हमें लोकसंस्कृति को लेकर गर्व की अनुभूति होनी चाहिए और उसे संरक्षित करते हुए एक प्लैटफॉर्म भी देना चाहिएः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

विदेशी इतिहासकारों की शरारत को पीछे छोड़कर, इतिहास के गौरव-गरिमा से जुड़े पन्ने सहेजने का काम करती है लोककला व लोकगीतः योगी आदित्यनाथ

लखनऊ में आयोजित 10 दिवसीय ऐतिहासिक 'उत्तराखण्ड महोत्सव-2025' में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लोक संस्कृति के संरक्षण पर दिया जोर

हमें लोकसंस्कृति को लेकर गर्व की अनुभूति होनी चाहिए और उसे संरक्षित करते हुए एक प्लैटफॉर्म भी देना चाहिएः मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ

मुख्यमंत्री योगी ने कहाः उत्तराखंड महोत्सव का आयोजन एक ओर अवध के श्रीराम तो दूसरी ओर उत्तराखंड के बद्री विशाल व चारों धाम की संयुक्त शक्ति का प्रतीक

डॉ. सुरेश चन्द्र फुलारा, राष्ट्रपति पुरस्कार से अलंकृत डॉ. मंजू बाला, डॉ. चन्द्र मोहन नौटियाल तथा प्रो. दीवान एस. रावत को सम्मानित करने पर मुख्यमंत्री योगी ने जताया हर्ष

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने की केंद्रीय संस्कृति मंत्री की तारीफ, बोलेः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन 'एक भारत श्रेष्ठ भारत' की भावना को अखिल भारतीय स्तर पर आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं शेखावत

उत्तर प्रदेश व देश के लिए योगदान देने वाले महान विभूतियों को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने किया याद

लखनऊ

लखनऊ में चल रहे उत्तराखंड महोत्सव में मुख्यंमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत रविवार की शाम शामिल हुए। इस अवसर पर मुख्यम्नत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बात पर विशेष रूप से बल दिया कि संकट के दौरान यही लोकगीत कला व लोकगीत ही इतिहास का संरक्षित करते हैं। उन्होंने कहा कि भारत के कई गौरवशाली क्षण हैं जिसे विदेशी इतिहासकारों ने शरारतन भारत के गौरवशाली इतिहास के साथ नहीं जोड़ा। ऐसे में, भारत के गौरव व गरिमा से जुड़े हुए पन्नों को सहेजने का काम लोकगायन व परंपरा के माध्यम से हमें सुनने देखने को प्राप्त होती है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को लखनऊ में आयोजित 10 दिवसीय ऐतिहासिक 'उत्तराखण्ड महोत्सव-2025' में लोक संस्कृति के संरक्षण का आह्वान किया।

उत्तराखंड के महत्व को किया रेखांकित

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि मां गंगा, यमुना, सरयू व शारदा जैसी नदियां देवभूमि के पावन क्षेत्र से होकर उत्तर प्रदेश की भूमि को उपजाऊ करते हुए यहां की धरती से सोना उगलने वाली धरती के रूप में परिवर्तित करने का कार्य करती हैं। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा के लिए अपनी जवानी लगाने वाला उत्तराखंड का नौजवान और अमृत तुल्य जल देने वाली पवित्र नदियां उत्तराखंड से ही आती हैं। लोककला व संस्कृति के महत्व को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वास्तव में यह महोत्सव हमारी लोककला व संस्कृति को जीवंत बना रखने का एक माध्यम है। अगर हम इस प्रकार के महोत्सव न मनाएं तो बहुत से लोग आज की आपाधापी में अपनी संस्कृति से विमुख हो जाएंगे। उन्हें लोककला, लोकगायन, लोकसंस्कृति का पता ही नहीं होगा।

लोक संस्कृति को लेकर हो गर्व की अनुभूति

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि हमें अपनी लोकसंस्कृति को लेकर गर्व की अनुभूति होनी चाहिए और उसे संरक्षित करते हुए एक प्लैटफॉर्म भी देना चाहिए और यही एक भारत श्रेष्ठ भारत का प्रधानमंत्री मोदी का भाव है। उन्होंने कि अखिल भारतीय स्तर पर इसे आगे बढ़ाने का कार्य केंद्रीय पर्यटन व संस्कृति मंत्री गजेंद्र शेखावत कर रहे हैं।

