मध्य प्रदेश सरकार का VVIP बेड़ा हाईटेक होगा, 24 साल बाद नया जेट और 15 साल बाद नया हेलिकॉप्टर मिलेगा

भोपाल 
राज्य शासन को नए सुपर मिड साइज जेट विमान और ट्विन इंजन हेलिकॉप्टर की डिलेवरी जल्द होने वाली है। राज्य सरकार को मिलने वाला आधुनिक बिजनेस जेट बॉम्बार्डियर चैलेंजर 3500 जुलाई 2026 तक मिल सकता है। यह अत्याधुनिक विमान कनाडा की कंपनी बॉम्बार्डियर इंक. द्वारा तैयार किया जा रहा है।  राज्य सरकार इस विमान को संचालित करने के लिए अपने पायलट को विशेष प्रशिक्षण के लिएअमेरिका भेजेगी। ताकि वे इस अत्याधुनिक जेट को सुरक्षित और कुशलता से उड़ा सकें। 

आधुनिक सुविधाओं से लैस है विमान
करीब 236 करोड़ रुपए के चैलेंजर 3500 एक सुपर मिड-साइज जेट है, जिसमें नौ यात्रियों के बैठने की क्षमता है। इसकी केबिन ऊंचाई लगभग 6 फीट और चौड़ाई 7 फीट 2 इंच है। यह विमान करीब 459 नॉट्स यानी 850 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ान भर सकता है और लगभग 6,297 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकता है। इसके अलावा, यह 45,000 फीट की ऊंचाई तक उड़ान भरने में सक्षम है और कम लंबाई वाले रनवे (करीब 1,474 मीटर) से भी उड़ान भर सकता है। विमानन विभाग के अपर मुख्य सचिव संजय शुक्ला ने बताया कि जून-जुलाई 2026 में डिलीवरी का समय है।   

H160 हेलीकॉप्टर 2027 तक बेड़े में शामिल होगा
राज्य सरकार का करीब 170 करोड़ का अत्याधुनिक H160 हेलीकॉप्टर जनवरी 2027 तक बेड़े में शामिल हो जाएगा। यह हेलीकॉप्टर फ्रांस की प्रमुख एयरोस्पेस कंपनी एयरबस हेलीकॉप्टर द्वारा निर्मित है। बताया जा रहा है कि भारत में फिलहाल इस मॉडल के केवल 5 से 6 हेलीकॉप्टर ही संचालित हो रहे हैं। 

हर मौसम और रात में उड़ान भरने में सक्षम
विमानन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, H160 हेलीकॉप्टर अत्याधुनिक तकनीक से लैस है और हर मौसम में उड़ान भरने के साथ-साथ रात में भी संचालन करने में सक्षम है। इस हेलीकॉप्टर की खासियत इसकी अल्ट्रा-क्वाइट यानी बेहद कम शोर वाली तकनीक है। इसमें अत्याधुनिक जेट इंजन, पूरी तरह वॉयस कंट्रोल्ड कॉकपिट, एडवांस एवियोनिक्स सिस्टम और बेहतर सुरक्षा के लिए बाई-प्लेन स्टेबलाइजर दिया गया है। 

20 हजार फीट की ऊंचाई और 890 किमी की रेंज
H160 हेलीकॉप्टर की प्रमुख खूबियां में यह है कि यह 20 हजार फीट की अधिकमत ऊंचाई तक उड़ान भर सकता है। इसकी रेंज 890 किमी हैं। इसके एक साथ आठ यात्री बैठ सकते है। हेलीकॉप्टर का इंटीरियर लग्जरी और सुविधा को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। 

2002 में खरीदा था पुराना विमान 
सुपर किंग बी-200- यह विमान राज्य शासन ने वर्ष 2002 में रेथ्यॉन एयरक्राफ्ट कंपनी से 23 करोड़( 47,56,804 अमेरिकन डॉलर) में खरीदा था। यह सात सीटर है। ये 3000 हजार घंटे उड़ान कर चुका है। 2021 के दौरान ग्वालियर एयरपोर्ट पर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। न तो उसकी मरम्मत कराई गई और न ही अब तक नया विमान खरीदा जा सका है। स्थिति यह है कि सरकार के पास फिलहाल संचालन योग्य कोई फिक्स्ड-विंग विमान नहीं है और हेलिकॉप्टरों की संख्या भी जरूरत के मुकाबले कम है। इसी कारण सरकारी यात्राओं के लिए निजी एविएशन कंपनियों पर निर्भरता लगातार बढ़ी है, जिससे खर्च में भी इजाफा हुआ है।

