पर्यटन नगरी बनी मुसीबत नगरी: मनाली में 15 KM ट्रैफिक जाम, ठप हुई बिजली-पानी व्यवस्था

मनाली
पिछले 48 घंटों में पश्चिमी हिमालय क्षेत्र में हुई भारी बर्फबारी से हिमाचल प्रदेश में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। मनाली के पास 15 किलोमीटर लंबा ट्रैफिक जाम लग गया है। बिजली और पानी सप्लाई डिस्टर्ब है। बड़ी संख्या में पर्यटक यहां फंसे हुए हैं। उन्हें गाड़ियों में ही रात बितानी पड़ी।

हिमाचल प्रदेश में ताजा बर्फबारी ने लंबे समय से चले आ रहे सूखे को तो खत्म कर दिया, लेकिन इससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। खासकर शिमला और मनाली में बुरा हाल है। गणतंत्र दिवस के लंबे सप्ताहांत के दौरान फिसलन भरी सड़कों और भारी संख्या में पर्यटकों की आवाजाही के कारण भीषण ट्रैफिक जाम हो गया।

600 से अधिक पर्यटक फंसे
मनाली के पास 600 से अधिक पर्यटक फंस गए। ट्रैफिक ठप होने से इनमें से कई को रात अपनी गाड़ियों में ही बितानी पड़ी। दिल्ली के एक पर्यटक अक्षय ने बताया कि हम तीन घंटे से अधिक समय तक ट्रैफिक जाम में फंसे रहे और फिर हमने पैदल चलकर मनाली जाने का फैसला किया, जो लगभग 7 किलोमीटर की दूरी थी। एक अन्य पर्यटक तृषा ने कहा कि हमें रात अपनी गाड़ी में ही बितानी पड़ी और हमने मैगी खाकर गुजारा किया क्योंकि हमारे पास अपना पोर्टेबल सिलेंडर था।

20 KM के लिए 10-15 हजार रुपए मांग रहे
पब्लिक ट्रांसपोर्ट के बंद होने से पर्यटकों ने निजी टैक्सी चालकों पर अधिक किराया वसूलने का आरोप भी लगाया। दिल्ली के एक पर्यटक लक्षित ने बताया कि टैक्सी चालक मनाली और पटलीकुहाल के बीच 20 किलोमीटर की यात्रा के लिए 10000 से 15000 रुपए मांग रहे हैं।

सैकड़ों सड़कें अवरुद्ध
राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एसडीएमए) के अनुसार, राज्य भर में दो राष्ट्रीय राजमार्गों- एनएच-3 (कोक्सर-दारचा) और एनएच-505 (ग्रामफू-बताल) सहित 683 सड़कें अवरुद्ध रहीं। लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने बताया कि बर्फ हटाने के लिए भारी मशीनरी तैनात की जा रही है।

उन्होंने कहा कि पहाड़ी इलाकों में सड़कों से बर्फ हटाने के लिए जेसीबी और पोक्लेन मशीनें लगातार लगी हुई हैं। ऊंचे इलाकों में 2.5 से 3 फीट तक बर्फ गिरी है, जबकि उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में 4 फीट तक बर्फ दर्ज की गई है, जिससे सड़कों से बर्फ हटाने में समय लग रहा है।

बिजली-पानी की आपूर्ति प्रभावित
भारी बर्फबारी से बिजली और पानी की आपूर्ति भी बुरी तरह प्रभावित हुई। प्रभावित वितरण ट्रांसफार्मरों (डीटीआर) की संख्या बढ़कर 5775 हो गई, जबकि 126 जल आपूर्ति योजनाएं प्रभावित हुईं। शिमला जिले के बड़े हिस्से में 30 घंटे से अधिक समय तक बिजली नहीं रही। कई ग्रामीण इलाकों में बिजली बहाल होने में पांच से छह दिन लग सकते हैं। 1200 से अधिक मार्गों पर बस सेवाएं निलंबित कर दी गईं।

सबसे अधिक प्रभावित जिले
सबसे अधिक प्रभावित जिलों में लाहौल-स्पीति, मंडी, चंबा, कुल्लू और सिरमौर शामिल हैं। अकेले लाहौल-स्पीति में ही 290 सड़कें अवरुद्ध हो गईं, जबकि कोक्सर-रोहतांग दर्रा, दरचा-सरचू और ग्रामफू-बताल जैसे महत्वपूर्ण रणनीतिक मार्ग बंद रहे। अटल सुरंग से होकर जाने वाला मनाली-लाहौल मार्ग भी बंद रहा।

व्यवधानों के बावजूद पर्यटकों की संख्या में वृद्धि
बाधाओं के बावजूद बर्फबारी के कारण पर्यटकों के आगमन में भारी वृद्धि हुई है। शिमला में होटलों की ऑक्यूपेंसी 70-80 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है। शिमला होटल्स एंड टूरिज्म स्टेकहोल्डर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मोहिंदर सेठ ने कहा कि पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, लेकिन लंबे समय तक बिजली कटौती चिंता का विषय बनी हुई है। हम पर्यटकों के लिए निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए अपनी जेब से खर्च कर रहे हैं। मनाली में होटल मालिकों को उम्मीद है कि सड़कें खुलने के बाद ऑक्यूपेंसी 70 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी।

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