मध्यप्रदेश में रिकॉर्ड तोड़ सर्दी, पचमढ़ी जैसी ठंड, इंदौर-भोपाल में पारा 7° तक गिरा

भोपाल
 मध्य प्रदेश इस समय कड़क ठंड की चपेट में है। प्रदेश के कई शहरों में तापमान लगातार गिर रहा है और सर्दी ने पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। इंदौर में बीती रात न्यूनतम तापमान 5.2°C दर्ज हुआ, जो पिछले दस साल की सबसे ठंडी रात थी। खास बात यह है कि इंदौर का तापमान इस बार पचमढ़ी के बराबर ठंडा रहा। राजधानी भोपाल में भी पारा 7°C से नीचे गया।

मौसम विभाग के अनुसार, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में हो रही बर्फबारी और जेट स्ट्रीम की सक्रियता इस बार ठंड बढ़ाने में बड़ी भूमिका निभा रही है। जेट स्ट्रीम लगभग 12.6 KM की ऊंचाई पर 200+ किमी प्रति घंटा की रफ्तार से बह रही है। पहाड़ी राज्यों से आने वाली बर्फीली हवाओं और इस ऊंची हवा के मिलने से MP में तापमान काफी कम हो गया।

भोपाल में लगातार छह दिन तक कोल्ड वेव (शीतलहर) चलने के बाद गुरुवार को थोड़ी राहत मिली, लेकिन शुक्रवार को दिन फिर सर्द रहा। भोपाल, राजगढ़, इंदौर, सीहोर और शाजापुर में सर्द हवाएं चली। इस वजह से लोग गर्म कपड़ों में लिपटे हुए नजर आए। दिन में धूप तो खिली, लेकिन शाम को ठंड का असर बढ़ा रहा। हालांकि, अगले 3 दिन तक शीतलहर का अलर्ट नहीं है, लेकिन ठंड का असर बरकरार रहेगा।

दूसरी ओर, गुरुवार-शुक्रवार की रात कई शहरों में पारा 5 डिग्री के आसपास रहा। इंदौर शहर में 5.2 डिग्री रहा। इतना ही तापमान पचमढ़ी में भी दर्ज किया गया। रात में भोपाल और ग्वालियर में पारे में गिरावट हुई। भोपाल में 6.5 डिग्री, ग्वालियर में 9.1 डिग्री, उज्जैन में 9 डिग्री और जबलपुर में पारा 8.4 डिग्री रहा।

मौसम विभाग का कहना है कि फिलहाल अगले तीन दिनों तक शीतलहर का अलर्ट नहीं है, लेकिन ठंड से राहत मिलने की संभावना कम है। रात के तापमान में और गिरावट आ सकती है। गुरुवार-शुक्रवार की रात प्रदेश के कई शहरों में पारा 5 से 10 डिग्री के बीच दर्ज किया गया। भोपाल में न्यूनतम तापमान 6.5 डिग्री, ग्वालियर में 9.1, उज्जैन में 9, जबलपुर में 8.4 डिग्री रहा। वहीं राजगढ़ में 5.2, नौगांव में 6.4, उमरिया में 6.6, रीवा में 7, मलाजखंड में 7.2 और मंडला में 7.6 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में हो रही बर्फबारी का असर मध्य प्रदेश तक पहुंच रहा है। पहाड़ी राज्यों में कई जगह तापमान शून्य से नीचे चला गया है। इसके अलावा उत्तर भारत के ऊपर सक्रिय जेट स्ट्रीम भी मौसम को प्रभावित कर रही है। करीब 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर 204 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से बह रही यह जेट स्ट्रीम मध्य प्रदेश में ठंड बढ़ाने का कारण बन रही है। मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले दिनों में दिन के तापमान में हल्की बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन रातें फिलहाल बेहद सर्द बनी रहेंगी।

