प्रदेश सौर ऊर्जा के क्षेत्र में बनेगा देश का अग्रणी राज्य : मंत्री शुक्ला

भोपाल. 
नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में नवकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में प्रदेश में उल्लेखनीय कार्य हो रहा है। प्रदेश जल्द ही सौर ऊर्जा उत्पादन के क्षेत्र में देश का अग्रणी राज्य बनेगा। मंत्री शुक्ला ने रेस्को की विकासक इकाइयों को बेहतर गुणवत्तापूर्ण कार्य निर्धारित समय-सीमा में करने के निर्देश दिये। मंत्रालय में बुधवार को मंत्री शुक्ला की उपस्थिति में "प्रधानमंत्री सूर्य घर : मुफ्त बिजली योजना'' अंतर्गत प्रदेश में शासकीय भवनों की छतों पर रेस्को पद्धति के माध्यम से सोलर रूफटॉप संयंत्र लगाने के लिये शासकीय संस्थाओं और रेस्को विकासक इकाइयों के बीच विद्युत क्रय अनुबंध (एमओयू) हुए।

मंत्री शुक्ला ने बताया कि पुलिस, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा जेल विभाग के शासकीय भवनों में सोलर रूफटॉप संयंत्र स्थापना के लिये शासकीय संस्थाओं एवं रेस्को विकासक इकाइयों के बीच हुए विद्युत क्रय अनुबंध में विभिन्न कार्य सम्पादित किये जायेंगे। पुलिस विभाग के स्पेशल ब्रांच पुलिस ट्रेनिंग सेंटर, श्यामला हिल्स (हुजूर) में 185 किलोवॉट, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अंतर्गत जिला चिकित्सालय बैरागढ़ में 100 किलोवॉट तथा जेल विभाग के अंतर्गत न्यू सेंट्रल जेल में 370 किलोवॉट क्षमता के सोलर रूफटॉप संयंत्र रेस्को मोड में स्थापित किए जाएंगे। मंत्री शुक्ला ने बताया कि इन परियोजनाओं के लिए मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम, होराइजन रेस्को एनर्जी प्राइवेट लिमिटेड एवं संबंधित हितग्राही संस्थाओं के बीच विद्युत क्रय अनुबंध हुए हैं। विद्युत क्रय अनुबंधों पर पुलिस विभाग की ओर से उप पुलिस अधीक्षक अमिताभ श्रीवास्तव, स्वास्थ्य विभाग की ओर से मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी जे.के. जैन तथा जेल विभाग की ओर से जेल अधीक्षक राकेश कुमार द्वारा हस्ताक्षर किये।

रेस्को पद्धति के अंतर्गत संयंत्र की स्थापना एवं 25 वर्षों तक उसका संचालन एवं रख-रखाव पूर्णतः रेस्को विकासक इकाई द्वारा किया जाता है। इस अवधि में संयंत्र की वारंटी भी विकासक इकाई के पास रहती है। इस मॉडल की विशेषता यह है कि शासन को संयंत्र स्थापना के लिये कोई प्रारंभिक व्यय नहीं करना पड़ता। शासकीय कार्यालयों द्वारा उपयोग की गई ऊर्जा के लिए प्रति यूनिट निर्धारित दर से भुगतान किया जाता है। भोपाल जिले में यह दर ₹3.78 प्रति यूनिट निर्धारित है।

निवेश शून्य, बचत पहले दिन से
मंत्री शुक्ला ने बताया कि शासकीय संस्थान “शून्य निवेश, पहले दिन से बचत एवं नेट-जीरो की दिशा में अग्रसर” की अवधारणा को साकार कर सकेंगे। संयंत्र स्थापना का कार्य निविदा प्रक्रिया के माध्यम से चयनित रेस्को विकासक इकाइयों द्वारा किया जा रहा है। मध्यप्रदेश ऊर्जा विकास निगम लिमिटेड द्वारा प्रदेश के शासकीय भवनों को रेस्को मोड में सौर ऊर्जा से आच्छादित करने के लिये “एक जिला-एक रेस्को” की तर्ज पर 55 जिलों के लिए 48 मेगावॉट क्षमता के लगभग 1300 शासकीय भवनों के लिये जिलेवार निविदाएं जारी की गई थीं। इस प्रक्रिया में 13 विकासकों का सफलतापूर्वक चयन कर 47 जिलों के लिए कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं।

मंत्री शुक्ला ने बताया कि निविदा प्रक्रिया में न्यूनतम दर इंदौर जिले के लिए ₹3.40 प्रति यूनिट, ग्वालियर जिले के लिए ₹3.49 प्रति यूनिट, भोपाल जिले के लिए ₹3.78 प्रति यूनिट, उज्जैन जिले के लिए ₹3.97 प्रति यूनिट तथा अधिकतम ₹4.01 प्रति यूनिट की दर प्राप्त हुई है। इस योजना के प्रभावी एवं दक्षतापूर्ण क्रियान्वयन से प्रदेश निश्चित ही सौर ऊर्जा के क्षेत्र में देश के अग्रणी राज्यों में अपनी पहचान स्थापित करेगा।

 

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