चिड़चिड़ापन और थकान से छुटकारा: गर्मियों में अच्छी नींद के लिए अपनाएँ ये एक्सपर्ट टिप्स

मौसम में बदलाव का असर नींद पर पड़ता है। ऐसा देखा गया है कि गर्मी में लोग सर्दी के मुकाबले कम सोते हैं और इसका सीधा असर उनकी दिनचर्या पर होता है। आखिर क्यों गर्मी में नींद कम होती है और कैसे पाएं सुकून की नींद, बता रहे हैं एक्सपर्ट…

गर्मी में स्लीप साइकल में परिवर्तन और तापमान बढ़ने के कारण नींद कम आती है। लंबे समय तक रोशनी रहने से नींद लाने वाले हार्मोन मेलाटोनिन के उत्पादन में बाधा आती है, जिससे सोने और उठने का शरीर का प्राकृतिक चक्र प्रभावित होता है। स्वास्थ्य के लिए सात से आठ घंटे की नींद जरूरी है। ऐसे में नींद पूरी न होने पर कई लोगों को मानसिक तनाव, थकान व चिड़चिड़ेपन की समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

गर्मी में होती है कम नींद

गर्मी में नींद कम होना किसी बीमारी का संकेत नहीं है। दरअसल, गर्मी में दिन लंबे और रात छोटी होती हैं और अंधेरा होने के बाद ही मेलाटोनिन हार्मोन का उत्पादन शुरू होता है। चूंकि अंधेरा देर से होता है, इसलिए रात हार्मोन कम बनने से नींद कम हो जाती है।

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क्या कहती है स्टडी?

बर्लिन में सेंट हेडविग हास्पिटल में नींद पर हुई स्टडी बताती है कि नींद का पैटर्न सकैंडियन रिदम (जैविक घड़ी) के हिसाब से बदलता है। जो शरीर में 24 घंटे सूरज के हिसाब से चलती है।

कैसे पाएं गुणवत्ता वाली नींद?

    प्राकृतिक धूप लें और शारीरिक गतिविधियां करें।
    सही समय पर सोने-जागने का अभ्यास करें।
    सोते समय कमरा ठंडा और शांत हो। कमरे में अंधेरा हो।
    सोने जाने से पहले चाय- कॉफी न पिएं।
    बिस्तर पर जाने से एक घंटे पहले मोबाइल से दूरी बना लें।
    सोने से पहले नहा लें और आराम के लिए सूती कपड़े पहनें।
    जब सोने का वक्त हो तभी बिस्तर पर जाएं, उससे पहले नहीं।
    रात में ज्यादा भारी खाना खाकर सोने से परहेज करें।

बदलता मौसम बिगाड़ रहा है आपकी 'बायोलॉजिकल क्लॉक'

यह सच है कि मौसम में बदलाव और सूर्योदय सूर्यास्त के समय में परिवर्तन नींद पर असर जरूर डालते हैं, क्योंकि मानव शरीर की जैविक घड़ी सूरज के हिसाब से थोड़ा आगे-पीछे हो सकती है। इसलिए गर्मी में लोग देर से सोने के बावजूद जल्दी उठ जाते हैं और नींद पूरी नहीं हो पाती है। इसलिए बहुत जरूरी है कि रात की अच्छी नींद के लिए दिन मैं अपनी गतिविधियों पर ध्यान रखें। अगर आपकी दिनचर्या सही रहेगी तो रात की नींद भी पर्याप्त होगी। दरअसल, मानसिक स्वास्थ्य के बहुत जरूरी है।

लाइफस्टाइल बनी नींद की दुश्मन

आजकल लोगों की बदलती लाइफस्टाइल भी नींद की दुश्मन बन गई है। कई लोग ऐसे हैं, जो देर रात तक आफिस का काम करते हैं, लेकिन सुबह उन्हें जल्दी उठना पड़ता है। ऐसे में नींद पूरी नहीं होती और पूरे दिन थकान लगती है। कई लोग ऐसे हैं, जो देर रात तक मोबाइल देखते हैं, लेकिन सुबह काम की वजह से जल्दी उठना होता है। ऐसे लोगों की नींद भी पूरी नहीं होती और फिर मानसिक तनाव बढ़ने लगता है।

 

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