अरुणाचल प्रदेश में चीन से Face-Off जारी, ITBP ने बढ़ाई निगरानी और सुरक्षा तैयारियां

 नई दिल्ली

भारत और चीन के बीच लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी एलएसी पर तनाव कोई नई बात नहीं है, लेकिन ITBP के महानिदेशक शत्रुजीत सिंह कपूर ने पहली बार सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया कि अरुणाचल प्रदेश के कई इलाकों में जुलाई से चीनी पीएलए सैनिकों के साथ आमने-सामने की स्थिति बनी हुई है। 

उन्होंने राजस्थान के अलवर में अपने जवानों को संबोधित करते हुए बताया कि असफिला जैसे क्षेत्रों में चीनी सैनिकों ने भारत की समझ वाली एलएसी से महज छह-सात किलोमीटर दूर तंबू लगा रखे हैं. यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उत्तरी सीमा पर बढ़ते तनाव की आधिकारिक स्वीकारोक्ति है, जो ब्रिक्स शिखर सम्मेलन और 1962 के युद्ध की सालगिरह के आसपास भी जारी रही। 

आईटीबीपी, जो 1962 में गठित हुई थी और लगभग 3488 किलोमीटर लंबी एलएसी की सुरक्षा करती है, अब इस स्थिति को सिर्फ पारंपरिक तरीकों से नहीं, बल्कि आधुनिक युद्धकौशल से निपटने की तैयारी कर रही है. महानिदेशक ने चीन को भारत का सबसे बड़ा विरोधी बताया और कहा कि पारंपरिक युद्ध के तरीके अब पुराने पड़ चुके हैं। 

यह पुष्टि इसलिए भी गंभीर मानी जा रही है क्योंकि इससे पहले आधिकारिक स्तर पर इतने स्पष्ट शब्दों में अरुणाचल में जारी फेस-ऑफ की बात नहीं कही गई थी. महानिदेशक ने शौर्य कमांडो प्लाटून की सराहना की, जिन्होंने इन आमने-सामने की स्थितियों में प्रभावी जवाब दिया. उन्होंने बताया कि शौर्य कमांडो अब हर बॉर्डर बटालियन में होंगे और आईटीबीपी को एक अलग पहचान देंगे। 

ये कमांडो गलवान जैसी स्थितियों के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित हैं, जहां 2020 में चीनी सैनिकों ने पत्थर, नाखून लगे डंडे और लोहे की छड़ों से हमला किया था, जिसमें भारत के 20 जवान शहीद हुए थे. चीन ने बाद में सिर्फ चार मौतों की बात कही थी, लेकिन कई रिपोर्टों में चीनी पक्ष के नुकसान को ज्यादा बताया गया था. अब आईटीबीपी इन सब सबकों को ध्यान में रखकर अपनी रणनीति बदल रहा है। 

ड्रोन युद्ध और आधुनिकीकरण की नई दिशा
आईटीबीपी महानिदेशक ने यूक्रेन-रूस युद्ध और ईरान-अमेरिका संघर्ष का उदाहरण देते हुए बताया कि आज के समय में ड्रोन और एंटी-ड्रोन तकनीक कितनी महत्वपूर्ण हो गई है. उन्होंने कहा कि रूस जैसा बड़ा देश और महाशक्ति भी यूक्रेन के खिलाफ लड़ते हुए हर महीने दस से पंद्रह हजार सैनिक खो रहा है। 

यह चौथे साल भी जारी है, जबकि रूस सोचता था कि एक-दो महीने में काम हो जाएगा. इसी तरह ईरान ने बिना पारंपरिक वायुसेना, नौसेना या सेना के अमेरिकी महाशक्ति को चुनौती दी. इन उदाहरणों से साफ है कि पारंपरिक सेनाओं की भूमिका बदल चुकी है. महानिदेशक ने जोर देकर कहा कि ड्रोन अब चुनौती भी हैं और अवसर भी। 

चीन ने अपनी पीएलए को बत आधुनिक बना लिया है और भारी निवेश किया है, इसलिए पारंपरिक तरीकों से मुकाबला मुश्किल है. लेकिन ड्रोन ऐसी तकनीक है जिससे छोटा देश भी बड़े देश को मुंहतोड़ जवाब दे सकता है.इसी सोच के साथ आईटीबीपी ने हर सीमा सुरक्षा बटालियन में ड्रोन प्लाटून तैयार कर ली है। 

