खुशी कूलवाल के आत्महत्या केस की फाइल दोबारा खुली, महालक्ष्मीनगर के होराइजन ओएसिस पार्क में लगाई थी फांसी

 इंदौर

इंदौर में एक समय के सबसे चर्चित और हाईप्रोफाइल सुसाइड केस खुशी कूलवाल की फाइल फिर से ओपन हो गई है। यह खबर ही अपने आप में इंदौर के कुछ नेताओं, कारोबारियों और अधिकारियों के लिए बेचैन करने वाली है। उस समय भी कई नामों की जांच हो रही थी लेकिन मामला दबा दिया गया।

कैसे खुली फाइल

    कूलवाल ने 37 साल की उम्र में जुलाई 2018 में होराइजन ओएसिस पार्क महालक्ष्मीनगर में अपने फ्लैट में सुसाइड कर लिया था। बड़े कारोबारी मयंक से तलाक लेने के बाद वह अलग रहने लगी थी। मामले को तब दबा दिया गया था। कांग्रेस के एक पूर्व मंत्री के भाई का नाम इसमें आने से मामला उस समय रोक दिया था लेकिन अब उसी नाम के कारण फिर से जांच शुरू हो रही है। डीसीपी जोन टू अभिनय विश्वकर्मा ने कहा है कि केस डायरी बुलाकर फिर से जांच शुरू की गई है।

ड्रग पैडलर के साथ था मंत्री के भाई का संबंध

दरअसल पुलिस को हाल ही में जानकारी मिली है कि ड्रग पैडलर सोहन उर्फ जोजो से पूर्व मंत्री का भाई जुड़ा था, जो कूलवाल से लिंक था। जोजो पर विजयनगर में साल 2020 में ड्रग केस दर्ज हुआ, इस दौरान मेमोरेंडम में पूर्व मंत्री के इस भाई का नाम आया था, लेकिन तत्कालीन टीआई ने इसमें कोई एक्शन नहीं लिया। अब इस पूरे केस को रिओपन किया जा रहा है।

बाहर भी लेकर गए थे खुशी को कारोबारी

खुशी को कुछ लोगों ने मिलकर ड्रग्स की आदत लगवा दी थी। वह करीबी मयूरी के जरिए ड्रग्स मंगवाती थी। देर रात तक वह शराब और ड्रग्स पार्टी करने लगी थी। हाईप्रोफाइल लोग खुशी को जगह-जगह पार्टियों में बुलाने लगे थे और एक बार इंदौर से बाहर भी साथ लेकर गए थे। पुलिस ने उसकी सुसाइड के बाद जिम ट्रेनर प्रकाश, दोस्त कमलेश, पवन यादव, ट्रैवल एजेंट अरविंद सिंह, मित्र राहुल पाटनवाला के बयान लिए लेकिन फिर जांच को दबा दिया गया।

खुशी के मोबाइल में कई राज

खुशी के मोबाइल में कई राज दफन हैं, जो पुलिस ने काफी जाहिर नहीं किए। इसमें कई बड़े नेताओं के साथ ही हाईप्रोफाइल बड़े लोगों के साथ लगातार फोन कॉल की बात थी। तब एक सीनियर आईएएस अधिकारी का भी नाम इसमें आया था कि उनसे भी खुशी की बात लगातार होती है, लेकिन औपचारिक जानकारी कभी पुलिस ने नहीं दी।

क्या है पूरा मामला?

