LPG की किल्लत से पाकिस्तान में हाहाकार, खाना कम करने को मजबूर लोग

कराची 

पाकिस्तान का दुख खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. लंबे समय से आर्थिक संकट से जूझते देश पर कर्ज का बोझ बढ़ता जा रहा है, तो वहीं सबसे बड़ा संकट एलपीजी का खड़ा हो गया है, ईरानी बॉर्डर से सप्लाई ठप होने के चलते पाकिस्तान में एलपीजी की कीमतें आसमान पर पहुंच गई हैं और इसका बुरा असर देश के रिक्शा चालकों पर पड़ा है, जिन्हें अपने खाने तक में कटौती करने को मजबूर होना पड़ रहा है. खासतौर पर लाहौर में बुरा हाल है, जहां ज्यादातर रिक्शा एलपीजी से ही चलते हैं। 

पाकिस्तान में गैस संकट का ईरान कनेक्शन
पाकिस्तान में नए सिरे से पैदा हुए इस एलपीजी संकट का सीधा कनेक्शन ईरान से जुड़ा हुआ है. दरअसल, ईरान बॉर्डर का बंद होना Pakistan की शहबाज शरीफ सरकार लिए अब बेहद महंगा पड़ रहा है. दरअसल, सीमा बंद होने से ईरान से पाकिस्तान आने वाले LPG टैंकर समेत अन्य सामनों से भरे ट्रक फंसे रह गए और गैस की कमी के चलते देश में LPG Cylinder Price रॉकेट की रफ्तार से बढ़ते जा रहे हैं. पाकिस्तान LPG एसोसिएशन का कहना है कि पहले ईरान से रोजाना लगभग 7,000 मीट्रिक टन LPG पाकिस्तान में आती थी और ये आयात पर बंद है। 

12Kg एलपीजी सिलेंडर 7000 रुपये का 
पाकिस्तानी ट्रेडर्स का कहना है कि बीते 17 अक्टूबर से LPG की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं, क्योंकि ईरान के दो बॉर्डर क्रॉसिंग बंद हो गए थे, जिससे एलपीजी इंपोर्ट रुक गया था. यह फरवरी में US-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से सबसे नया और बड़ा एनर्जी शॉक है. पाकिस्तानी व्यापारियों ने बताया कि बॉर्डर बंद होने के कुछ ही दिनों में 12 kg के सिलेंडर की कीमत 56% बढ़कर 7,000 पाकिस्तानी रुपये हो गई है. खुले बाजार में एलपीजी लगभग 583 रुपये प्रति किलो मिल रही है। 

रिक्शा चालकों खाना कम करने को मजबूर 
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एलपीजी संकट से खड़ी हो रही परेशानी के बारे में बताते हुए बीते 13 साल से पूर्वी पाकिस्तान के लाहौर में तीन पहियों वाला मोटराइज्ड रिक्शा चलाने वाले राशिद अली बताते हैं कि उनका दिन सुबह 6 बजे शुरू होता है और कभी-कभी आधी रात तक खत्म नहीं होता, लेकिन वे लंबे समय तक हर दिन 6.50 डॉलर (करीब 1800 पाकिस्तानी रुपये) कमा लेते थे, जो उनके परिवार की बुनियादी जरूरतों के लिए काफी थे. लेकिन अब LPG की कीमतें बढ़ने से वे इसका आधा भी नहीं कमा पा रहे. 33 साल के अली उन हजारों पाकिस्तानी रिक्शा ड्राइवरों में से एक हैं, जो अपनी गाड़ियां खाना पकाने लिए इस्तेमाल होने वाली LPG से चलाते हैं। 

अली का कहना है कि अब उसे हर दिन $3 मिल पाते हैं, इसलिए उसके परिवार ने खाना कम कर दिया है. उन्होंने कहा कि LPG महंगी होने से गुजारा करना मुमकिन नहीं है. उन्होंने कहा कि उनकी समस्याओं में यह भी शामिल है कि गैस महंगी होने के बाद भी यात्री अधिक किराया नहीं देना चाहते. अली के मुताबिक, जिस ट्रिप का खर्च 200 या 250 रुपये होना चाहिए, उसके लिए वे सिर्फ 80, 100 या मैक्सिमम 150 रुपये ही दे रहे हैं। 

'गरीबों के फ्यूल' पर चोट, यात्री परेशान
अवामी रिक्शा यूनियन के चेयरमैन मजीद गौरी एलपीजी को 'गरीबों का फ्यूल' कहते हैं. उनका कहना है कि यूनियम में 43,000 ऑटो-रिक्शा हैं और इनमें से लगभग 70% और लगभग 8,000 किंगकी (थ्री-व्हीलर हैं), जो LPG से चलते हैं. जहां रिक्शा चालतों पर एलपीजी महंगाई का बम फूटा है, तो यात्रियों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. रॉयटर्स की रिपोर्ट में एक स्थानीय यात्री मोहम्मद रमजान के हवाले से बताया गया कि जब एक ड्राइवर ने शहर में राइड के लिए 500 रुपये मांगे, तो उसने आधे पैसे देने की पेशकश की, इसके बाद ड्राइवर ने जाने से साफ मना कर दिया। 

एक साथ पाकिस्तान पर कई संकट
Pakistan LPG Crisis देश में अकेली मुसीबत नहीं है, बल्कि एक से बढ़कर एक संकट पाकिस्तान का तेल निकाल रहा है. जहां अक्टूबर महीने में पाकिस्तान में महंगाई दर उछलकर 9.6% तक पहुंच गई, तो वहीं पाकिस्तान के सेंट्रल बैंक ने पिछले हफ्ते ही एनर्जी और गेहूं की कीमतों का हवाला देते हुए ब्याज दरें बढ़ाकर 12% कर दीं. पेट्रोल-हाई स्पीड डीजल की कीमतें पहले ही अमेरिका-ईरान युद्ध के चलते 40% ज्यादा हो चुकी हैं। 

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