तापमान में गिरावट जारी 
प्रदेश के कई शहरों में न्यूनतम तापमान 5 डिग्री के आसपास दर्ज किया गया। इंदौर और पचमढ़ी दोनों में पारा 5.2 डिग्री सेल्सियस रहा। भोपाल में न्यूनतम तापमान 6.5 डिग्री, ग्वालियर में 9.1 डिग्री, उज्जैन में 9 डिग्री और जबलपुर में 8.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। मौसम विभाग के मुताबिक, अधिकांश शहरों में तापमान 10 डिग्री से नीचे रहा। राजगढ़ में 5.2, नौगांव में 6.4, उमरिया में 6.6, रीवा में 7, मलाजखंड में 7.2, मंडला में 7.6, रायसेन, शिवपुरी और नरसिंहपुर में 8, बैतूल में 8.5, छिंदवाड़ा और खजुराहो में 9, सतना में 9.1, टीकमगढ़ और रतलाम में 9.5, दमोह में 9.8 और दतिया में 9.9 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज किया गया।

इसलिए मध्य प्रदेश में बढ़ी ठिठुरन
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, पहाड़ी राज्यों उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में हो रही बर्फबारी का असर मैदानी इलाकों तक पहुंच रहा है। उत्तराखंड के कई इलाकों में नदी-नाले और झरने तक जम गए हैं। इसके साथ ही उत्तर भारत के ऊपर सक्रिय जेट स्ट्रीम भी ठंड बढ़ाने में अहम भूमिका निभा रही है। यह जेट स्ट्रीम जमीन से करीब 12 से 13 किलोमीटर की ऊंचाई पर 200 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक की रफ्तार से बह रही है, जिसका असर मध्यप्रदेश में भी साफ नजर आ रहा है।

लगातार टूट रहे ठंड के रिकॉर्ड
मौसम विभाग का कहना है कि पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवाओं और उत्तर भारत के मैदानी इलाकों से आने वाली ठंडी हवाओं के साथ जेट स्ट्रीम के सक्रिय होने से इस बार ठंड का असर दोगुना हो गया है। यही वजह है कि दिसंबर में भी कड़ाके की सर्दी पड़ रही है। भोपाल में नवंबर की ठंड ने 84 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया है, जबकि इंदौर में 25 साल में सबसे ज्यादा सर्दी दर्ज की गई है। दिसंबर में भी इंदौर की ठंड ने बीते 10 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। 

बर्फीली हवाओं की वजह से ठंड मौसम विभाग के अनुसार, पहाड़ी राज्य- उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में बर्फबारी हुई है। उत्तराखंड में तो नदी-नाले और झरने तक जम गए हैं। कई शहरों में पारा माइनस है। दूसरी ओर, जेट स्ट्रीम भी चल रही है। उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में जेट स्ट्रीम का असर है। यह जमीन से 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर 204 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से बह रही है। जिसका असर एमपी में भी है। इस कारण शुक्रवार को भी शीतलहर का असर देखा गया।

क्या होती है जेट स्ट्रीम? मौसम एक्सपर्ट की माने तो प्रदेश में ठंड बढ़ने की वजह खास वजह जेट स्ट्रीम भी है। यह जमीन से लगभग 12 किमी ऊंचाई पर चलने वाली तेज हवा है। इसकी रफ्तार 222 किमी प्रति घंटा तक पहुंच गई है। यह देश के उत्तरी हिस्से में सक्रिय है।

पहाड़ों से आने वाली बर्फीली हवा के अलावा ये ऊंची हवा इस बार सर्दी बढ़ाएगी। उत्तर के मैदानी इलाकों से जब ठंडी हवा और पहाड़ी इलाकों से बर्फीली हवा हमारे यहां आती है, तब तेज ठंड पड़ती है। यह सब उत्तर भारत में पहुंचने वाले मौसमी सिस्टम वेस्टर्न डिस्टरबेंस के कारण होता है। ऐसे में यदि जेट स्ट्रीम भी बन जाए तो सर्दी दोगुनी हो जाती है। इस बार यही होना है।

दिसंबर में भी रिकॉर्ड तोड़ रही सर्दी मौसम विभाग की माने तो इस बार सर्दी का असर तेज है। भोपाल में नवंबर की सर्दी का 84 साल का रिकॉर्ड टूट चुका है, जबकि इंदौर में 25 साल में सबसे ज्यादा ठंड पड़ी है। ऐसी ही सर्दी दिसंबर में भी है। इंदौर में दिसंबर की सर्दी का 10 साल का रिकॉर्ड टूट गया है।

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