कोरोना के नए वेरिएंट ने बढ़ाई टेंशन, प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग में सतर्कता बढ़ गई

भोपाल

कोरोना वायरस के नए वेरिएंट ने देशभर के साथ साथ मध्य प्रदेश में भी आम लोगों की चिंता बढ़ा दी है। राज्य में अबतक कोरोना के इस नए वेरिएंट के 6 संक्रमित एक्टिव हैं। चिंता की एक और बात ये भी है कि, लगातार सामने आ रहे संक्रमितों के बावजूद प्रदेश के बड़े शहरों में ही कोरोना से लड़ने की तैयारियां सुस्त हैं। बात राजधानी भोपाल की करें तो सिर्फ एम्स में ही RTPCR टेस्ट की सुविधा उपलब्ध है। खास बात ये भी है कि, 6 संक्रमितों की पुष्टि हो चुकी है, बावजूद इसके अबतक कोविड को लेकर कोई गाइडलाइन जारी नहीं की गई है।

कोरोना के नए वेरिएंट ने टेंशन बढ़ा दी है। प्रदेश में कोरोना के 6 एक्टिव मरीज है। एमपी के बड़े शहरों में कोविड से लड़ने की तैयारियां फिलहाल धीमी चल रही है। राजधानी भोपाल में सिर्फ एम्स में RTPCR टेस्ट की सुविधा है। अभी तक कोविड को लेकर कोई गाइडलाइन जारी नहीं हुई है। भारत में 1 हजार से ज्यादा एक्टिव केस है। इनमें सबसे ज्यादा केस केरल से सामने आए है। महाराष्ट्र में भी 200 से अधिक संक्रमित पाए गए है। वहीं मध्य प्रदेश की बात करें तो यहां 6 एक्टिव मरीज है। इनमें इंदौर में 5 और उज्जैन में एक केस मिला है।

एम्स में RTPCR टेस्ट की सुविधा

एमपी के बड़े शहरों में कोविड से लड़ने की तैयारियां फिलहाल धीमी है। राजधानी में सिर्फ एम्स में RTPCR टेस्ट की सुविधा है। भोपाल के सरकारी अस्पतालों को संदिग्ध कोरोना मरीजों की जांच का आदेश मिलने का इंतजार है। कोविड को लेकर अभी कोई गाइडलाइन जारी नहीं हुई है। हालांकि स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि कोरोना के इस नए वेरिएंट से घबराने की जरूरत नहीं है। लोगों को ज्यादा से ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है।

 देश में एक बार फिर कोरोना के मामले बढ़ते जा रहे है। देशभर में कोरोना संकर्मितों की कुल संख्या 1 हजार 9 हो गई है। केरल, महाराष्ट्र और दिल्ली सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में शामिल हैं। सबसे ज्यादा केस केरल से सामने आए हैं। इसके बाद महाराष्ट्र में 200 से अधिक संक्रमित मिल चुक हैं, जबकि दिल्ली में संक्रमितों की संख्या तीसरे पायदान पर है। वहीं, मध्य प्रदेश की बात करें तो यहां अबतक कोरोना के 6 संक्रमितों की पुष्टि हो चुकी है। इनमें भी पांच संक्रमित इंदौर में सामने आए हैं, जबकि एक उज्जैन में मिला है।

आदेश का इंतजार कर रहे अस्पताल
एमपी के बड़े शहरों में कोविड से लड़ने की तैयारियां फिलहाल धीमी है। राजधानी में सिर्फ एम्स में RTPCR टेस्ट की सुविधा है। भोपाल के सरकारी अस्पतालों को संदिग्ध कोरोना मरीजों की जांच का आदेश मिलने का इंतजार है। कोविड को लेकर अभी कोई गाइडलाइन जारी नहीं की गई है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि कोरोना के इस नए वेरिएंट से घबराने की जरूरत नहीं है। लोगों को ज्यादा से ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है।

कोरोना के वैरिएंट बदले हैं तो क्या वैक्सीन भी बदली है?

कोविड-19 को शुरू हुए अब पांच साल हो चुके हैं, लेकिन वायरस खत्म नहीं हुआ है. यह हर साल नया रूप लेकर लौटता है. कभी डेल्टा, कभी ओमिक्रॉन और अब NB.1.8.1 और LF.7 जैसे नए वेरिएंट. कई लोग नए वायरस से बचने के लिए वैक्सीन की बूस्टर डोज को लेकर चर्चा कर रहे हैं. ऐसे में एक बड़ा सवाल उठता है- क्या कोविड वैक्सीन भी बदली है? और अगर हां, तो कितनी असरदार है- ये बदली हुई वैक्सीन? अमेरिका की येल यूनिवर्सिटी की रिसर्च इस सवाल का जवाब देती है.

दरअसल, कोरोना फिर दुनिया को डरा रहा है. मरीजों की संख्या बढ़ रही है. अस्पतालों पर भी दबाव बढ़ रहा है. हांगकांग और सिंगापुर से शुरू हुआ इस बार का वायरस भारत-अमेरिका समेत कई अन्य देशों में ना सिर्फ बढ़ रहा है, बल्कि लोगों की मौत के भी मामले सामने आ रहे हैं. नए वेरिएंट NB.1.8.1 और LF.7 की एंट्री ने पूरी दुनिया को चौकन्ना कर दिया है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने NB.1.8 और LF.7 को फिलहाल 'Variants Under Monitoring' की कैटेगिरी में रखा है. हालांकि ये 'Variants of Concern' या 'Variants of Interest' नहीं हैं, लेकिन चीन और एशिया के कुछ हिस्सों में कोविड मामलों में हो रही वृद्धि के पीछे इन्हीं वेरिएंट्स का हाथ माना जा रहा है. भारत में अभी सबसे ज्यादा प्रचलित वेरिएंट JN.1 है, जो सभी टेस्ट किए गए सैंपलों में 53 प्रतिशत है. इसके बाद BA.2 (26%) और अन्य ओमिक्रॉन सब वेरिएंट्स (20%) हैं.

