EPF में पैसा लगाना या शेयर बाजार में निवेश? रिटायरमेंट से पहले समझ लें पूरा गणित

नई दिल्ली
नौकरीपेशा लोगों के लिए रिटायरमेंट के बाद आर्थिक सुरक्षा सबसे बड़ी चिंताओं में से एक होती है। ऐसे में अक्सर सवाल उठता है कि भविष्य के लिए पैसा EPF यानी कर्मचारी भविष्य निधि में जमा करना बेहतर है या शेयर बाजार में निवेश करना। दोनों विकल्पों के अपने फायदे और जोखिम हैं, लेकिन दोनों का उद्देश्य अलग है। EPF को मुख्य रूप से लंबी अवधि में सुरक्षित रिटायरमेंट फंड तैयार करने के लिए बनाया गया है, जबकि शेयर बाजार में निवेश का लक्ष्य बाजार की तेजी का फायदा उठाकर ज्यादा रिटर्न कमाना हो सकता है। हालांकि, शेयर बाजार में रिटर्न अधिक मिलने की संभावना रहती है, लेकिन इसमें बाजार के उतार-चढ़ाव का जोखिम भी होता है। EPFO ने अपने आधिकारिक वीडियो में EPF और इक्विटी निवेश की तुलना करते हुए बताया है कि रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए EPF किस तरह अधिक स्थिर और सुरक्षित विकल्प बनता है।

पहला कारण—EPF में नियमित योगदान:- EPFO के मुताबिक, जिन संस्थानों पर EPF कानून लागू होता है और पात्र कर्मचारियों की बेसिक सैलरी निर्धारित सीमा के भीतर है, वहां EPF में योगदान नियमों के तहत किया जाता है। हर महीने कर्मचारी के वेतन से एक हिस्सा EPF में जाता है और नियोक्ता भी निर्धारित योगदान करता है। इसके विपरीत शेयर बाजार में निवेश पूरी तरह स्वैच्छिक है। निवेशक अपनी इच्छा और जोखिम उठाने की क्षमता के अनुसार पैसा लगाता है और जरूरत के मुताबिक निवेश को बेच सकता है।

दूसरा कारण—नियोक्ता का योगदान:- EPF की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें सिर्फ कर्मचारी का पैसा नहीं लगता, बल्कि नियोक्ता भी निर्धारित नियमों के अनुसार योगदान करता है, यानी कर्मचारी के रिटायरमेंट फंड को बनाने में कंपनी की तरफ से भी पैसा जुड़ता है। शेयर बाजार में ऐसा कोई अतिरिक्त नियोक्ता योगदान नहीं मिलता। वहां निवेश की पूरी रकम निवेशक की अपनी होती है।

तीसरा कारण—स्थिरता:- EPF में हर महीने नियमित बचत होती है और इस पर सरकार द्वारा घोषित ब्याज दर लागू होती है। इससे लंबी अवधि में एक व्यवस्थित रिटायरमेंट कॉर्पस तैयार करने में मदद मिलती है। दूसरी तरफ शेयर बाजार का रिटर्न कंपनियों के प्रदर्शन, अर्थव्यवस्था और बाजार की स्थिति पर निर्भर करता है। बाजार बढ़ने पर अच्छा मुनाफा हो सकता है, लेकिन गिरावट आने पर निवेश का मूल्य भी कम हो सकता है।

चौथा कारण—टैक्स, पेंशन और बीमा:- EPFO के अनुसार EPF से जुड़े नियमों के तहत पात्र मामलों में योगदान, ब्याज और निकासी पर टैक्स लाभ मिल सकते हैं। इसके अलावा पात्र कर्मचारियों को EPS (Employees’ Pension Scheme) के जरिए पेंशन का लाभ भी मिल सकता है। EDLI योजना के तहत बीमा सुरक्षा भी उपलब्ध होती है। शेयर बाजार में निवेश करने पर इस तरह की सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं नहीं मिलतीं और शेयर बेचकर हुए मुनाफे पर लागू नियमों के अनुसार कैपिटल गेन टैक्स लग सकता है।

5वां कारण—रिटायरमेंट के लिए भरोसेमंद विकल्प:- EPF केंद्र सरकार द्वारा संचालित और विनियमित व्यवस्था है, जिसका मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों के लिए लंबे समय में सुरक्षित फंड तैयार करना है। शेयर बाजार नियामकीय ढांचे के तहत काम करता है, लेकिन इसमें कीमतों का जोखिम बना रहता है। इसलिए रिटायरमेंट जैसे लंबे लक्ष्य के लिए EPF एक स्थिर आधार प्रदान कर सकता है।

छठा कारण—दोनों का उद्देश्य अलग:- EPFO के मुताबिक EPF का मुख्य उद्देश्य भविष्य के लिए सामाजिक सुरक्षा और वित्तीय स्थिरता उपलब्ध कराना है, जबकि शेयर बाजार में निवेश अधिक जोखिम लेने की क्षमता और संभावित रिटर्न पर आधारित होता है। इसलिए दोनों को एक-दूसरे का विकल्प मानने के बजाय अलग-अलग उद्देश्यों के लिए समझना जरूरी है। EPF सुरक्षित रिटायरमेंट कॉर्पस की नींव बन सकता है, जबकि जोखिम सहने की क्षमता रखने वाले निवेशक अपने वित्तीय लक्ष्यों के अनुसार शेयर बाजार को अतिरिक्त निवेश विकल्प के तौर पर देख सकते हैं।

 

More From Author

चाणक्य नीति: इन 5 लोगों से भूलकर भी न लें दुश्मनी, वरना बढ़ सकती हैं मुश्किलें

आजादी का अमृतकाल चल रहा है, हम सब मिलकर देश के विकास के लिए आगे बढ़ेंगे

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

RO No. 13967/1

RO No. 13944/210

city24x7.news founded in 2021 is India’s leading Hindi News Portal with the aim of reaching millions of Indians in India and significantly worldwide Indian Diaspora who are eager to stay in touch with India based news and stories in Hindi because of the varied contents presented in an eye pleasing design format.