बिना लोहा-स्टील के तैयार हो रहा संत रविदास लोक, नागर शैली की भव्य इमारत का निर्माण अंतिम चरण में

सागर 

सागर में सामाजिक समरसता के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित हो रहा संत रविदास लोक 92% पूरा हो चुका है। 100 करोड़ रुपए की लागत से 11 एकड़ में बन रहे इस परिसर का निर्माण अब अंतिम चरण में है। यह मध्यप्रदेश पर्यटन विकास निगम की देखरेख में तैयार हो रहा है।

लोक का संत शिरोमणि गुरु रविदास महाराज के 650वें जयंती वर्ष के दौरान फरवरी 2027 से पहले लोकार्पण करने का लक्ष्य है। 12 अगस्त 2023 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसका भूमिपूजन किया था। अब लोकार्पण के लिए भी उनके आने की तैयारी है। प्रधानमंत्री कार्यालय की एक विशेष टीम परियोजना की सीधे मॉनीटरिंग कर रही है।

1000 साल तक टिकने वाली नागर शैली से निर्माण
संत रविदास लोक का निर्माण नागर शैली में किया जा रहा है। दावा है कि इस तकनीक से बना परिसर 1000 साल तक अडिग रह सकेगा। निर्माण में लोहे और स्टील का इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है।

परिसर में संत रविदास के जीवन और विचारों को प्रामाणिकता के साथ सहेजने के लिए मंदिर की गैलरी और म्यूजियम में शामिल किए जा रहे दोहों, साखियों और पदों की भी जांच हो रही है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी और इतिहासकार इनकी सूक्ष्मता से समीक्षा कर रहे हैं, ताकि प्रस्तुत सामग्री की प्रामाणिकता पर भविष्य में सवाल न उठें।

युवाओं के लिए क्विज, शाम को लेजर शो
परिसर में घूमने के बाद युवाओं के लिए ऑन-द-स्पॉट क्विज प्रतियोगिता होगी। इसमें दोहों, साखियों और पदों का सही अर्थ बताने वालों को पुरस्कृत किया जाएगा। शाम को ‘रविदास जल कुंड’ में ‘मन चंगा तो कठौती में गंगा’ की वाणी पर सतरंगी लाइट और साउंड के साथ वॉटर स्क्रीन लेजर शो होगा। परिसर को मध्यप्रदेश का पहला जीरो-वेस्ट धार्मिक परिसर बनाने की भी योजना है।

बुंदेलखंड से बाहर भी संदेश पहुंचाने की तैयारी
संत रविदास लोक का उद्देश्य संत रविदास के विचारों और सामाजिक समरसता के संदेश को व्यापक स्तर पर पहुंचाना है। मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति की आबादी लगभग 15.6% है, जबकि बुंदेलखंड में यह 17 से 18% बताई गई है। परिसर के जरिए मध्यप्रदेश के साथ उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पंजाब में फैले संत रविदास के अनुयायियों तक भी संदेश पहुंचाने की तैयारी है।

पीएम मोदी ने किया था मंदिर का भूमिपूजन

मुख्यमंत्री मोहन यादव ने मंदिर निर्माण की प्रगति का जायजा लिया. वहीं उन्होंने मंदिर और संग्रहालय का मॉडल देखकर बन रहे भव्य मंदिर की जानकारी ली. बता दें कि पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने 2023 में संत रविदास जयंती के अवसर पर सागर में आयोजित एक कार्यक्रम में 100 करोड़ की लागत से संत रविदास के भव्य मंदिर और संग्रहालय के निर्माण का ऐलान किया था. रविदास मंदिर और संग्रहालय का भूमिपूजन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने किया था. मंदिर और संग्रहालय निर्माण कार्य अगस्त 2025 तक पूरा होने का लक्ष्य रखा गया है। 

कैसा होगा संत रविदास मंदिर और संग्रहालय
रविदास मंदिर और संग्रहालय के निर्माण कार्य पर केंद्र और राज्य सरकार द्वारा लगातार नजर रखी जा रही है. इस सिलसिले में केंद्र और राज्य सरकार के संस्कृति और धर्मस्व विभाग के अधिकारी लगातार दौरा करते रहते हैं और तय समय में मंदिर निर्माण होगा कि नहीं, इसकी प्रगति का जायजा लेते रहते हैं. सरकार ने संत रविदास की अनमोल विरासत को सहेजने और सुरक्षित रखने के साथ-साथ उनके संदेश और दर्शन को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए सागर में 100 करोड़ की लागत से संत रविदास मंदिर और संग्रहालय का निर्माण कार्य शुरू किया है। 

संत रविदास मंदिर का डिजाइन वास्तु कला के आधार पर

संत रविदास में आस्था रखने वाले और उनके दर्शन और साहित्य पर शोध करने वाले विद्वानों और भक्तों के लिए यह एक अनुपम सौगात होगी. मंदिर का डिजाइन वास्तु कला के आधार पर तैयार किया गया है. करीब 12 एकड़ भूमि में मंदिर का निर्माण किया जा रहा है. अध्योध्या के राम मंदिर में लगे राजस्थान के धोलपुर वंशीपहाड़पुर के लाल पत्थरों से संत रविदास मंदिर का निर्माण किया जा रहा है. संत रविदास मंदिर 66 फीट ऊंचा होगा. मंदिर के गर्भगृह में लोहे का उपयोग नहीं करके केवल पत्थर, रेत, गिटटी का उपयोग किया जा रहा है. मंदिर में अत्याधुनिक संसाधन के साथ-साथ मंदिर परिसर में विशेष रूप से पेड़ पौधे लगाकर हरियाली की जा रही है. रात में आकर्षक साज सज्जा के साथ रोशनी की भी व्यवस्था की जा रही है। 

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