उत्तराखंड के नागरिकों की अटूट देशभक्ति उन्हें स्थानीय संस्कृति के साथ करती है एक

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि देश की सुरक्षा और देश के प्रत्येक क्षेत्र में उत्तराखंड का नागरिक जब काम करता है तो अपनी अटूट देशभक्ति के कारण वह अपने आप को वहां की स्थानीय संस्कृति के साथ समरस करने में देर नहीं लगाता है। उन्होंने कहा कि आज का ये समारोह भी अवधी संस्कृति और उत्तराखंड की संस्कृति के बेहतर समन्वय का ही परिणाम है। उत्तराखंड महोत्सव में एक ओर अवध के श्रीराम तो दूसरी ओर उत्तराखंड के बद्री विशाल व चारों धाम जुड़कर महोत्सव को एक नई ऊंचाई तक पहुंचाने में अपना योगदान देते हैं।

महान विभूतियों को किया याद

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा -ये हम सबका सौभाग्य है कि आज का उत्तराखंड 9 नवंबर सन 2000 श्रद्धेय अटल जी के कारण बना। लेकिन, उत्तर प्रदेश के विकास के लिए भी उसी प्रतिबद्धता के साथ स्थापना काल से ही योगदान देने में जब नाम लिया जाता है तो उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री पंडित गोविंद वल्लभ पंत प्रमुख हैं। उन्होंने लंबे समय तक उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तथा स्वतंत्रता सेनानी के रूप में अपनी सेवाएं पहले देश की स्वाधीनता के लिए दी। वहीं, स्वतंत्र भारत में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में उन्होंने उत्तर प्रदेश के विकास के लिए जो कार्ययोजना सुनिश्चित की, उसी की नींव पर भावी उत्तर प्रदेश का निर्माण करने में सफलता प्राप्त की गई। उन्होंने कहा कि ये उत्तर प्रदेश और देश का गौरव है कि उसी उत्तराखंड ने हेमवती नंदन बहुगुणा व नारायण दत्त तिवारी को जन्म दिया जिन्होंने लंबे समय तक उत्तर प्रदेश व देश के विभिन्न क्षेत्रों में कार्य किया। देश के स्वाधीनता आंदोलन में वीर चंद्र सिंह गढ़वाली का स्मरण हर देशभक्त करता है। उत्तराखंड बनने के बाद उत्तराखंड की ग्रीष्मकालीन राजधानी को अन्य शहर में स्थापित करके वीर चंद्र सिंह गढ़

पहले सीडीएस जनरल विपिन रावत को भी किया याद

मुख्यमंत्री योगी के अनुसार, ये उत्तराखंड की ही देन है कि भारत की रक्षा सेनाओं की एकीकृत विंग के कमांडर इन चीफ के रूप में देश के पहले सीडीएस जनरल विपिन रावत भी उत्तराखंड की पावन भूमि की देन हैं। उन्होंने कहा कि द्वितीय सीडीएस भी उत्तराखंड की देन हैं। हमने भक्ति और शक्ति का समन्वय उसी प्रकार से किया है जिस प्रकार राजस्थान की घरती ने कर दिखाया है।

विभूतियों के सम्मान पर मुख्यमंत्री योगी ने जताया हर्ष

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि यह प्रसन्नता का विषय है कि महापरिषद प्रतिवर्ष उत्तराखंड गौरव सम्मान से कुछ विभूतियों को सम्मानित करती है। इसी क्रम में डॉ. सुरेश चन्द्र फुलारा (स्वदेशी उत्पाद एवं आजीविका के क्षेत्र में), राष्ट्रपति पुरस्कार से अलंकृत डॉ. मंजू बाला (शिक्षा के क्षेत्र में), डॉ. चन्द्र मोहन नौटियाल (विज्ञान के क्षेत्र में) तथा प्रो. दीवान एस. रावत (रसायन विज्ञान एवं अनुसन्धान के क्षेत्र में) को सम्मानित करने के निर्णय पर सीएम योगी ने प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि जब इस प्रकार की संस्थाएं देश, समाज व संस्कृति के लिए कार्य करती हैं तो संस्थाएं स्वयं भी सम्मानित होती हैं। उन्होंने कहा कि हमें अच्छे लोककला व परंपरा के लिए समर्पित कलाकारों को सम्मानित करना चाहिए जो नए तरीके से पुराने वाद्यों को पुनर्जीवित करते हुए आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं।

