जीवन की दौड़ या मानसिक कैद? गरुड़ पुराण के अनुसार मोक्ष का असली अर्थ

 क्या हो अगर आप पूरी जिंदगी एक ऐसी दौड़ में भाग रहे हों, जिसका कोई अंत ही न हो? जहां हर उपलब्धि कुछ समय के लिए खुशी देती है, लेकिन फिर आपको अगले लक्ष्य की तरफ धकेल देती है. बचपन से हमें यही सिखाया जाता है- अच्छी पढ़ाई करो, करियर बनाओ, शादी करो, परिवार संभालो.  फिर एक दिन शांति मिलेगी. लेकिन सच यह है कि वह 'एक दिन' कभी आता ही नहीं. हम एक पिंजरे से निकलकर दूसरे पिंजरे में चले जाते हैं. बस फर्क इतना होता है कि नया पिंजरा पहले से ज्यादा आरामदायक लगता है. हमें लगता है कि हम आगे बढ़ रहे हैं, जबकि असल में हम एक ही जगह गोल-गोल घूम रहे होते हैं.

सबसे खतरनाक बात यह है कि हमें अपनी इस कैद का एहसास भी नहीं होता है. क्योंकि हमने इसे ही सफलता का नाम दे दिया है. अगर इतनी सारी उपलब्धियों के बाद भी अंदर खालीपन महसूस हो. तो सवाल उठता है कि हम आखिर किस चीज के पीछे भाग रहे हैं?

असली बंधन बाहर नहीं, दिमाग के अंदर है
गरुड़ पुराण के अनुसार, बंधन बाहर नहीं होते, बल्कि हमारे मन में होते हैं. पैसा, नाम और सुविधा मिल सकती है, लेकिन सुकून तभी मिलेगा जब मन शांत होगा. आज इंसान या तो बीते हुए समय को सोचता रहता है या भविष्य की चिंता करता है, इसलिए वह वर्तमान में जी ही नहीं पाता. यही उसकी असली कैद है.

मोक्ष कुछ पाने में नहीं, छोड़ने में है आजादी
गरुड़ पुराण बताता है कि मोक्ष का मतलब कुछ पाना नहीं, बल्कि छोड़ना है. हर वो डर, हर वो झूठी मान्यता, हर वो आदत, जो आपने बिना सोचे स्वीकार कर ली. वही आपकी असली जंजीर है. जिंदगी को एक मोबाइल फोन की तरह समझें. अगर उसमें बहुत सारे ऐप्स एक साथ चल रहे हों, तो वह स्लो हो जाता है. वैसे ही हमारे दिमाग में भी कई बेकार 'ऐप्स' चलते रहते हैं कि लोग क्या कहेंगे, मुझे और चाहिए, मुझे हारना नहीं है. यही हमारी ऊर्जा खत्म करते हैं.

मोक्ष का अर्थ है-
डर छोड़ना
लालच छोड़ना
दूसरों की राय की चिंता छोड़ना

जब इंसान इन चीजों को छोड़ देता है, तभी वह अंदर से हल्का महसूस करता है.
इतिहास में भी ऐसे उदाहरण मिलते हैं जहां लोगों ने सब कुछ होते हुए भी अंदर खालीपन महसूस किया. वहीं, कुछ लोग साधारण जीवन जीते हुए भी भीतर से पूरी तरह शांत और मुक्त रहे. इससे साफ होता है कि मोक्ष का संबंध आपकी बाहरी स्थिति से नहीं, आपकी सोच से है.

आज के समय में यह और भी जरूरी हो गया है, क्योंकि हमारा ध्यान हर पल बंटा रहता है. फोन, सोशल मीडिया और नोटिफिकेशन हमें लगातार खींचते रहते हैं. हमें लगता है कि हम अपनी मर्जी से जी रहे हैं, लेकिन सच में हम अपनी आदतों के गुलाम बन चुके हैं.

असली आजादी क्या है?
गरुड़ पुराण के अनुसार, असली आजादी तब मिलती है जब आपकी खुशी बाहर की चीजों पर निर्भर नहीं रहती. न पैसे पर, न लोगों की तारीफ पर.

अंतिम बात
मोक्ष कोई दूर की चीज नहीं है और न ही यह मरने के बाद मिलता है. यह उसी समय शुरू हो जाता है, जब इंसान सच्चाई को समझकर अपनी इच्छाओं और डर से ऊपर उठ जाता है.आपको इस दौड़ को जीतने की जरूरत नहीं है, बस इस दौड़ से बाहर निकलने की जरूरत है.

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