क्या बांग्लादेश चीन को दे रहा है भारत के ‘चिकन नेक’ के पास एयरबेस? संसद में सामने आई हकीकत

नई दिल्ली
पिछले दिनों बांग्लादेश के लालमोनिरहाट जिले में एक पुराने एयरबेस को फिर से सक्रिय करने की खबरें सामने आई थीं। कहा जा रहा है कि बांग्लादेश ने चीन के साथ मिलकर इस संवेदनशील इलाके में एयरबेस शुरू करने की योजना बनाई है। अब इस मसले पर भारत सरकार का रिएक्शन सामने आया है। भारत ने बांग्लादेश सरकार के हालिया बयान का हवाला देते हुए कहा है कि लालमोनिरहाट हवाई अड्डे को वर्तमान में सैन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग करने की कोई योजना नहीं है। एक लिखित सवाल के जवाब में विदेश राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने संसद में ये जानकारी दी।

प्रश्न में सांसद कौशलेंद्र कुमार ने पूछा था कि क्या बांग्लादेश ने चीन को लालमोनिरहाट हवाई अड्डे पर संचालन फिर से शुरू करने की अनुमति दी है, और यदि हां, तो क्या इससे भारत की सुरक्षा को कोई खतरा हो सकता है। साथ ही, यह भी पूछा गया कि क्या भारत सरकार ने इस संबंध में बांग्लादेश के साथ कोई आपत्ति जताई है या नहीं। मंत्री ने जवाब में कहा कि भारत सरकार ने बांग्लादेश के लालमोनिरहाट हवाई अड्डे को लेकर मीडिया रिपोर्ट्स और 26 मई 2025 को बांग्लादेश सेना के सैन्य संचालन निदेशक द्वारा दिए गए प्रेस ब्रीफिंग पर ध्यान दिया है। ब्रीफिंग में स्पष्ट किया गया कि वर्तमान में लालमोनिरहाट हवाई अड्डे को सैन्य उद्देश्यों के लिए उपयोग करने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने आगे कहा कि भारत सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित सभी घटनाक्रम पर नजर रख रही है और इसकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक कदम उठा रही है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हुआ कि भारत ने बांग्लादेश के साथ इस मुद्दे पर औपचारिक आपत्ति दर्ज की है या नहीं।

भारत के लिए बहुत संवेदनशील है यह जगह
यह एयरबेस भारत के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी कॉरिडोर, जिसे 'चिकन नेक' के नाम से जाना जाता है, के बेहद करीब है। इस घटनाक्रम ने भारत की सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है, क्योंकि यह क्षेत्र भारत की मुख्य भूमि को पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ने वाला एकमात्र संकरा गलियारा है।

लालमोनिरहाट एयरबेस और उसका रणनीतिक महत्व
लालमोनिरहाट एयरबेस बांग्लादेश के रंगपुर डिवीजन में स्थित है और यह भारत-बांग्लादेश सीमा से मात्र 12-20 किलोमीटर और सिलीगुड़ी कॉरिडोर से लगभग 135 किलोमीटर दूर है। यह एयरबेस 1931 में अंग्रेजों द्वारा बनाया गया था और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मित्र देशों की सेनाओं के लिए महत्वपूर्ण रहा। वर्तमान में यह बांग्लादेश वायुसेना के नियंत्रण में है, लेकिन कई दशकों से निष्क्रिय पड़ा है। हाल की रिपोर्ट्स के मुताबिक, बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के प्रमुख सलाहकार मोहम्मद यूनुस ने इस एयरबेस को फिर से चालू करने के लिए चीन से सहायता मांगी है।

मोहम्मद यूनुस की चीन यात्रा और विवाद
मार्च में मोहम्मद यूनुस की चीन यात्रा के दौरान इस एयरबेस को फिर से शुरू करने पर चर्चा हुई थी। सूत्रों के अनुसार, यूनुस ने चीन को लालमोनिरहाट में एयरबेस के निर्माण के लिए तकनीकी और वित्तीय सहायता का प्रस्ताव दिया। इसके अलावा, कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि पाकिस्तान की एक कंपनी इस प्रोजेक्ट में सब-कॉन्ट्रैक्टर के रूप में शामिल हो सकती है, जिससे भारत की चिंताएं और गहरी हो गई हैं। यूनुस ने अपनी यात्रा के दौरान भारत के पूर्वोत्तर राज्यों को 'लैंड-लॉक्ड' बताते हुए बांग्लादेश को इस क्षेत्र के समुद्री व्यापार का 'एकमात्र संरक्षक' करार दिया था, जिसे भारत ने आपत्तिजनक माना।

भारत के लिए क्यों है खतरा?
सिलीगुड़ी कॉरिडोर की चौड़ाई मात्र 22 किलोमीटर है। यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह पूर्वोत्तर के सात राज्यों को मुख्य भूमि से जोड़ता है। लालमोनिरहाट में चीन की मौजूदगी से इस क्षेत्र में सैन्य संतुलन बिगड़ सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह एयरबेस भविष्य में न केवल सैन्य ठिकाने के रूप में, बल्कि एक खुफिया केंद्र या कूटनीतिक दबाव बिंदु के रूप में भी इस्तेमाल हो सकता है। चीन की 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' (BRI) के तहत बांग्लादेश में बढ़ती गतिविधियां, जैसे मोंगला पोर्ट का विकास और चटगांव में आर्थिक पार्क की स्थापना, भारत के लिए अतिरिक्त चिंता का कारण हैं। इसके अलावा, बांग्लादेश द्वारा तुर्की से Bayraktar TB2 ड्रोन और चीन-पाकिस्तान निर्मित JF-17 थंडर लड़ाकू विमानों की खरीद की योजना ने भी क्षेत्रीय तनाव को बढ़ाया है।

भारत की रणनीति पुख्ता
भारत ने इस स्थिति पर कड़ी नजर रखते हुए सिलीगुड़ी कॉरिडोर की सुरक्षा को और मजबूत किया है। भारतीय सेना की त्रिशक्ति कोर इस क्षेत्र की रक्षा के लिए राफेल जेट, ब्रह्मोस मिसाइल, और S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम से लैस है। हाल ही में भारत ने त्रिपुरा के कैलाशहर में 1971 के युद्ध के दौरान इस्तेमाल हुए एयरबेस को फिर से सक्रिय करने की योजना शुरू की है, जिसे यूनुस के 'चीनी प्लान' की काट के रूप में देखा जा रहा है।

 

More From Author

मतदान अधिकारियों का मानदेय बढ़ाने का फैसला, निर्वाचन आयोग ने दी मंजूरी

राज्यपाल मंगुभाई पटेल ने प्रदेशवासियों को दीं रक्षाबंधन की शुभकामनाएं

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 13783/138

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.