एकात्म धाम को मिलेगा नया आध्यात्मिक स्वरूप, CM मोहन यादव ने पंचायतन मंदिर की रखी आधारशिला

खंडवा
 तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में एकात्म धाम परियोजना के अंतर्गत भव्य पंचायतन मंदिर का विधि-विधान से भूमि और शिला पूजन संपन्न हुआ। सीएम मोहन यादव ने ओंकार पर्वत पर स्थित वेधशाला में अपनी धर्मपत्नी के साथ वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हवन-पूजन किया। षट दर्शन संत मंडल के पूज्य संतों के सानिध्य में आयोजित इस अनुष्ठान में देश के प्रमुख वैदिक पीठों के आचार्यों ने सहभागिता की।

विद्वानों ने कराया अनुष्ठान
शिला पूजन के पावन अवसर पर श्री वेंकटेश्वर वेद विज्ञान पीठम् (धर्मगिरि, आंध्र प्रदेश) के प्राचार्य के.एस.एस. अवधानी, दक्षिणाम्नाय श्री शारदा पीठम् (कर्नाटक) एवं श्री श्री गुरुकुल के प्रतिष्ठित आचार्यों द्वारा वैदिक परंपरा अनुसार अनुष्ठान पूर्ण कराया गया। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि भारत का जो पारंपरिक आध्यात्मिक और सांस्कृतिक वैभव रहा है, वह अब पूरी भव्यता के साथ लौट रहा है।

पंचायतन पूजा पद्धति
आदि शंकराचार्य ने सनातन संस्कृति में शैव, वैष्णव, शाक्त, सौर और गाणपत्य संप्रदायों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए 'पंचायतन पूजा' पद्धति का पुनरुद्धार किया था। उपनिषदों के अनुसार, जैसे सोने से बने विभिन्न आभूषणों का मूल तत्व केवल सोना ही होता है, उसी प्रकार पंचदेव वस्तुतः एक ही निराकार 'परम ब्रह्म' के साकार रूप हैं। एकात्म धाम में इस मंदिर का निर्माण आदि शंकर के इसी युगांतरकारी एकात्म दर्शन को चिरस्थायी बनाए रखने के लिए किया जा रहा है।

नागर शैली में बनेगा भव्य पंचायतन मंदिर
पंचायतन मंदिर का निर्माण पारंपरिक नागर शैली में किया जाएगा। मंदिर के केंद्र में भगवान शिव का मुख्य मंदिर होगा, जबकि चारों दिशाओं के कोनों में भगवान विष्णु, भगवान सूर्य, भगवान गणेश और देवी शक्ति के उपमंदिर बनाए जाएंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि भगवान शिव की ज्योतिर्लिंग नगरी ओंकारेश्वर में विकसित हो रहा एकात्म धाम आने वाले समय में सनातन ज्ञान परंपरा, आध्यात्मिक चेतना और सांस्कृतिक एकता का केंद्र बनेगा।

आदि शंकराचार्य की परंपरा को आगे बढ़ाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि आदि शंकराचार्य ने विभिन्न उपासना पद्धतियों में समन्वय स्थापित करने के लिए पंचायतन पूजा की परंपरा को पुनर्जीवित किया था। ओंकारेश्वर में बनने वाला पंचायतन मंदिर इसी परंपरा को आगे बढ़ाएगा। उन्होंने कहा कि आज समाज के सामने कई चुनौतियां और विरोधाभास हैं। कुछ शक्तियां विकास और सामाजिक एकता की राह में बाधाएं खड़ी करती हैं। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि भगवान के आशीर्वाद से इन चुनौतियों का सामना किया जाएगा।

सिंहस्थ 2028 से पहले निकलेगी ‘एकात्म यात्रा’
मुख्यमंत्री ने कहा कि 2028 के उज्जैन सिंहस्थ महापर्व से पहले मध्यप्रदेश में एकात्म यात्रा निकाली जाएगी। यह यात्रा प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से होकर गुजरेगी और सिंहस्थ के दौरान इसका समापन होगा। उन्होंने कहा कि यात्रा के जरिए भारत की ज्ञान परंपरा, संत परंपरा और एकत्व के दर्शन का संदेश देश और दुनिया तक पहुंचाया जाएगा।