पुराने यूरोकॉप्टर की जगह लेगा नया चॉपर
शासन ने ईसी-155, बी-1 हेलीकॉप्टर वर्ष 2011 में फ्रांस की यूरोकॉप्टर कंपनी से खरीदा था। यह उड़ान भर रहा है। इसे 10.5 मिलियन यूरो में खरीदा गया था। दो इंजन है। छह सीटर है। इसका मेंटेनेंस खर्च बढ़ रहा है। पुराने हेलीकॉप्टर की देखरेख पर बढ़ रहे खर्च के कारण सरकार ने अधिक आधुनिक और किफायती विकल्प चुनने का निर्णय लिया। राज्य सरकार के वरिष्ठ पायलट कैप्टन इस हेलीकॉप्टर के संचालन की दो माह की विशेष ट्रेनिंग के लिए फ्रांस जाएंगे। 

 2003 और 1998 में खरीदे थे दो हेलीकॉप्टर 
सरकार ने इससे पहले 2003 में हेलिकॉप्टर बैल-407 अमेरिका से 9 करोड़ रुपए में खरीदा था। यह चार सीटर था। इसके अलावा वर्ष 1998 में अमेरिका से ही 21 करोड़ रुपए हेलिकॉप्टर बैल-430, टेक्सट्रान खरीदा था। यह दो इंजिन का छह सीटर हेलीकॉप्टर था। इनको बहुत पुराने होने के विमानन विभाग ने बेड़े से पहले ही बाहर कर दिया। 

प्रदेश में किराए पर भारी भरकम राशि खर्च 
विधानसभा में पेश जानकारी के अनुसार मध्य प्रदेश सरकार का हवाई यात्रा खर्च लगातार बढ़ रहा है। हाल के कुछ वर्षों में किराये के विमान और हेलिकॉप्टरों पर खर्च औसतन 20 से 21 लाख रुपए प्रतिदिन तक पहुंच गया है। यह जानकारी विधानसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में विधानसभा में दी गई। आंकड़ों के मुताबिक, जनवरी 2021 से नवंबर 2025 के बीच सरकार ने निजी विमान और हेलिकॉप्टर किराये पर लेने के लिए करीब 290 करोड़ रुपए खर्च किए। इनमें सिर्फ 2025 के पहले 11 महीनों में ही 90.7 करोड़ रुपए खर्च हुए, जो अब तक का सबसे अधिक वार्षिक खर्च है। सरकार ने बताया कि जनवरी 2024 से नवंबर 2025 के बीच लगभग दो वर्षों में 143 करोड़ रुपए खर्च हुए, जो औसतन 6.2 करोड़ रुपए प्रति माह है। वहीं 2021 से 2023 के बीच तीन वर्षों में खर्च 147 करोड़ रुपए रहा। विधानसभा दस्तावेजों के अनुसार, वर्ष 2023 में विमान और हेलिकॉप्टर किराये की दरों में 20 से 30 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की गई। सरकार ने इसके पीछे कोविड के बाद बढ़ी मांग, ईंधन लागत और मेंटेनेंस खर्च बढ़ने को वजह बताया है।

प्रदेश के 31 जिलों में विमानतल और हवाई पटि्टयां उपलब्ध 
प्रदेश में विमानन विभाग एवं विमानन संचालनायल को गठन 1 जून 1982 को किया गया। इस विभाग का काम अतिविशिष्ट व्यक्तियों के लिए शासकीय विमान/हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराना, शासन के बेड़े के विमान/हेलीकॉप्टरों का संधारण तथा परिचालन, प्रदेश में वायु सेवाओं का विस्तार के लिए स्वयं के संसाधनों से हवाई पट्टियों का विकास एवं क्षेत्रीय संपर्कता नीति के अंतर्गत राज्य के अंदर और बाहर वायु सेवा का विस्तार करना है। बता दें मध्य प्रदेश के 55 जिलों में से 31 जिलों में विमानतल और हवाई पटि्टयां उपलब्ध हैं। 

 

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