हज यात्रियों को साथ रखने होंगे 3000 रियाल, डिजिटल होगी कुर्बानी की प्रक्रिया और ठगी रोकने को बना ‘नुसुक मसार’ पोर्टल

जयपुर
 मुकद्दस हज यात्रा पर जाने वाले जायरीनों के लिए इस बार सफर की राह थोड़ी अलग होगी। 21 अप्रैल से शुरू होने वाली इस यात्रा के लिए हज कमेटी ऑफ इंडिया ने नए और सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। सबसे बड़ा बदलाव कुर्बानी की प्रक्रिया को लेकर किया गया है। अब कोई भी हाजी निजी स्तर पर जानवर खरीदकर कुर्बानी नहीं दे सकेगा। इस बार पूरी व्यवस्था को डिजिटल और सेंट्रलाइज्ड कर दिया गया है।

जेब में रखने होंगे 3000 रियाल, खाना बनाने पर रोक
इस बार हज यात्रियों के लिए एक और महत्वपूर्ण अपडेट यह है कि उन्हें अपने साथ कम से कम 3000 सऊदी रियाल की व्यवस्था करके ले जानी होगी। हज के दौरान इस बार यात्रियों को खुद खाना बनाने की इजाजत नहीं होगी। यह राशि उनके खाने-पीने, होटल के छोटे-मोटे खर्चों और अन्य निजी जरूरतों के लिए अनिवार्य की गई है। प्रशासन का मानना है कि इससे कैंपों में आग लगने का खतरा कम होगा और सफाई बनी रहेगी।

ठगी और जालसाजी पर लगेगा लगाम?
अक्सर देखा जाता था कि मक्का में कुर्बानी के नाम पर जायरीन के साथ धोखाधड़ी होती थी। कुछ जालसाज एक ही जानवर की अलग-अलग एंगल से फोटो दिखाकर कई लोगों से पैसे ऐंठ लेते थे। इसी 'फोटो वाली ठगी' और गंदगी को रोकने के लिए सऊदी अरब सरकार ने नुसुक मसार पोर्टल अनिवार्य कर दिया है। अब कुर्बानी के लिए केवल आधिकारिक 'अदाही प्रोजेक्ट' के माध्यम से ही ऑनलाइन जानवर बुक किए जा सकेंगे। जिन यात्रियों ने फॉर्म में कुर्बानी की सहमति दी है, उन्हें अब हज कमेटी के जरिए ही निर्धारित राशि जमा करानी होगी।

6 अप्रैल है 'डेडलाइन': आखिरी किस्त जमा करना जरूरी
शेखावाटी के हज सेवक सुभाषचन्द्र वर्मा के अनुसार, जयपुर एम्बार्केशन पॉइंट से जाने वाले यात्रियों के लिए तीसरी और अंतिम किस्त जमा कराने की तारीख बढ़ाकर 6 अप्रैल 2026 कर दी गई है। तीसरी किस्त के रूप में 17,290 रुपये जमा कराने होंगे। हज यात्रा का कुल खर्च लगभग 3.52 लाख रुपये है, जिसे तीन किश्तों में जमा करना होता है। यदि 6 अप्रैल तक भुगतान नहीं हुआ, तो फ्लाइट कन्फर्मेशन रद्द हो सकती है।

पेमेंट के तरीके: ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों विकल्प
यात्री Haj Suvidha ऐप या वेबसाइट के जरिए नेट बैंकिंग/क्रेडिट कार्ड से भुगतान कर सकते हैं। ऑफलाइन विकल्प के लिए एसबीआई या यूनियन बैंक की शाखाओं में चालान जमा कराया जा सकता है। इसके लिए 'यूनिक बैंक रेफेरेंस नंबर' होना अनिवार्य है।

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