लगभग 95,000 कर्मियों वाली यह बल पहाड़ी युद्ध में प्रशिक्षित है. सरकार से मिले 400 करोड़ रुपये के फंड में से 70 प्रतिशत हिस्सा ड्रोन युद्ध क्षमताओं को बढ़ाने में लगाया जा रहा है. होम मिनिस्ट्री ने सिद्धांत रूप में 4000 करोड़ रुपये की बड़ी आधुनिकीकरण योजना को मंजूरी दी है, जिसमें से 1000 करोड़ रुपये सिर्फ ड्रोन और एंटी-ड्रोन सिस्टम के लिए रखे जाएंगे. ITBP अब खुद ड्रोन बना रहा है ताकि बाहरी आपूर्तिकर्ताओं पर निर्भरता कम हो।  

ड्रोन पायलटों की ट्रेनिंग भी जोर-शोर से चल रही है. यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आधुनिक युद्ध में हवा से निगरानी, हमला और बचाव तीनों में ड्रोन की भूमिका बढ़ गई है. अरुणाचल जैसे दुर्गम इलाकों में जहां सड़कें कम हैं और मौसम कठोर है, ड्रोन से तुरंत जानकारी मिल सकती है और जवाबी कार्रवाई तेज हो सकती है। 

स्ट्राइक कोर्स और शौर्य कमांडो: गलवान जैसी स्थितियों की तैयारी
आईटीबीपी ने ‘स्ट्राइक’ नाम का एक नया कोर्स तैयार किया है, जो गलवान जैसी स्थितियों से निपटने के लिए बनाया गया है. अब तक करीब दस हजार जवानों को यह ट्रेनिंग दी जा चुकी है और 330 मास्टर ट्रेनर तैयार किए गए हैं. पूरा बल 2027 के अंत तक इस ट्रेनिंग से गुजरेगा. यह कोर्स सिर्फ शारीरिक ताकत नहीं, बल्कि मानसिक तैयारियों, क्लोज कॉम्बैट और आधुनिक हथियारों के इस्तेमाल पर जोर देता है। 

इसके अलावा शौर्य कमांडो टीम बनाई गई है, जिसने अरुणाचल में जारी फेस-ऑफ के दौरान अपनी क्षमता दिखाई. ये कमांडो हर बॉर्डर बटालियन में तैनात होंगे. महानिदेशक ने कहा कि चीन मोर्चा सबसे कठिन सीमा है और वहां पारंपरिक तरीकों से काम नहीं चलेगा. इसलिए आईटीबीपी को विशेष हाई-एल्टीट्यूड मांउटेन लड़ाकू बल बनाने की योजना बनाई गई है। 

पुराने हथियारों को भी बदला जा रहा है, जिनमें से कुछ पचास साल पुराने हैं. नई ऑल-ट्रेन वाहन, ग्राउंड वाहन और क्विक रिएक्शन वाहन खरीदे जा रहे हैं ताकि दुर्गम इलाकों में तेजी से पहुंच बनाई जा सके. ‘कोल्ड स्टार्ट किट’ दी गई है, जिससे बर्फीले मौसम में वाहन एक क्रैंक में चालू हो जाते हैं. यह अनुभव कोसोवो मिशन से लिया गया था, जहां सब-जीरो तापमान में वाहन आसानी से स्टार्ट होते थे। 

भूमिगत बंकर और जवानों की सुविधाएं: नए युद्ध की जरूरत
आधुनिक युद्ध में ऊपर की इमारतें आसान लक्ष्य बन जाती हैं. इसलिए आईटीबीपी भूमिगत शेल्टर यानी बंकर बड़े पैमाने पर बना रहा है. पायलट प्रोजेक्ट चल रहा है और आने वाले वर्षों में इन भूमिगत आश्रयों में ऊपर वाली इमारतों जैसी सुविधाएं होंगी. यह सबक पाकिस्तान के साथ ऑपरेशन सिंदूर जैसे संघर्षों से भी लिया गया है। 

जवानों की सुविधाओं पर भी ध्यान दिया जा रहा है. सब-जीरो तापमान वाले इलाकों में 383 बैरकों में से 342 को इंसुलेट किया गया है. 141 जनरेटर सेट लगाए गए हैं ताकि दूरदराज के पोस्ट पर बिजली रहे. सोलर वॉटर हीटर भी लगाए गए हैं. नई डाइट प्लान शुरू की गई है, जिसमें चीनी और तेल की मात्रा कम की गई है. जवानों से फिट रहने को कहा गया है। 