37 वर्षीय खुशी कूलवाल ने जुलाई 2018 में होराइजन ओएसिस पार्क महालक्ष्मीनगर के फ्लैट में फांसी लगाकर खुदकुशी कर ली थी। बैकुंठधाम कालोनी पलासिया निवासी बड़े कारोबारी मयंक से तलाक लेने के बाद खुशी इस फ्लैट में रहने आ गई थी। आत्महत्या के पूर्व वह बिजलपुर निवासी दोस्त राहुल पाटनवाला के साथ थी। खुशी के फांसी लगा लेने पर राहुल फ्लैट से भाग गया था। इस बहुचर्चित आत्महत्या मामले में कांग्रेस के पूर्व विधायक के भाई से कनेक्शन जुड़ने के कारण तत्कालीन पुलिस अफसरों ने मामला दबा दिया था। पूर्व विधायक का भाई खुशी के साथ ड्रग्स पार्टी करता था। धोखाधड़ी में नाम आने के बाद जोन-2 के डीसीपी अभिनय विश्वकर्मा ने शनिवार को केस डायरी बुलाकर दोबारा जांच शुरू कर दी। केस की निष्पक्ष जांच हुई तो पब-होटल, रेस्त्रां और विदेश में पार्टियों के शौकीन कारोबारी, नेता और अफसर नप सकते हैं।
पब में ड्रग्स पार्टी करती थी खुशी

खुशी कूलवाल पिपल्याहाना क्षेत्र में रहने वाली मयूरी के माध्यम से ड्रग्स मंगवाती थी। वह देर रात पबों में शराब और ड्रग्स की पार्टियों की शौकीन थी। हाईप्रोफाइल लोग खुशी को बुलाते थे। घटना के कुछ दिनों पूर्व यशवंत क्लब से जुड़े कारोबारी उसे गोवा भी ले गए थे। पुलिस ने उस वक्त जिम ट्रेनर प्रकाश, दोस्त कमलेश, पवन यादव, ट्रैवल एजेंट अरविंद सिंह, दोस्त राहुल पाटनवाला के बयान लिए, मगर रसूखदारों की जांच दबा दी। खुशी के तीन मोबाइल भी जांच में शामिल किए, मगर अफसरों ने कहा- उसमें सुसाइड नोट नहीं मिला है।

कांग्रेस के पूर्व विधायक के भाई के इर्द-गिर्द घूम रही जांच

सात साल पुराने केस की जांच कांग्रेस के पूर्व विधायक के भाई के इर्द गिर्द घूम रही है। ड्रग्स पैडलर सोहन उर्फ जोजो(सेंधवा) से जुड़ा पूर्व विधायक का भाई खुशी के संपर्क में था। उसके नंबर मोबाइल से डिलिट करवा दिए गए थे। जांच में शामिल अफसर के मुताबिक जोजो पर साल 2020 में विजयनगर थाना ड्रग्स (एमडी) का प्रकरण दर्ज हुआ था। सोहन ने पूर्व विधायक के भाई का नाम ले लिया था। मेमोरेंडम में नाम आने के बाद भी तत्कालीन टीआइ तहजीब काजी ने गिरफ्तारी नहीं की। दिसंबर 2020 का ड्रग्स कांड भी री-ओपन कर दिया जाएगा।

बड़े बिल्डर व कारोबारी पार्टी में ही खरीदते थे ड्रग्स, बदले में महंगे गिफ्ट मिलते थे: 

पुलिस को यह भी पता चला है कि यशवंत क्लब के कई हाई-प्रोफाइल लोगों के संपर्क में रहने के साथ खुशी ने कुछ युवा बिल्डरों से भी नजदीकियां बढ़ा रखी थी। वह पार्टी में ड्रग्स का नशा करने लगी थी। यह लत उसे मयूरी नामक युवती ने लगाई थी। खुशी को बंटी उर्फ राज नामक युवक ड्रग्स सप्लाय करता था। बंटी का आपराधिक रिकॉर्ड है। उसे पूर्व में कनाड़िया पुलिस एनडीपीएस में पकड़ चुकी है। खुशी इससे ड्रग्स लेने के बाद पार्टियों में महंगे दाम में उसे बेचने भी लगी थी। उससे ड्रग्स भी कई बड़े बिल्डर व कारोबारी पार्टी में ही खरीदते थे और बदले में उसे महंगे गिफ्ट मिलते थे। इसी से वह हाईप्रोफाइल लाइफ को मेनटेन कर रही थी। हालही में वह विजय नगर क्षेत्र की एक होटल के मालिक और विधायक के भाई के भी संपर्क में थी।

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