जावरा में प्रस्तावित ग्रीन फील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे का विरोध तेज, पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को किया गिरफ्तार

रतलाम
उज्जैन से जावरा तक प्रस्तावित ग्रीन फील्ड एक्सेस कंट्रोल्ड हाईवे (फोरलेन) के निर्माण के खिलाफ दुकानदारों और किसानों का आंदोलन दिन-ब-दिन उग्र होता जा रहा है। जन संघर्ष समिति के बैनर तले पिछले तीन महीनों से चल रहे इस आंदोलन ने अब नया मोड़ ले लिया है। शनिवार को जावरा से उज्जैन तक पैदल यात्रा निकालने की कोशिश के दौरान 29 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया था, जिन्हें बाद में छोड़ दिया गया। वहीं, रविवार को यात्रा फिर से शुरू करने की योजना बनाते ही जिला पंचायत सदस्य व कांग्रेस नेता डीपी धाकड़ और राजेश भरावा को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। यह हाईवे मध्य प्रदेश के जावरा-उज्जैन क्षेत्र में महू-नीमच हाईवे से सटे सात किलोमीटर के हिस्से में बनाया जा रहा है, जिसका स्थानीय लोग जमकर विरोध कर रहे हैं।

आंदोलन की शुरुआत और मांगें
जन संघर्ष समिति के नेतृत्व में यह आंदोलन 12 फरवरी 2025 से शुरू हुआ, जब दुकानदारों और किसानों ने जावरा के बायपास चौराहे पर धरना शुरू किया।प्रदर्शनकारियों का कहना है कि प्रस्तावित हाईवे जावरा शहर के सात किलोमीटर के सघन आबादी और रोजगार वाले क्षेत्र से होकर गुजरेगा। उनकी मुख्य आपत्ति यह है कि सड़क और ब्रिज जमीन से 24 फीट ऊंचे बनाए जाएंगे, जिससे क्षेत्र में सामाजिक और आर्थिक नुकसान होगा।
उनका कहना है, "हम विकास के लिए जमीन देने के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन ऊंचे ब्रिज और फोरलेन इंटरचेंज से हमारा रोजगार और आवागमन प्रभावित होगा।" वे मांग कर रहे हैं कि जमीन के स्तर पर फोरलेन बनाया जाए और चौराहों पर रोटरी का निर्माण हो।

पैदल यात्रा और पुलिस की कार्रवाई
अपनी मांगों को लेकर जावरा से उज्जैन तक पैदल यात्रा का आयोजन किया गया था। शनिवार को यात्रा शुरू होते ही पुलिस ने भारी बल के साथ इसे रोक दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारी असलम मेव ने खुद पर पेट्रोल डालकर आत्मदाह का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने तुरंत हस्तक्षेप कर उसे रोक लिया और पेट्रोल की केन छीन ली।
इसके बाद 29 प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया, जिन्हें दोपहर में रिहा कर दिया गया। लेकिन रविवार सुबह, जब प्रदर्शनकारी उज्जैन कमिश्नर को ज्ञापन देने के लिए फिर से यात्रा की तैयारी कर रहे थे, पुलिस ने सक्रियता दिखाई। कांग्रेस नेता डीपी धाकड़ और राजेश भरावा को अलग-अलग स्थानों से गिरफ्तार किया गया। दोनों का जिला अस्पताल में मेडिकल कराने के बाद सक्रिल जेल भेज दिया गया।

नेताओं का बयान: "अंत तक लड़ेंगे"
जेल ले जाए जाते समय राजेश भरावा ने कहा, "हम उज्जैन कमिश्नर को यह बताने जा रहे थे कि ग्रीन फील्ड हाईवे के निर्माण से किसानों के साथ अन्याय हो रहा है। इसके बावजूद हमें दबाया जा रहा है, लेकिन हम अंत तक लड़ेंगे।" डीपी धाकड़ ने नारेबाजी करते हुए कहा, "हर ब्लॉक में किसान पहले से आंदोलनरत हैं। यह हक की लड़ाई है।" इस बीच, खाचरौद-नागदा के पूर्व विधायक दिलीप गुर्जर और अन्य कांग्रेस नेता बड़ावदा थाने पहुंचे और एएसी राकेश खाखा से मामले पर चर्चा की।

विरोध के कारण
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि ऊंचे ब्रिज और एक्सेस कंट्रोल्ड डिजाइन से दुकानदारों का व्यवसाय ठप हो जाएगा और किसानों की जमीन तक पहुंच मुश्किल होगी। वे चाहते हैं कि सरकार उनकी मांगों पर ध्यान दे और योजना में बदलाव करे।
आंदोलन के समर्थन में कांग्रेस भी खुलकर सामने आई है। आने वाले दिनों में यह विरोध और तेज होने की संभावना है, क्योंकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों को लेकर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं।

 

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