिए किया जाता है।

स्पास्टिसिटी से हाथ मुट्ठी की तरह बंद, पैर जमीन पर रखने में परेशानी
स्ट्रोक के बाद कुछ मरीजों में प्रभावित हिस्से की मांसपेशियां समय के साथ असामान्य रूप से सख्त होने लगती हैं। इसे स्पास्टिसिटी कहा जाता है।

ऐसे मरीजों में हाथ लगातार मुड़ा रह सकता है, उंगलियां मुट्ठी की तरह बंद हो सकती हैं और कोहनी सीधी करने में परेशानी हो सकती है। पैरों में कड़ापन बढ़ने पर पैर सामान्य तरीके से जमीन पर नहीं पड़ता, जिससे चलने में परेशानी हो सकती है।

कई बार यह कड़ापन फिजियोथेरेपी और रोजमर्रा के कामों में भी बाधा बनता है। ऐसे चुनिंदा मरीजों में विशेषज्ञ बोटुलिनम टॉक्सिन का इस्तेमाल करते हैं।

प्रभावित मांसपेशी की पहचान के बाद लगाया जाता है इंजेक्शन
डॉ. मोनिका पोरवाल बागुल मरीज की जांच कर यह देखती हैं कि किस मांसपेशी में असामान्य खिंचाव या कड़ापन है। इसके बाद जरूरत के अनुसार उन्हीं चुनिंदा मांसपेशियों में बोटोक्स लगाया जाता है। इसका उद्देश्य मांसपेशियों की अत्यधिक सक्रियता को अस्थायी रूप से कम करना होता है।

3 से 6 महीने तक रह सकता है असर
बोटोक्स का असर स्थायी नहीं होता। मरीज की स्थिति, मांसपेशियों की प्रतिक्रिया और स्पास्टिसिटी की गंभीरता के आधार पर कुछ मरीजों को तीन से छह महीने बाद दोबारा उपचार की जरूरत पड़ सकती है। हालांकि, हर मरीज को तय अंतराल पर दोबारा इंजेक्शन लगाना जरूरी नहीं है।

दोबारा बोटोक्स देना है या नहीं, कितनी मात्रा में देना है और किन मांसपेशियों में देना है, इसका निर्णय डॉक्टर मरीज की दोबारा जांच के बाद करते हैं।

मरीज बोले- यहां आकर पता चला बोटोक्स मुफ्त है
एमवाय अस्पताल में उपचार करा रहे एक मरीज ने बताया कि उसे पहले जानकारी नहीं थी कि यहां बोटोक्स की सुविधा निशुल्क उपलब्ध है। लकवे के बाद हाथ ठीक से नहीं उठता था और पैर से चलने में भी परेशानी थी।

अलग-अलग जगह इलाज कराने के बाद एमवाय अस्पताल में बोटोक्स लगाया गया। इसके बाद हाथ में कुछ हरकत आने लगी और चलने में भी सुधार महसूस हुआ।मरीज ने कहा कि यदि इस सुविधा की जानकारी पहले होती तो इलाज के लिए अलग-अलग जगह भटकना नहीं पड़ता। सरकारी अस्पताल में उपचार निशुल्क मिलने से मरीज और परिवार पर इलाज का आर्थिक बोझ भी कम होता है।

दिसंबर 2025 में आया था लकवा, बोटोक्स के बाद हाथ में राहत
एक महिला ने बताया कि उसके पिता को दिसंबर 2025 में लकवा आया था। इसके बाद उनका हाथ ठीक से नहीं उठता था। इलाज और पुनर्वास के दौरान बोटोक्स दिया गया। महिला के मुताबिक, इसके बाद हाथ में पहले की तुलना में राहत महसूस हुई और हरकत में सुधार आया।

दो महीने पहले बोटोक्स लगा, हाथ का कड़ापन हुआ कम
दादी को उपचार के लिए एमवाय अस्पताल लेकर आए एक युवक ने बताया कि करीब दो महीने पहले बोटोक्स लगाया गया था। इससे पहले हाथ काफी कड़क रहते थे।अब हाथ पहले की तुलना में लूज हुआ है और मूवमेंट भी आने लगी है। पैर में भी पहले हरकत नहीं थी, लेकिन उपचार के बाद उसमें भी मूवमेंट महसूस हो रही है।

डॉ. अरविंद घनघोरिया ने बताया कि एमवाय अस्पताल में बोटोक्स थेरेपी निशुल्क की जा रही है, जिससे गरीब और जरूरतमंद मरीजों को लाभ मिल रहा है। मरीज किसी भी भ्रामक जानकारी में आकर खुद से कोई इंजेक्शन न लगवाएं। उन्होंने बताया कि यहां 10 साल से यह थेरेपी दी जा रही है।

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