Yale University की रिसर्च के मुताबिक, अच्छी खबर यह है कि 2022 से हर साल अपडेट किए जाने वाले टीके अभी भी कोविड से गंभीर बीमारी, अस्पताल में भर्ती होने और मृत्यु को रोकने में प्रभावी माने जा रहे हैं. रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) के अनुसार, शिशुओं और बच्चों (छह महीने और उससे ज्यादा उम्र) और वयस्कों को टीका लगाया जा सकता है. चूंकि, SARS-CoV-2 वायरस में परिवर्तन हो रहा है और इसके नए-नए वेरिएंट सामने आ रहे हैं, इसलिए यह जानना महत्वपूर्ण है कि अपडेटेड टीके कितना अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं.

क्या कोविड वैक्सीन बदली है?

Yale की रिपोर्ट के मुताबिक, कोविड वैक्सीन हर साल अपडेट हो रही है. ठीक वैसे ही जैसे फ्लू की वैक्सीन हर साल नए वेरिएंट्स के मुताबिक बदली जाती है.

2020-21: पहली बार mRNA वैक्सीन (फाइजर और मोडेर्ना) आई, जो मूल वुहान वायरस को टार्गेट करती थी.

2022: वैक्सीन को बाइवेलेंट रूप में अपडेट किया गया. मूल वायरस + ओमिक्रॉन BA.4/BA.5 वेरिएंट

2023: मोनोवेलेंट वैक्सीन आई. सिर्फ ओमिक्रॉन XBB के लिए.

2024-2025: लेटेस्ट वैक्सीन KP.2 वेरिएंट को ध्यान में रखकर तैयार की गई है.

येल यूनिवर्सिटी की संक्रामक रोग विशेषज्ञ डॉ. स्कॉट रॉबर्ट्स के अनुसार, हर नई वैक्सीन वायरस के बदले वेरिएंट से लड़ने के लिए डिजाइन की गई है. यह गंभीर बीमारी, अस्पताल में भर्ती और मौत को रोकने में कारगर है.

क्या नई वैक्सीन पुराने वैरिएंट्स पर भी असर करती है?

जी हां, वैक्सीन पूरी तरह संक्रमण को रोक नहीं सकती, लेकिन गंभीर लक्षणों और लॉन्ग कोविड के खतरे को काफी हद तक कम करती है. येल मेडिसिन के अनुसार, वैक्सीनेशन के बाद अगर संक्रमण होता भी है तो लक्षण हल्के होते हैं और रिकवरी तेज होती है.

कौन-कौन सी नई वैक्सीन उपलब्ध हैं?

1. फाइजर-बायोएनटेक (Comirnaty)

– mRNA वैक्सीन
– 6 महीने से ऊपर सभी उम्र के लिए
– 2024-25 वैरिएंट (KP.2) के अनुसार अपडेटेड
– 65+ के लिए दो डोज दिए जाने की एडवाइज

2. मोडेर्ना (Spikevax)

– mRNA वैक्सीन
– सभी आयु वर्ग के लिए उपलब्ध
– फाइजर जैसी ही सिफारिशें

3. नोवावैक्स (Nuvaxovid)

– गैर-mRNA वैक्सीन, प्रोटीन-बेस्ड
– सिर्फ 65+ या हाई-रिस्क ग्रुप के लोगों के लिए
– यह JN.1 वेरिएंट के लिए बनी है लेकिन अन्य वेरिएंट्स पर भी असरदार मानी जाती है.

क्या इन वैक्सीन से साइड इफेक्ट हो सकते हैं?

हां, लेकिन सामान्य और अस्थायी होते हैं. यदि कोई भी दुष्प्रभाव होता है तो उसे कुछ दिनों में ठीक हो जाना चाहिए.

– इंजेक्शन साइट पर दर्द या लालिमा
– थकान, सिरदर्द, बुखार
– mRNA वैक्सीन में दुर्लभ मामलों में मायोकार्डाइटिस देखी गई है, खासकर युवाओं में.
– नोवावैक्स से गंभीर एलर्जी की संभावना बहुत कम

CDC और FDA ने सभी वैक्सीन को सुरक्षित और असरदार माना है.

येल यूनिवर्सिटी की मुख्य सिफारिशें क्या हैं?

– अपडेटेड वैक्सीन लें. खासकर यदि आप 65+ हैं या किसी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं.
– बूस्टर डोज जरूरी है, क्योंकि समय के साथ एंटीबॉडीज कमजोर होती हैं.
– टीका लगवाने के बावजूद संक्रमण हो सकता है, लेकिन गंभीर रूप नहीं लेता.

वैक्सीन बदली है और इसकी जरूरत भी है

कोरोना वायरस बदला है, इसलिए वैक्सीन को भी बदलना पड़ा. येल यूनिवर्सिटी की रिसर्च साफ कहती है- अपडेटेड वैक्सीन अभी भी हमारे सबसे असरदार हथियारों में से एक है. इससे ना सिर्फ गंभीर बीमारी से बचाव होता है, बल्कि लॉन्ग कोविड जैसी जटिलताओं का जोखिम भी घटता है.

 

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