महानिदेशक ने चिंता जताई कि 2020 के बाद अल्कोहल डिपेंडेंस सिंड्रोम के मामले दोगुने-तिगुने हो गए हैं. उन्होंने जवानों को सतर्क रहने और सोशल मीडिया के जरिए हनी ट्रैप से बचने की सलाह दी, जिसमें कोई संवेदनशील जानकारी शेयर करने के लिए फुसला सकता है. ये सभी कदम जवानों का मनोबल बढ़ाने और ऑपरेशनल तैयारियों को मजबूत करने के लिए हैं। 

रणनीतिक महत्व और भविष्य की राह
अरुणाचल प्रदेश में जारी फेस-ऑफ और आईटीबीपी की ये तैयारियां भारत-चीन संबंधों के बड़े संदर्भ में देखी जानी चाहिए. 2020 के गलवान संघर्ष के बाद दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत हुई, लेकिन सीमा पर तनाव पूरी तरह खत्म नहीं हुआ. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान भी ये तनाव जारी रहे, जो दिखाता है कि कूटनीतिक स्तर पर दोस्ती की बातें होने के बावजूद जमीन पर स्थिति अलग हो सकती है। 

आईटीबीपी का आधुनिकीकरण इस बात का संकेत है कि भारत अब सिर्फ रक्षात्मक रुख नहीं अपना रहा, बल्कि भविष्य के युद्ध के लिए तैयार हो रहा है. ड्रोन, भूमिगत बंकर, विशेष कमांडो और आधुनिक ट्रेनिंग से आईटीबीपी चीन जैसे शक्तिशाली पड़ोसी के खिलाफ बेहतर स्थिति में आ रहा है। 

यह पूरा मामला सिर्फ सैन्य तैयारियों का नहीं, बल्कि भू-राजनीतिक संदेश का भी है. भारत यह दिखा रहा है कि वह अपनी सीमाओं की रक्षा के लिए किसी भी स्तर की तैयारी करने को तैयार है. महानिदेशक शत्रुजीत कपूर, जो 31 अक्टूबर को रिटायर होने वाले हैं, ने अपने अंतिम दिनों में इन बड़े ऐलानों से आईटीबीपी को नई दिशा दी है। 

बल का 65वां स्थापना दिवस 24 अक्टूबर को मनाया जा रहा है और इन तैयारियों से आईटीबीपी भविष्य में और मजबूत नजर आएगा. अरुणाचल जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में तनाव जारी रहने से साफ है कि सीमा विवाद अभी भी जटिल है और निरंतर सतर्कता की जरूरत है. आईटीबीपी की ये कोशिशें न सिर्फ जवानों की सुरक्षा बढ़ाएंगी, बल्कि देश की उत्तरी सीमा को अधिक सुरक्षित बनाएंगी। 

जयराम रमेश ने कसा तंज
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने चीन से हो रही झड़पों के लेकर सरकार पर निशाना साधा. उ्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश में जुलाई से चीनी पीएलए के साथ आमने-सामने की स्थिति जारी है. आईटीबीपी महानिदेशक ने इसकी पुष्टि की और जवानों की सराहना की, लेकिन प्रधानमंत्री और सरकार की चुप्पी सवाल खड़े करती है. तकसिंग फेस-ऑफ के बाद वाचा-दमाई में वार्ता हुई, फिर भी स्थानीय लोगों के अनुसार गश्त बिंदु फिर खो गए। 

चीन अरुणाचल के स्थानों के नाम बदल रहा है और ब्रह्मपुत्र पर 60,000 मेगावाट का बांध बना रहा है, जो जल व पर्यावरण सुरक्षा के लिए खतरा है. व्यापार घाटा 2025-26 में 112 अरब डॉलर पहुंच गया, जिससे एमएसएमई प्रभावित हो रहे हैं और ‘मेक इन इंडिया’ कमजोर पड़ता दिख रहा है। 

 

More From Author

स्लीपर वंदेभारत का संभावित रूट, टाइमिंग और कोच की पूरी जानकारी

सरकारी वकीलों की ड्राफ्टिंग पर हाईकोर्ट की टिप्पणी, AG-डिप्टी AG से पूछा सवाल

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 14099/197

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.