एक भारत-श्रेष्ठ भारत की अभिव्यक्ति है महोत्सव

मुख्यमंत्री योगी बोले, मेरी इच्छा थी कि 9 नवंबर को ही मैं इस कार्यक्रम का हिस्सा बनूं लेकिन बिहार चुनाव के कारण ऐसा हो न सका। उत्तराखंड महोत्सव को एक भारत-श्रेष्ठ भारत की अभिव्यक्ति बताते हुए सीएम योगी ने ऐसे आयोजन के निरंतरता की कामना की। उत्तराखंड महोत्सव के सफल आयोजन के लिए महापरिषद को भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बधाई दी।

कार्यक्रम में पूर्व सांसद व मंत्री प्रो. रीता बहुगुणा जोशी, लखनऊ की महापौर सुषमा खर्कवाल, विधायक ओपी श्रीवास्तव (लखनऊ पूर्वी) व अन्य गणमान्य भी उपस्थित रहे। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वल्लन द्वारा किया गया। उत्तराखंड की बालिकाओं द्वारा अतिथियों को पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र व प्रतीक चिह्न प्रदान किया गया। मुख्यमंत्री द्वारा 'उत्तराखंड दर्पण स्मारिकाः वसुधैव कुटुम्बकम्' का भी विमोचन किया गया। इस दौरान, उत्तराखंड महोत्सव के कैलेंडर का भी विमोचन किया गया। कार्यक्रम में उत्तराखंड महापरिषद के अध्यक्ष हरिश्चंद्र पंत, संयोजक दीवान सिंह अधिकारी, महासचिव भरत सिंह बिष्ट व अन्य पदाधिकारी उपस्थित रहे। संबोधन के उपरांत रंगारंग कार्यक्रम के माध्यम से कलाकारों ने उत्तराखंड की पारंपरिक लोकसंस्कृति का दर्शन सभी को कराया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में मां नंदा-सुनंदा की स्तुति प्रमुख रही।

गजेंद्र सिंह शेखावत ने किया लखनऊ का उल्लेख, योगी सरकार के प्रयासों को सराहा

कार्यक्रम में संबोधन के दौरान केंद्रीय पर्यटन व संस्कृति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा कि आज हम सब लोग लखनऊ की धरती पर हैं और यूनेस्को ने वर्ल्ड क्रिएटिव सिटी की लिस्ट में भोजन की उत्कृष्ट परंपरा का निर्वहन करने के लिए लखनऊ को विश्व की धरोहर के रूप में समावेशित किया है। उन्होंने राज्य सरकार की तारीफ करते हुए कहा कि इस उपलब्धि को प्राप्त करने के लिए जिस प्रकार मुख्यमंत्री योगी की अगुआई में हर छोटी-छोटी बारीकी रचने व गढ़ने का काम किया गया, जिसमें डोजियर बनाने व सब्मिट करना शामिल है, निश्चित तौर पर उत्तर प्रदेश द्वारा प्रोएक्टिवली किया गया यह काम अनुकरणीय है और इसके लिए सभी बधाई के पात्र हैं। उत्तराखंड महोत्सव के बारे में शेखावत ने कहा कि लखनऊ में विशिष्ट पहचान बना चुके इस कार्यक्रम में उपस्थित होना गर्व का विषय है। जिस पौधे को गोविंदवल्लभ पंत ने महापरिषद के रूप में लगाया था वह आज विशाल वृक्ष का रूप ले चुका है। ये मात्र सांस्कृतिक आयोजन या मनोरंजन का साधन नहीं है, बल्कि उत्तराखंड की आत्मा, परंपरा और लोकानुभूति को संजोकर उत्तरखंड के गौरवशाली सांस्कृतिक संसार की ऊर्जा को समावेशित करके उसे लखनऊ की धरती पर संज

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