निवेशकों की नजर Budget 2026 पर: ट्रांजेक्शन टैक्स और STCG में कमी की उम्मीद

नई दिल्ली

अगले महीने पेश होने वाले केंद्रीय बजट 2026 से पहले शेयर बाजार के निवेशकों और एक्सपर्ट्स ने सरकार के सामने अपनी मांगों की लिस्ट रख दी है। बाजार के जानकारों का कहना है कि रिटेल इनवेस्टर्स को प्रोत्साहित करने के लिए लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) पर मिलने वाली टैक्स छूट की सीमा को बढ़ाया जाना चाहिए।

फिलहाल साल भर में 1.25 लाख रुपए तक के मुनाफे पर कोई टैक्स नहीं लगता, जिसे बढ़ाकर 2 लाख रुपए करने का सुझाव दिया गया है। इसके अलावा, निवेशक सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) और शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन (STCG) की ऊंची दरों को लेकर भी चिंतित हैं। बाजार का मानना है कि ट्रांजैक्शन पर लगने वाले टैक्स को कम करने से लिक्विडिटी बढ़ेगी और ज्यादा से ज्यादा लोग शेयर बाजार से जुड़ सकेंगे।

टैक्स छूट की सीमा बढ़ाने पर जोर

मार्केट पार्टिसिपेंट्स का कहना है कि पिछले कुछ सालों में शेयर बाजार में रिटेल निवेशकों की संख्या तेजी से बढ़ी है। ऐसे में मौजूदा 1.25 लाख रुपए की LTCG छूट सीमा काफी कम है। एक्सपर्ट्स का सुझाव है कि इसे बढ़ाकर कम से कम 2 लाख रुपए किया जाना चाहिए। उनका तर्क है कि इससे मिडिल क्लास निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो पर बेहतर रिटर्न मिलेगा और वे लंबी अवधि के लिए निवेश करने को प्रेरित होंगे।

STT कम करने की मांग

पिछले बजट में फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) पर STT की दरें बढ़ा दी गई थीं। ब्रोकरेज हाउस और ट्रेडर्स का कहना है कि ट्रांजैक्शन टैक्स ज्यादा होने की वजह से ट्रेडिंग की लागत बढ़ गई है, जिसका सीधा असर बाजार के वॉल्यूम पर पड़ रहा है। निवेशकों की मांग है कि कैश मार्केट में होने वाली खरीदारी पर STT की दरें कम रखी जाएं ताकि सट्टेबाजी के बजाय निवेश को बढ़ावा मिले।

होल्डिंग पीरियड में बदलाव की उम्मीद

फिलहाल अलग-अलग एसेट क्लास जैसे इक्विटी, डेट, गोल्ड और रियल एस्टेट के लिए 'लॉन्ग टर्म' की परिभाषा अलग-अलग है। बजट 2026 में उम्मीद की जा रही है कि सरकार इसे सरल बनाने के लिए सभी एसेट्स के लिए 12 महीने का एक समान होल्डिंग पीरियड तय कर सकती है। इससे टैक्स कैलकुलेशन आसान हो जाएगा और निवेशकों के बीच किसी तरह का कन्फ्यूजन नहीं रहेगा।

इंडेक्सेशन का लाभ फिर से मिले

रियल एस्टेट और गोल्ड जैसे एसेट्स पर से इंडेक्सेशन बेनिफिट हटने के बाद से निवेशकों में नाराजगी है। मार्केट एक्सपर्ट्स चाहते हैं कि सरकार कम से कम गैर-वित्तीय एसेट्स (नॉन-फाइनेंशियल एसेट्स) पर इंडेक्सेशन का लाभ फिर से शुरू करे या फिर टैक्स की दर को 12.5% से घटाकर 10% कर दे। इससे लंबी अवधि के निवेशकों को महंगाई के अनुपात में राहत मिल सकेगी।

निवेश बढ़ेगा तो इकोनॉमी को फायदा होगा

टैक्स एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर सरकार कैपिटल गेन टैक्स के ढांचे को उदार बनाती है, तो इससे घरेलू बचत का फ्लो शेयर बाजार की तरफ बढ़ेगा। विदेशी निवेशकों (FPIs) की बिकवाली के बीच घरेलू निवेशकों का पैसा बाजार को मजबूती दे सकता है। सरकार के लिए चुनौती रेवेन्यू और निवेशकों की उम्मीदों के बीच बैलेंस बनाने की होगी।

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