नर्मदा तट से जुड़ी है आदि शंकराचार्य की परंपरा
मान्यता है कि आदि शंकराचार्य ने ओंकारेश्वर में नर्मदा नदी के तट पर अपने गुरु गोविंदपादाचार्य से आध्यात्मिक और दार्शनिक शिक्षा प्राप्त की थी। इसी आध्यात्मिक परंपरा को आधार बनाकर एकात्म धाम का विकास किया जा रहा है। 

एकात्म धाम में सीएम मोहन यादव ने पंचायतन मंदिर निर्माण के लिए शिला पूजन किया, प्रकांड विद्वानों ने कराया पूजन

ये हैं खास बातें

    देवताओं का स्थान निर्धारण: मंदिर के केंद्र में मुख्य देवालय देवाधिदेव भगवान शिव का होगा। चारों कोनों पर उप-देवालय स्थापित होंगे—ईशान कोण में भगवान विष्णु, आग्नेय कोण में भगवान सूर्य, नैऋत्य कोण में भगवान गणेश और वायव्य कोण में भगवती शक्ति विराजमान होंगी।

    शिखर और गर्भगृह: मुख्य मंदिर का शिखर 'सोमतिलक' शैली में बनेगा, जबकि गर्भगृह 'सर्वतोभद्र' शैली पर आधारित होगा, जिसमें चारों दिशाओं से प्रवेश द्वार की व्यवस्था रहेगी।

    ​विशाल मंडप और स्तंभ: मुख्य मंडप में 26 फीट व्यास का एक कलात्मक गुंबद होगा। पूरे परिसर में 100 नक्काशीदार स्तंभ, 8 लघु संवर्णा (सामरण) और भव्य तोरण-द्वार निर्मित किए जाएंगे।

    आधार और निर्माण सामग्री: 16 फीट ऊंचे आधारभूत अधिष्ठान (जगति) पर स्थित इस मंदिर के निर्माण में 80,000 घन फीट नक्काशीदार गुलाबी बलुआ पत्थर का उपयोग हो रहा है। संपूर्ण मंदिर 121 स्वर्णिम कलशों से सुशोभित रहेगा।

2195 करोड़ की लागत से बन रहा एकात्म धाम
शंकराचार्य की ज्ञान भूमि ओंकारेश्वर में 'आचार्य शंकर सांस्कृतिक एकता न्यास' द्वारा एकात्म धाम का तीव्र गति से विकास किया जा रहा है। परियोजना के प्रथम चरण में आचार्य शंकर की 108 फीट ऊंची 'एकात्मता की मूर्ति' पहले ही स्थापित हो चुकी है। अब द्वितीय चरण में ₹2,195 करोड़ की लागत से 'अद्वैत लोक' संग्रहालय का निर्माण प्रगति पर है, जो वैश्विक स्तर पर भारतीय दर्शन का संदेश प्रसारित करेगा।

मांधाता पर्वत पर आकार ले रहा एकात्म धाम 
मध्यप्रदेश सरकार की ओर से मांधाता पर्वत पर विकसित किया जा रहा एकात्म धाम आध्यात्मिक और सांस्कृतिक केंद्र के रूप में तैयार किया जा रहा है। इसका आधार आदि शंकराचार्य का एकात्म दर्शन है, जिसमें विविधता में एकता और सभी जीवों में एक ही परम चेतना के अस्तित्व की अवधारणा पर जोर दिया गया है।

पंचायतन मंदिर का शिलान्यास और निर्माण इसी व्यापक परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। बुधवार रात मुख्यमंत्री के शयन दर्शन और गुरुवार सुबह आधारशिला कार्यक्रम के साथ ओंकारेश्वर में धार्मिक एवं आध्यात्मिक विकास से जुड़े आयोजनों को नई गति मिली है।

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