GST कलेक्शन में रिकॉर्ड उछाल! सरकार के खजाने से मिलने वाली सुविधाएं जानें

नई दिल्ली

 जीएसटी कलेक्शन के मोर्चे पर अच्छी खबर है। मार्च 2026 में देश की GST कलेक्शन को लेकर अच्छी खबर सामने आई है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, नेट GST कलेक्शन बढ़कर 2 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है, जो पिछले महीने के मुकाबले 8.2% ज्यादा है। इससे साफ है कि देश में कारोबार और खपत दोनों में मजबूती बनी हुई है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि टैक्स कलेक्शन में यह बढ़ोतरी आर्थिक गतिविधियों के लगातार सुधरने का संकेत देती है।

वहीं, अगर ग्रॉस GST कलेक्शन की बात करें तो मार्च में यह 2 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो पिछले साल के इसी महीने के मुकाबले 8.8% ज्यादा है। लगातार बढ़ती GST वसूली सरकार के राजस्व को मजबूत कर रही है और आने वाले समय में विकास योजनाओं को रफ्तार देने में मदद मिलेगी। कुल मिलाकर, यह आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माने जा रहे हैं।

 इस पैसे से आपको मिलती हैं ये सुविधाएं

पिछले कुछ महीनों से भारत सरकार के खजाने में गुड्स एंड सर्विसेज टैक्स (GST) की रिकॉर्ड तोड़ बारिश हो रही है. देश में जीएसटी कलेक्शन लगातार नए रिकॉर्ड बना रहा है. हर महीने सरकार के खजाने में लाखों करोड़ रुपये जमा हो रहे हैं. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आपकी जेब से निकला यह टैक्स, घूम-फिरकर आपके जीवन को ‘वर्ल्ड क्लास’ बनाने में कैसे इस्तेमाल होता है?

आइए समझते हैं कि सरकार इस भारी-भरकम पैसे से आम जनता के लिए कौन सी सुविधाएं तैयार कर रही है.

1. हाई-वे और एक्सप्रेसवे का बिछेगा जाल
GST से होने वाली कमाई का एक बड़ा हिस्सा इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च किया जाता है. सरकार का लक्ष्य भारत के सड़क नेटवर्क को अमेरिका और यूरोप के स्तर पर ले जाना है. दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे जैसे प्रोजेक्ट्स इसी कमाई के दम पर पूरे हो रहे हैं. जब सड़कें अच्छी होती हैं, तो सामान की आवाजाही सस्ती होती है, जिससे महंगाई कम करने में मदद मिलती है.

2. हेल्थकेयर: अब हर जिले में होंगे ‘सुपर स्पेशलिटी’ अस्पताल
टैक्स के जरिए सरकार देश के हेल्थ बजट को बढ़ा रही है. इसका सीधा फायदा आम आदमी को मिलता है. देश के अलग-अलग राज्यों में नए एम्स और मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं. आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के जरिए गरीबों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त इलाज मिलता है, जिसका फंड इसी टैक्स कलेक्शन से आता है.

3. रेल सफर बनेगा ‘हवाई’ सफर जैसा
वंदे भारत ट्रेनों की सफलता और रेलवे स्टेशनों का कायाकल्प (जैसे अमृत भारत स्टेशन योजना) GST कलेक्शन की मजबूती का ही परिणाम है. ट्रेनों में ‘कवच’ जैसी सुरक्षा तकनीक और हाई-स्पीड ट्रैक बिछाने के लिए सरकार भारी निवेश कर रही है. रेलवे स्टेशनों पर अब आपको एयरपोर्ट जैसी लिफ्ट, एस्केलेटर और वेटिंग लाउंज देखने को मिल रहे हैं.

4. शिक्षा और डिजिटल इंडिया
देश के गांवों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाना हो या सरकारी स्कूलों को ‘स्मार्ट स्कूल’ में बदलना, जीएसटी का पैसा भविष्य की पीढ़ी को तैयार कर रहा है. डिजिटल ट्रांजेक्शन के बढ़ने से पारदर्शिता आई है, जिससे भ्रष्टाचार कम हुआ है और योजनाओं का फायदा डीबीटी के जरिए सीधे जनता के बैंक खातों में पहुंच रहा है.

0.22 लाख करोड़ रुपये के रिफंड जारी किए गए
रिफंड्स की बात करें तो मार्च महीने में कुल 0.22 लाख करोड़ रुपये के रिफंड जारी किए गए, जो साल-दर-साल आधार पर 13.8% ज्यादा है। रिफंड बढ़ने के बावजूद सरकार की नेट कमाई मजबूत बनी हुई है, जो 1.78 लाख करोड़ रुपये रही। इससे यह भी संकेत मिलता है कि एक्सपोर्ट और कारोबार से जुड़े सेक्टर्स में गतिविधि तेज हुई है।

ग्रॉस रेवेन्यू 1.46 लाख करोड़ रुपये रहा
रेवेन्यू के अलग-अलग हिस्सों पर नजर डालें तो घरेलू लेनदेन से मिलने वाला ग्रॉस रेवेन्यू 1.46 लाख करोड़ रुपये रहा, जिसमें 5.9% की बढ़त हुई। वहीं, इंपोर्ट से मिलने वाला रेवेन्यू 0.54 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जिसमें 17.8% की तेज बढ़ोतरी देखने को मिली। इसका मतलब है कि देश में आयात गतिविधियां भी काफी मजबूत रही हैं।

पूरे वित्त वर्ष 2025-26 की बात करें तो ग्रॉस GST कलेक्शन 8.3% बढ़कर 22.27 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा हो गया। वहीं नेट GST रेवेन्यू 7.1% की बढ़त के साथ 19.34 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया। राज्यों में महाराष्ट्र ने सबसे ज्यादा योगदान दिया, जहां से करीब 0.13 लाख करोड़ रुपये का टैक्स कलेक्शन हुआ। इसके बाद कर्नाटक और गुजरात का स्थान रहा।

कैसे रहे राज्यों के प्रदर्शन
राज्यों के प्रदर्शन पर नजर डालें तो कई राज्यों में GST कलेक्शन में अच्छी ग्रोथ देखने को मिली। इनमें हिमाचल प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु, तेलंगाना और आंध्र प्रदेश शामिल हैं। वहीं कुछ राज्यों में गिरावट भी दर्ज की गई, जैसे जम्मू-कश्मीर, चंडीगढ़, दिल्ली, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, असम, पश्चिम बंगाल, झारखंड, ओडिशा, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश। कुल मिलाकर, आंकड़े बताते हैं कि भारतीय अर्थव्यवस्था स्थिर और मजबूत दिशा में आगे बढ़ रही है।

 

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